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घटती जैव विविधता पर CM चिंतित, Pollution पर रोक की वकालत

घटती जैव विविधता पर CM चिंतित, Pollution पर रोक की वकालत

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शिमला। सीएम वीरभद्र सिंह ने राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड (एचपीएसबीबी) द्वारा ‘जैव विविधता को मुख्यधारा में लाना लोगों और उनकी आजीविका को कायम रखना विषय पर यहां आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जैव विविधता जीवन का आधार है। पारिस्थितिकी से मिलने वाली आवश्यक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए सरकारें केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि सतत आर्थिक विकास के लिए जैव विविधता की ओर विशेष ध्यान दे रहीं हैं। सीएम ने कहा कि लोगों द्वारा अरक्षणीय उपभोग के चलते जैव विविधता प्रभावित हो रही है।

  • लोगों द्वारा अरक्षणीय उपभोग के चलते जैव विविधता हो रही है प्रभावित 

जैव विविधता में गिरावट मानव विकास के लिए गंभीर चेतावनी है तथा हमें प्राकृतिक संसाधनों के विध्वंस, फसलों की अत्याधिक कटाई, प्रदूषण इत्यादि पर रोक लगाना चाहिए। सभी को एकजुट होकर अपने प्रयासों से इन प्रचलनों को खत्म करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अधिनियम के अंतर्गत संरक्षण, जैविक स्त्रोतों का उपयोग तथा व्यावसायिक या अनुसंधान उद्देश्यों के लिए भारत में घटने वाली संबंधित जानकारी या जैविक सर्वेक्षण तथा जैविक उपयोग के उद्देश्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण के प्रथम चरण के लिए शिमला, चंबा, कुल्लू तथा सिरमौर ज़िलों को चयनित किया गया था तथा 200 जैव विविधता समितियां गठित की गई। सीएम ने कहा कि जैव विविधता में गिरावट रोकने और लोगों को जैविक विरासत को संरक्षित करने के लिए समर्थ बनाने से लोगों के जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि विश्व के 70 प्रतिशत निर्धन ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं तथा जैव विविधता पर निर्भर हैं।

सीएम ने वर्तमान में फसलों की पौष्टिक गुणवत्ता में गिरावट पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि किसान केवल वही फसलें तथा सब्जियां पैदा कर रहे हैं, जो उन्हें उच्च दाम प्रदान करती हैं, लेकिन इस प्रचलन से भविष्य में पारम्परिक फसलों पर पूर्ण रूप से विलुप्त होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि पारम्परिक फसलों के बारे जानना तथा उनके मूल्यों को समझना आवश्यक है। हमें प्राकृतिक स्त्रोतों के संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। 

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