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भाजपा ने खोले प्रदेश में ऐसे निजी विविः सीएम

भाजपा ने खोले प्रदेश में ऐसे निजी विविः सीएम

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सोलन। सीएम वीरभद्र सिंह ने महर्षि मार्कंडेश्वर विवि सोलन में एमबीबीएस के दाखिले पर उठे विवाद पर भाजपा को घेरते हुए कहा कि पहले यह बताएं कि प्रदेश में इस तरह के विवि किसने खोले। ये सभी भाजपा के कार्यकाल में खुले हैं और आज वे ही शोर मचा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे प्रदेश में निजी क्षेत्र में मेडीकल कॉलेजों के सदा ही खिलाफ रहे हैं। राजकीय संस्कृत महाविद्यालय सोलन में राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में शिरकत करने के बात पत्रकारों से बातचीत के दौरान सीएम ने कहा कि प्रदेश में निजी विश्वविद्यालय सेवा भाव से कम और बिजनेस भाव से अधिक कार्य कर रहे है। उन्होंने कहा कि एमएमयू का मामला उनके ध्यान में आया है और इसके बारे में वे शिमला जाकर फैसला लेंगे। जाहिर है कि गत दिवस सोलन भाजपा मंडल ने गत दिवस खूब हंगामा का था। वीरभद्र सिंह ने स्पष्ट किया कहा कि निजी विवि को लेकर जो भी नियम बनाए गए हैं सभी को उनका पालन करना चाहिए अगर कोई उनका उल्लघंन करता है, तो उस पर कार्रवाई जरूर होगी।

cm-solan2संस्कृत में उच्च शिक्षा के इच्छुक की सहायता करेंगे

संस्कृत महाविद्यालय सोलन में संस्कृत का राष्ट्र व समाज के विकास में योगदान विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संस्कृत कार्यशाला के अवसर पर सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि राज्य सरकार संस्कृत भाषा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबंद्ध है, और स्कूलों में संस्कृत को छठी से आठवीं कक्षा तक अनिवार्य बनाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में तुंगेश संस्कृत कालेज का अधिग्रहण किया है। उनकी इच्छा है कि राज्य के प्रत्येक जिले में संस्कृत महाविद्यालय अथवा संस्थान होने चाहिए। सरकार संस्कृत में उच्च शिक्षा के इच्छुक किसी भी विद्यार्थी को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने राज्य में संस्कृत भाषा को प्रोत्साहित करने वाले विद्वानों के प्रयासों की सराहना की। सीएम ने कहा कि सभी भाषाओं की उत्पति संस्कृत से हुई है और सभी ग्रंथ, वेद, पुराण तथा महाकाव्य संस्कृत में लिखे गए हैं और भारतीय होने के नाते हमें इस पर गर्व होना चाहिए। सीएम ने कहा कि देववाणी अथवा देवताओं की भाषा मानी जाने वाली संस्कृत हमें प्राचीन भारतीय सभ्यताओं के उद्भव एवं विकास को समझने में मदद करती है, जिसकी भारत को विश्व गुरु बनाने में अह्म भूमिका है। उन्होंने कहा कि संस्कृति एवं संस्कृत भाषा एक दूसरे के पर्याय हैं तथा इनका संरक्षण एवं प्रोत्साहन करना अत्यावश्यक है।

cm-solan1उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन आज पश्चिमी दुनिया में विदेशी भाषा के तौर पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत के महान ग्रंथों एवं महाकाव्यों का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया गया है, लेकिन इसके मूल स्वरूप का अपना ही महत्व है। सीएम ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को संस्कृत भाषा के मूल तत्वों का अध्ययन करना चाहिए, बेशक वह इसमें विद्वता हासिल न कर सके, लेकिन उन्हें इस भाषा का अध्ययन बोलने तथा समझने के लिए अवश्य करना चाहिए। वीरभद्र सिंह ने कहा कि संस्कृत का अध्यापन आकर्षक होना चाहिए, इसकी गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए तथा संस्कृत में अनुसंधान और अधिक व्यावहारिक व क्रियाशील होना चाहिए। सीएम ने इस अवसर पर पदमश्री रमाकान्त शुक्ल, प्रो. प्रियव्रत शर्मा, प्रो. केशव शर्मा व प्रो. रिहास बिहारी द्विवेदी को सम्मानित किया। इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्या पीठ नई दिल्ली के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पांडे, सर्म्पूणानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व कुलपति प्रो. अभिराज राजेन्द्र मिश्र, डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. हरिचन्द शर्मा ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।

 

https://youtu.be/jQbLCN6jXl4

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