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मानसून सत्रः एनपीएस और पेंशन बढ़ोतरी को लेकर सदन में क्या बोले जयराम-जानिए

मानसून सत्रः एनपीएस और पेंशन बढ़ोतरी को लेकर सदन में क्या बोले जयराम-जानिए

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लेखराज धरटा/शिमला। केंद्र सरकार के न्यू पेंशन स्कीम (NPS) के नियमों में बदलाव के हिमाचल में लागू करने को लेकर सरकार ने साफ किया है कि भारत सरकार के नियम और अनुदेश हिमाचल सरकार के कर्मचारियों पर लागू नहीं होते हैं। प्रदेश सरकार अपने संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुए नियम लागू करती है। वहीं, हिमाचल के पेंशनरों को पंजाब (Punjab) की तर्ज पर 65-70-75 में 5-10-15 फीसदी बेसिक पेंशन बढ़ोतरी को लेकर भी सरकार ने न कर दी। सरकार ने स्पष्ट किया कि पंजाब के पेंशन नियम भी हिमाचल प्रदेश में लागू नहीं होते हैं।


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यह जानकारी सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) ने नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री (Leader of Opposition Mukesh Agnihotri) और ठियोग के विधायक राकेश सिंघा के सवाल के जवाब में दी। विधानसभा के मानसून सत्र में आज भी प्रश्नकाल की कार्यवाई शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुई। पहला ही सवाल नई पेंशन योजना को लेकर ठियोग के विधायक राकेश सिंघा व विपक्ष नेता मुकेश अग्निहोत्री ने पूछा।

उन्होंने पूछा कि केंद्र सरकार द्वारा एनपीएस के नियमों में बदलाव किया है। यदि हां तो प्रदेश सरकार भी इसको लागू करने का विचार रखती है। यदि नहीं तो कारण क्या है। क्या प्रदेश सरकार राज्य के कर्मियों को 2003 से पहले की पद्दति के आधार पर पेंशन देने का विचार रखती है। जवाब में सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि पेंशन को लेकर समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं। हिमाचल में जिन कर्मियों ने 15-5-2003 के बाद नौकरी में प्रवेश किया वह अंशदायी पेंशन योजना के तहत पेंशन प्राप्त कर सकते हैं।

सरकार की मजबूरी है एनपीएस लागू रखना

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री (Leader of Opposition Mukesh Agnihotri) ने पूछा कि 2004 में अटल बिहारी सरकार ने एनपीएस (NPS) लागू की थी। बीजेपी (BJP) संसाधनों की बात न कर पुरानी पेंशन स्कीम योजना शुरू करे, क्योंकि अब तो डबल इंजन की सरकार है। इस पर सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि एनपीएस कर्मियों का सरकारी अंशदान बढ़ाकर 10 से 14 फीसदी कर दिया है, जिसका लाभ 80 हज़ार कर्मियों को मिल रहा है। हिमाचल को टैक्स के माध्यम से 10 हजार करोड़ आता है, जबकि कर्मियों के वेतन व पेंशन पर खर्चा 19 हजार करोड़ का है। ऐसे में सरकार की मजबूरी है, एनपीएस (NPS) लागू रखना।

सीएम के जवाब से असंतुष्ट राकेश सिंघा ने कहा कि एनपीएस के रूल में कई खामियां हैं। प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के आदेशों का पालन करे। डेथ व विकलांगिता जैसे प्रभावितों को 10 लाख ग्रेजुएटी देने पर विचार करेगी। सरकार संवेदना को ध्यान रखते हुए साधनों को आड़े न लाए। सरकार एक निशान, एक प्रधान व एक विधान के नारे को एनपीएस में भी लागू करे। इस पर सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि 2003 में जब एनपीएस लागू हुए उस वक़्त कांग्रेस की सरकार सत्ता में थी। अब केरल को छोड़कर पूरे देश में एनपीएस लागू है। अन्य लाभों के लिए अभी कोई नियम नहीं बने हैं। ग्रेजुएटी की बात है तो 2018 में दी जाएगी। केंद्र सरकार यदि इसमें कुछ करती है तो प्रदेश सरकार विचार करेगी।

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