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बजट सत्र : Computer Teachers को स्थाई नीति की उम्मीद

बजट सत्र : Computer Teachers को स्थाई नीति की उम्मीद

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धर्मशाला। प्रदेश के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में कार्यरत कंप्यूटर टीचर्स को भी इस बजट सत्र से उम्मीद बंधी है। 16 साल के संघर्ष के बाद इन लोगों को भी प्रदेश के आगामी बजट सत्र में अपने लिए एक स्थाई नीति की उम्मीद है। पिछले लम्बे अर्से से कंपनियों के शोषण का शिकार होते आए इन कंप्यूटर टीचरों ने कांग्रेस और भाजपा सरकार के आगे अपने लिए एक स्थाई नीति बनाने की मांग रखी थी, लेकिन किसी भी सरकार ने इन लोगों की मांगों पर गौर नहीं किया।


  • उत्तराखंड-पंजाब के पैटर्न को फॉलो करने की मांग

सीएम वीरभद्र सिंह ने भी चुनावी बेला को नजदीक देखते हुए धर्मशाला में आयोजित रैली में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए पॉलिसी बनाने की घोषणा कर इन लोगों में एक उम्मीद जगा दी है। लगभग एक दशक से संघर्ष कर रहे हिमाचल प्रदेश कंप्यूटर टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश शर्मा का कहना है कि उन्होंने सीएम को पॉलिसी बनाने को लेकर सपोर्टिंग लेटर दिए हैं जिसमें उत्तराखंड और पंजाब सरकार का उदाहरण दिया गया है। 

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने 7 वर्ष बाद अपने सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित कर दिया है, वहीं पंजाब सरकार ने तो मात्र 3 वर्ष में ही अपने आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित कर दिया। लिहाजा प्रदेश सरकार से भी इन्हीं दो राज्यों के पैटर्न को फॉलो करने की मांग की गई है। इनका कहना है कि प्रदेश सरकार इन्हें शिक्षा विभाग के अधीन लाए और इन्हें भी अन्य प्रवक्ताओं की तरह पदनाम दिया जाए। जगदीश शर्मा का कहना है कि जिस तरह से सीएम ने घोषणा की है और उन्हें आश्वासन दिया है, उससे उन्हें उम्मीद है कि इस बजट सत्र में आउट सोर्स कर्मचारियों के लिए एक अदद पॉलिसी बनेगी और वर्षों से चला आ रहा कम्प्यूटर टीचरों का संघर्ष रंग लाएगा। मौजूदा समय में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस समय लगभग 15 सौ से अधिक शिक्षक कंप्यूटर की तालीम बच्चों को दे रहे हैं। इन शिक्षकों को निजी कंपनियों के माध्यम से स्कूलों में तैनात किया गया है। कभी कम वेतन और देरी से वेतन मिलने के कारण इन शिक्षकों का हमेशा ही शोषण होता रहा है। अभी भी ये शिक्षक निजी कंपनी के अधीन प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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