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नया बखेड़ाः सचिवों ने इस्तीफा दिया नहीं, कांग्रेस मुख्यालय बुलाकर लिया गया

नया बखेड़ाः सचिवों ने इस्तीफा दिया नहीं, कांग्रेस मुख्यालय बुलाकर लिया गया

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यशपाल शर्मा/शिमला। सीएम वीरभद्र सिंह ने अब नया बखेड़ा खड़ा करते हुए कहा है कि दोनों पीसीसी सचिवों से कांग्रेस मुख्यालय  बुलाकर इस्तीफे लिए गए हैं, जबकि उन्होंने इस्तीफे स्वयं नहीं दिए वीरभद्र सिंह ने मंडी रवाना होने से पहले कहा कि सीएम भी मंत्रिमंडल का गठन अपनी मर्जी से नहीं करते हैं, इससे पहले बातचीत की जाती है। प्रदेश कांग्रेस में जो नियुक्तियां की गई हैं, उनमें किसी पद्धति को नहीं अपनाया गया, वे यही बात स्पष्ट करना चाहते हैं। इस मामले को राई का पहाड़ बनाया जा रहा है, जबकि वह प्रदेश के छठी बार सीएम बने हैं। यही नहीं  चार बार पीसीसी अध्यक्ष भी रहे हैं। सिंह ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़ी संख्या में सचिव बनाए गए हैं। उन्हें यह मालूम नहीं कि ये कौन बनाए गए, बाद में ही मालूम हुआ। उनके विधानसभा क्षेत्र से भी तीन लोग उनके ध्यान में लाए बगैर सचिव बनाए गए। उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि ये बुरे लोग हैं, वे अच्छे लोग हैं पर जब भी कोई सचिव बनाया जाता है, तो जो भी सचिव बनता है, उसके संबंध में जिला कांग्रेस कमेटी और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी से भी पूछा जाना चाहिए।

damgeघर में घिरे सीएम ने दोनों सचिवों को पुचकारा

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के बीच चल रही आर-पार की लड़ाई रोचक होती जा रही है। दोनों दिग्गज नेताओं में तलवारें खिंची हुई है। सीएम की सिरमौर दौरे पर प्रदेश कांग्रेस के सचिवों पर टिपण्णी के बाद उनके निर्वाचन क्षेत्र शिमला ग्रामीण में ही विस्फोट हो गया था। प्रदेश सचिव प्रदीप वर्मा और कुसुम वर्मा ने शनिवार को पद से इस्तीफ़ा क्या दिया, निशाना सीधा हॉली लौज पर लगा। सीएम ने घर में ही घिरने के बाद तत्काल स्थिति नियंत्रित करने के लिए पासा फेंक दिया। मंडी जिले के दौरे पर रवाना होने से पहले सीएम वीरभद्र सिंह ने प्रदीप और कुसुम को घर बुलाया और इस्तीफ़ा देने का कारण जाना। इस दौरान युवा कांग्रेस अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह भी उपस्थित रहे। सीएम इस्तीफ़ा दे चुके जिन दोनों सचिवों को दो दिन पहले तक जानते नहीं थे, रविवार को वे उनके अपने हो गए। सीएम ने प्रदीप व कुसुम को कहा कि आप तो मेरे अपने आदमी हैं। उन्हें उचित मान-सम्मान मिलेगा। मैंने किसी से इस्तीफ़ा थोड़े मांगा था। इस पर उन्होंने कहा कि उनकी भी गरिमा है। वे पार्टी के निष्ठावान सिपाही हैं। उन्हें आपकी टिप्पणी से ठेस पहुंची थी, इसलिए पद छोड़ना ही उचित समझा। उन्होंने किसी के भी अर्थात कांग्रेस अध्यक्ष के कहने पर इस्तीफ़ा नहीं दिया है। ये उनका निजी निर्णय है। इस दौरान विक्रमादित्य ने उनके इस्तीफ़ा देने पर निराशा जताई और कहा कि ये सही नहीं है। चूंकि वे सीएम के विधानसभा क्षेत्र से संबंध रखते हैं।

