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कृषि बिल के खिलाफ यहां हुए प्रदर्शन, हाथरस मामले में निकाली रोष रैली-ABVP भी हुई तल्ख

एबीवीपी की सोलन नौणी विश्वविद्यालय के वीसी को पद से हटाने की मांग

कृषि बिल के खिलाफ यहां हुए प्रदर्शन, हाथरस मामले में निकाली रोष रैली-ABVP भी हुई तल्ख

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चंबा/ बिलासपुर। हिमाचल (Himachal) में आज भी कृषि बिल (Agriculture Bill)  और हाथरस मामले को लेकर प्रदर्शन जारी रहे। चंबा (Chamba) के चुराह में कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्रिहोत्री का अगुवाई में किसान आक्रोश रैली का आयोजन किया। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री (Leader of Opposition Mukesh Agnihotri) ने आक्रोश रैली को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में कर्ज बढ़कर 55000 करोड़ पहुंच गया है। पूंजीपतियों को लाभ देने के लिए सरकार ने कृषि कानूनों को लाया है। बिना सहमति के ही सरकार ने इस बिल को लागू कर दिया। बिलों से किसानों की जमीनें और घर बिक जाएंगे। डलहौजी की विधायक आशा कुमारी ने कहा कि जयराम सरकार घोषणाओं तक सीमित होकर रह गई है। चंबा में चार विधायकों की जीत के बाद एक भी मंत्री पद नहीं दिया गया है।


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बिलासपुर में जिला कांग्रेस (Congress) द्वारा कृषि विधेयकों के खिलाफ रोष मार्च निकाला, जिसमें कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष कुलदीप राठौर सहित जिले के पूर्व विधायक व पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। कुलदीप राठौर के बिलासपुर पहुंचने पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया, जिसके बाद पहले रोड शो और फिर कुलदीप राठौर ट्रैक्टर पर बैठकर किसानों की पैरवी करते दिखाई दिए। रोड शो के बाद कंदरौर में किसान सम्मेलन कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर ने कृषि विधेयकों को काला कानून बताते हुए किसानों के इंटरेस्ट को बड़े पूंजीपतियों के हाथों में बेचने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा काला कानून वापस ना लेने तक कांग्रेस पार्टी का आंदोलन जारी रहने का दावा भी किया है।

यूपी प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से जांच करवाने की मांग

जिला बिलासपुर (Bilaspur) के घुमारवीं में युवाओं के द्वारा बेटियों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में रैली निकालकर रोष व्यक्त किया है। यह रैली युवा अशुंल व विपिन डोगरा के नेतृत्व में निकाली गई जो गांधी चौक से शुरू करके एसडीएम कार्यालय व बस स्टैंड होकर गांधी चौक पर समापन किया गया है। मांग की गई कि उत्तर प्रदेश के हाथरस प्रकरण एवं आधी रात को यूपी पुलिस (UP Police) द्वारा पीड़ित युवती का शव जलाने की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से जांच करवाई जाए, जो भी आरोपी पाया जाता है, उसे सख्त से सख्त सजा दी जाए।

नौणी विश्वविद्यालय के वीसी पद से हटाने की मांग

 

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सोलन। नौणी विश्वविद्यालय में अनियमितताओं को लेकर एबीवीपी (ABVP) द्वारा सोलन में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इसमें एबीवीपी ने कुलपति डॉ. परविंदर कौशल पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। एबीवीपी इस मामले को लेकर राज्यपाल और सीएम जयराम ठाकुर से कुलपति को पद से हटाने की भी मांग की है। एबीवीपी के जिला संयोजक पवन शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कुलपति डॉ. परविंदर कौशल जिन पर पिछले कई समय से भ्रष्टाचार के आरोप लगते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक इन पर किसी भी प्रकार की जांच अथवा कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। उनकी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है और तमाम यूनिवर्सिटी से संबंधित सभी रिकॉर्ड एक ही बार जब्त करने और उच्च स्तरीय जांच करवाने की आवश्यकता है।

 

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मंडी। वर्ष 2020 के दूसरे चरण का सदस्यता अभियान मंडी (Mandi) जिला में 12 से 18 अक्तूबर तक चलाया जाएगा। इसमें ऑनलाइन (Online) मोड पर एबीवीपी के सदस्यों को जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बनाई गई रणनीति के हिसाब से आने वाले समय में छात्रों की मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन भी छेड़ा जाएगा। मंडी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए एबीवीपी मंडी इकाई के विभाग संयोजन सचिन चौधरी ने बताया कि पिछले लगभग 11 वर्षों से राजनीती की भेंट चढ़ा केंद्रीय विश्वविद्यालय अभी तक शुरू नहीं हो पाया है और ना ही अभी तक क्लस्टर, हिमाचल प्रदेश व तकनिकी विश्व विद्यालय में शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारियों की नियुक्ति भी नहीं हो पाई है।

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एबीवीपी ने मांग उठाई है कि केंद्रीय विश्व विद्यालय का निर्माण जल्द हो, विश्व विद्यालयों में शिक्षकों व गैर शिक्षकों की भर्ती की जाए, नौणी के कुलपति को बर्खास्त किया जाए, निजी विश्व विद्यालयों में छात्रों का शोषण बंद किया जाए, प्रदेश के मेडिकल महाविद्यालयों के ढांचे को सुधारा जाए, छात्र संघ चुनावों की बहाली, एससी एसटी स्कॉलरशिप जारी की जाए व जेबीटी (JBT) कमीशन में जेबीटी छात्रों को प्राथमिकता दी जाए। इन सभी मांगों को लेकर एबीवीपी मंडी इकाई 7 से 16 अक्टूबर तक विभिन्न विरोध कार्यक्रम करेगी। इसके बाद भी अगर सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो एबीवीपी अपने आंदोलन को और उग्र करेगी।

 

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