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सचिवों की रारः बेटा एमएलए, बाप वाईस चेयरमैन क्यों

सचिवों की रारः बेटा एमएलए, बाप वाईस चेयरमैन क्यों

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देहरा। सरकार व कांग्रेस संगठन में चल रही तकरार के बीच अब राजनीतिक दृष्टि से सबसे अहम जिला कांगड़ा से भी चिंगारियां उठनी शुरू हो गई हैं। दो सचिवों के इस्तीफे व पांच सचिवों द्वारा पत्र बम के बाद अब कांग्रेस के संगठनात्मक जिला देहरा के अध्यक्ष नरदेव कंवर ने सीधे-सीधे सीएम वीरभद्र सिंह से पूछा है कि वह बताएं कि निगम-बोर्ड में अकेले शिमला जिला से कितनों को चेयरमैन व वाईस चेयरमैन बनाया गया है, जबकि पूरे प्रदेश में इसके अनुपात में कितने बनाए गए हैं। नरदेव ने कहा कि सीएम कौन से मापदंडों की बात करते हैं, ज्वालामुखी में ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी की बेटा एमएलए और बाप को वाईस चेयरमैन बनाया गया। ऐसे ही शाहपुर में कौन से मापदंड हैं कि दो-दो को चेयरमैन या वाईस बनाना पड़ा।

congress_कांगड़ा से भी उठने लगी चिंगारी, नरदेव कंवर आए आगे
नरदेव कंवर का गुस्सा यहीं तक नहीं रुका, उन्होंने सीएम वीरभद्र सिंह से प्रश्न किया है कि जसवां प्रागपुर में क्या उन्हें कोई ऐसा पार्टी से संबंधित व्यक्ति नजर नहीं आया कि एक कर्मचारी जिसे रिटायर होने में चार साल बचे थे उसे वाईस चेयरमैन बनाकर जनता पर थोप दिया गया। कंवर का कहना है कि एक तरफ तो सीएम हमेशा यह कहते हैं कि यहां-यहां कांग्रेस के एमएलए हैं, वहां का ब्लॉक अध्यक्ष उसकी मर्जी के बिना ना बनाया जाए, दूसरी तरफ खुद ही उन मापदंडों पर खरे नहीं उतरते। उन्होंने सीएम से प्रश्न किया है कि फिर जयसिंहपुर में कांग्रेस का एमएलए होते हुए क्या जरूरत पड़ गई कि उसी विस क्षेत्र से एक चेयरमैन बनाना पड़ा। उन्होंने सीएम से पूछा है कि यहां उनके मापदंड कहां गुम हो जाते हैं। नरदेव कंवर का कहना है कि सीएम स्वयं इस बात को कहते हैं कि कांगड़ा जैसे बड़े जिला यहां से सरकार का गठन हुआ है वहां किसी भी पार्टी एमएलए को डिस्टर्ब नहीं करना है, फिर क्यों जयसिंहपुर में उन्होंने स्वयं इस बात का इंतजाम कर दिया।

cmऐसे में इस्तीफा देने को होंगे मजबूर
उन्होंने कहा कि सीएम जिस तरह से प्रदेश कांग्रेस में सचिवों व जिलों पर अंगुली उठाते जा रहे हैं तो ऐसी स्थिति में हमें भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उनका कहना है कि बीते डेढ़ साल में वह अपने जिला में केंद्र सरकार के खिलाफ पांच बड़े आंदोलन कर चुके हैं, बावजूद उसके और तो क्या हमें बदले में मान-सम्मान भी नहीं मिलेगा। उनका कहना है कि इस अवधि में वह अपनी जेब से चार लाख रुपए खर्च कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि हर माह ब्लॉक कांग्रेस की बैठकें आयोजित करना उस पर होने वाला खर्च भी हमें अपनी जेब से करना होता है। इसी तरह जिला में होने वाली कन्वेशन का भी खर्च उठाना पड़ता है।

“यही नहीं, मोदी के बोल जुमलों के ढोल जैसे बड़े कार्यक्रम हमने आयेजित करवाए,क्या इसका परिणाम यही है कि हमें सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत किया जाए। उन्होंने सीएम को स्पष्ट कहा है कि अगर उनके रवैये में कोई फर्क नहीं आया तो वह भी अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।”

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