इस्तीफे के बाद डैमेज कंट्रोल में जुटे सीएम

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव प्रदीप वर्मा और कुसुम वर्मा के इस्तीफे के बाद सीएम वीरभद्र सिंह सतर्क हो गए हैं। उन्होंने इस्तीफे के बाद उत्पन्न हालात को देखते हुए डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। सीएम ने दोनों ही सचिवों को वार्ता के लिए बुलाया है। वे उन्हें इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए राजी करने की कोशिश करेंगे। सीएम ने ये कदम इसलिए भी उठाया है,

resignचूंकि दोनों सचिव उनके विधानसभा क्षेत्र शिमला ग्रामीण से हैं और उन्होंने वीरभद्र सिंह के लिए बीते विधानसभा चुनाव में जोरशोर से काम किया था। कुसुम और प्रदीप इसलिए सीएम से नाराज हैं कि उन्होंने सिरमौर दौरे के दौरान दो दिन पहले ये कह दिया था कि उनके विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने जो सचिव बनाए हैं, वे उन्हें जानते तक नहीं। इससे खफा होकर ही शनिवार को दोनों ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। इसकी सूचना उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू और पार्टी हाईकमान को दे दी थी। इससे सियासी गलियारों में खलबली मच गई। सीएम के करीबियों ने उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद वे हरकत में आए और वार्ता का मंच तैयार हुआ। अब देखना ये है कि सीएम उन्हें इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए राजी कर पाते हैं या नहीं। चूंकि प्रदीप वर्मा को भी काफी सिद्धांतवादी माना जाता है। इसलिए जल्द उनके मानने के आसार कम हैं। प्रदीप भी राजनीतिक पृष्ठभूमि से हैं और उनके परिजन जयबिहारी लाल खाची के विरुद्ध बतौर निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके हैं। उन्होंने लगभग 15 हजार मत हासिल किए थे। बता दें कि इस्तीफ़ा देने के बाद प्रदीप वर्मा ने कहा था कि वे 25 साल से पार्टी की सेवा कर रहे हैं। एनएसयूआई से लेकर कांग्रेस में विभिन्न पदों पर कार्य किया है। इसी तरह कुसुम वर्मा ने भी सीएम पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि वे भी 25 से 28 साल से कांग्रेस में कर्मठ कार्यकर्ता हैं। हर संगठन में कार्य किया है। उन्होंने बीते विधानसभा चुनाव में सीएम के विधानसभा क्षेत्र में भी दिन-रात काम किया। इसके बावजूद सीएम कह रहे हैं कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र के पीसीसी सचिवों को जानते ही नहीं हैं। इसलिए पद से इस्तीफ़ा देना ही उचित है।

सीएम से खफा दो पीसीसी सचिव का इस्तीफा

लेखराज धरटा /शिमला।  प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिवों ने सीएम वीरभद्र सिंह के निरंतर हमलों पर पलटवार शुरू कर दिया है। सिरमौर जिले के नौहराधार व बोगधार में पीसीसी के सचिव पर की गई टिप्पणी के बाद दो सचिव प्रदीप वर्मा और कुसुम वर्मा ने इस्तीफ़ा दे दिया है। वे वीरभद्र सिंह की बयानबाजी से खफा हैं। प्रदीप वर्मा ने कहा कि वे 25 सालों से पार्टी की सेवा कर रहे हैं। एनएसयूआई से लेकर कांग्रेस तक में विभिन्न पदों पर कार्य किया है। इसी तरह कुसुम वर्मा भी सीएम पर हमलावर हैं। उन्होंने कहा कि वे भी 25 से 28 सालों से कांग्रेस में कर्मठ कार्यकर्ता हैं। हर संगठन में कार्य किया है। उन्होंने बीते विधानसभा चुनाव में सीएम के विधानसभा क्षेत्र में भी दिन-रात काम किया था। इसके बावजूद वे कह रहे हैं कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र के पीसीसी सचिवों को जानते ही नहीं हैं, ये दुर्भाग्यपूर्ण हैं। इसलिए ही उन्होंने पद से इस्तीफा दिया है।

shimla1उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू पार्टी के लिए बेहतरीन काम कर रहे हैं। उन्होंने संगठन की प्रदेश में खड़ा किया है। जब से वे प्रदेश सचिव बने, उन्होंने बिना कोई भत्ता लिए काम किया है। बता दें कि सीएम वीरभद्र सिंह ने सिरमौर दौरे के पहले दिन शुक्रवार को पीसीसी सचिव व सदस्य की नियुक्ति को लेकर अपनों पर ही निशाना साधा था। उन्होंने यहां तक कह डाला था कि भगवान बचाए इस कांग्रेस से। जनसभा के दौरान उन्होंने कहा था कि पीसीसी में ऐसे सचिवों व सदस्यों को नियुक्ति दी गई है, जोकि पंचायत सदस्य, पंचायत समिति व जिला परिषद तक का चुनाव नहीं जीत सकते हैं। इससे पहले भी सीएम इस मामले में बयानबाजी करते रहे हैं।

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