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बदजुबानी पर सवाल : सत्ती का विरोध तो अपने नेताओं से काट गए कन्नी

बदजुबानी पर सवाल : सत्ती का विरोध तो अपने नेताओं से काट गए कन्नी

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ऊना। इस बार लोकसभा चुनावों में नेताओं की भाषा भी एक मुद्दा बनती दिखाई दे रही है। बीजेपी और कांग्रेस में नेता भाषा की मर्यादा की सीमाएं लांघते नजर आ रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग (Election commission) ने समय-समय पर इन नेताओं पर चुनाव प्रचार के लिए प्रतिबंध (Restriction) लगाकर अंकुश लगाने की कोशिश भी की है लेकिन नेताओं की भाषा शैली को देखते हुए ये प्रयास नाकाफी लग रहे हैं। नेतागण एक-दूसरे पर कटाक्ष करने का कोई मौका तो नहीं छोड़ते, लेकिन जब चुनावी रणभूमि उतरे नेताओं से उनकी अपनी ही पार्टी के नेताओं की बदजुबानी पर सवाल पूछ लें, तो ये नेता कन्नी काटते नज़र आते हैं।

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कुछ ऐसी ही बानगी दिखाई दी जिला ऊना में, जहां हिमाचल बीजेपी अध्यक्ष सतपाल सत्ती (Satpal Satti) की भाषा को लेकर विरोध कर रही कांग्रेस अपने नेताओं की बदजुबानी के सवालों पर कन्नी काट रही है और चुप्पी साधे हुए हैं। दरअसल, सतपाल सत्ती की भाषा को लेकर उन पर स्थायी प्रचार के लिए रोक लगाए जाने की मांग करने वाली कांग्रेस अपने नेताओं की बेलगाम भाषा को लेकर मुंह बंद किए हुए है। इसी मुद्दे पर जब कांग्रेस के उम्मीदवार राम लाल ठाकुर (Congress candidate Ram Lal Thakur) से कांग्रेस नेता नवजोत सिद्धू की पीएम नरेंद्र मोदी पर की गई हालिया अमर्यादित टिप्पणी को लेकर सवाल किया तो वे कन्नी काटते नज़र आये और सिद्धू की टिप्पणी नहीं सुने जाने का दावा किया।

इतना ही नहीं कांग्रेस उम्मीदवार ने पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह (Former CM Virbhadra Singh) के प्रदेश कांग्रेस नेताओं के विरुद्ध दिए गए बयानों से भी किनारा किया और इन बयानों को उनका निजी मत बताया। प्रचार अभियान के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे इस विषय पर किसी भी विवाद में नहीं पड़ना चाहते।रामलाल ने नशे के मुद्दे को गैर राजनीतिक बताया और नशे पर लगाम लगाने में प्रदेश बीजेपी सरकार को विफल बताया। नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री (Mukesh Agnihotri) ने भी नशे को गैर राजनीतिक मुद्दा करार दिया। मुकेश ने कहा कि बीजेपी सरकार बने डेढ़ वर्ष हो गया है लेकिन अभी तक ना तो नशे पर लगाम लग पाई है और न ही इस संबंध में कोई कानून लागू हो पाया है। उन्होंने कहा की बीजेपी अध्यक्ष के गृह विधानसभा क्षेत्र में ही कई युवा नशे की ओवरडोज से मौत का शिकार हुए हैं, लेकिन वे दूसरों पर आक्षेप लगा रहे हैं।

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