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CM बोले, किशोर गृहों, विशेष स्कूलों में काम करने वाले भावनात्मक रूप से जुड़ें

CM  बोले, किशोर गृहों,  विशेष स्कूलों में काम करने वाले भावनात्मक रूप से जुड़ें

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शिमला। किशोर गृहों व विशेष स्कूलों में विशेष देखभाल की आवश्यकता है ताकि वहां रहने वाले अपने आप को उपेक्षित महसूस न कर सकें। इस कार्य में लगे व्यक्तियों को इन बच्चों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ना चाहिए और इन बच्चों का कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। यह शब्द सीएम वीरभद्र सिंह ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहयोग से आयोजित शिक्षा का अधिकार अधिनियम पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भी ऐसे आयोगों को वित्तीय सहायता बढ़ा रही है, जो बच्चों व महिलाओं के कल्याण से जुड़े हैं। इसके अतिरिक्त राज्य में वृद्धा आश्रमों से भी हमें भावनात्मक रूप से जुड़ना चाहिए। सीएम ने कहा कि विभिन्न आयोगों, बोर्डों/संगठनों को निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करना चाहिए, ताकि निर्धारित लाभार्थियों का कल्याण सुनिश्चित बनाया जा सके।


  • कमजोर व वंचित समुदायों के कल्याण के लिए किया आयोग व संगठनों का गठन 

उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने बच्चों के कल्याण को सुनिश्चित बनाने के लिए बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन किया है, ताकि सभी कानून, नीतियां, कार्यक्रम और प्रशासनिक व्यवस्था बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित बनाने के लिए सही प्रकार से आपसी तालमेल से संविधान के अनुसार कार्यान्वित किया जा सके। सीएम ने इस अवसर पर भारत के स्कूलों में सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण पर प्रथम राष्ट्रीय रिपोर्ट के सर्वेक्षण कलेंडर का भी विमोचन किया। इस रिपोर्ट में सुरक्षित स्कूल वातावरण का जिला तथा राज्यवार डाटा विभिन्न मानकों के साथ दर्शाया गया है। सीएम ने कहा कि राज्य आयोग बच्चों के अधिकारों व कल्याण के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि  शिक्षा के अधिकार अधिनियम में कुछ कमी है तो उस पर विचार किया जाएगा।

 बाल अधिकार संरक्षण की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य प्रयांक कानूनगो ने कहा कि ऐसे अभिभावकों जो अपने बच्चों को बुनियादी शिक्षा से वंचित रखते हैं को किसी भी प्रकार के चुनाव लड़ने से वंचित रखने के लिए नीति बनाने की आवश्यकता है। यदि ऐसा होता है तो वह अन्य राज्यों के लिए उदाहरण होगा और यह जन चेतना के लिए एक अहम कदम होगा। उन्होंने कहा कि हालांकि हिमाचल प्रदेश में 6 से 14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों का नामांकन प्रतिशत शत प्रतिशत है तथा यह पहल अन्य बड़े राज्यों जहां बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं, के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही मध्याह्न भोजन योजना व गुज्जर समुदायों के लिए विशेष मोबाइल स्कूलों की भी सराहना की।

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