Covid-19 Update

1,42,510
मामले (हिमाचल)
1,04,355
मरीज ठीक हुए
2039
मौत
23,340,938
मामले (भारत)
160,334,125
मामले (दुनिया)
×

CITU @ नेताओं, ठेकेदारों और अफसरशाही की तिकड़ी में पिस रहा मजदूर

CITU @ नेताओं, ठेकेदारों और अफसरशाही की तिकड़ी में पिस रहा मजदूर

- Advertisement -

कांग्रेस-बीजेपी मजदूरों के हितों की रक्षा करने में विफल

Laborers: शिमला। माकपा का मजदूर संगठन भारतीय मजदूर संगठन (सीटू) ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी मजदूरों के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है। उसने कहा कि कांग्रेस हो या बीजेपी, इनके एजेंडे में मजदूर वर्ग नहीं हैं। इनके चुनावी मेनीफेस्टो में इनका जिक्र नाममात्र होता है। उसका कहना है कि हिमाचल सरकार ने कभी भी मजदूरों के हितों की पैरवी नहीं की, बल्कि नेताओं, ठेकेदारों और अफसरशाही की तिकड़ी में मजदूर पिस रहा है। 


Laborers: 30 मई को शिमला में करेंगे विशाल जनसभा

माकपा के जिला सचिव विजेंद्र मेहरा ने आज यहां कहा कि मजदूरों के हितों की रक्षा को 30 मई को शिमला में विशाल जनसभा होगी। सीटू के स्थापना दिवस के मौके पर 30 मई को शिमला में होने वाली इस रैली के माध्यम से मजदूरों आवाज को बुलंद किया जाएगा। इस रैली में मजदूरों के साथ-साथ आउटसोर्स कर्मचारी भी हिस्सा लेंगे। इस रैली में राज्यभर से 15 हजार मजदूर हिस्सा लेंगे। मेहरा ने कहा कि यह रैली राज्य सचिवालय के बाहर होगी और इस दौरान मजदूरों के 11 सूत्रीय मांगपत्र पर सरकार के खिलाफ हल्ला बोला जाएगा। उन्होंने कहा कि सीटू ने इन मांगों के बारे में पहले ही सरकार को अवगत करवाया है, लेकिन सरकार इस पर कोई भी कदम नहीं उठा रही।

इस रैली में शिमला की उनके साथ जुड़ी 30 मजदूर इकाइयां रैली में हिस्सा लेंगी। इसमें होटल मजदूर, अस्पताल मजदूर स्कूल मजदूर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आदि शामिल हैं। माकपा नेता ने राज्यभर में कार्यरत सरकारी या निजी क्षेत्र में कार्यरत हजारों आउटसोर्स और अनुबंध मजदूरों से भी इस महारैली में शामिल होने की अपील की। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि वह मजदूरों के 11 सूत्रीय मांगपत्र को पूर्ण करें अन्यथा आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश का मजदूर वर्ग इस मजदूर विरोधी सरकार को बाहर कर देगा। मेहरा ने प्रदेश सरकार पर मजदूर विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले 14 माह से शोंगठोंग पन बिजली और 100 दिन से ऑकलैंड स्कूल में चल रहा आंदोलन इसका उदाहरण है।

उनका कहना था कि हर जगह मजदूर आंदोलन को कुचलने के लिए यह सरकार धारा-144 व दमन का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि  पूरे देश की तुलना में हिमाचल में मजदूरों को सबसे कम वेतन दिया जा रहा है। यहां केवल 6 हजार रुपए वेतन है, जबकि दिल्ली की प्रदेश सरकार 13365 रुपए वेतन दे रही है। इसके साथ-साथ मज़दूरों के वेतन को महंगाई सूचकांक से नहीं जोड़ा गया है। माकपा नेता ने कहा कि हर बात के लिए पंजाब सरकार की नीति का अनुसरण करने वाली हिमाचल सरकार मज़दूरों के मसले पर पंजाब सरकार की तर्ज पर सुविधाएं देने को तैयार नहीं। प्रदेश में आउटसोर्स व कॉट्रेक्ट वर्करज का भारी शोषण किया जा रहा है। उनके लिए कोई नीति नहीं बनाई जा रही है।

आंगनबाड़ी, मिड डे मील व आशा वर्करज़ को हिमाचल में सबसे कम वेतन दिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 26 अक्तूबर 2016 को ‘‘समान काम के लिए समान वेतन के निर्णय को प्रदेश में कहीं भी लागू नहीं किया जा रहा है। इस तरह यह सरकार केवल उद्योगपतियों की सरकार बन कर रह गई है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि प्रदेश में 18 हज़ार रुपए न्यूनतम वेतन घोषित किया जाए।

धूमल का वारः BJP ने नहीं Congress ने किया वीरभद्र को प्रताड़ित

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है