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Pawan Thakur ने सरकाघाट मे भरी हुंकार : कांग्रेसियों में जगी सूखे से उबरने की उम्मीद

Pawan Thakur ने सरकाघाट मे भरी हुंकार : कांग्रेसियों में जगी सूखे से उबरने की उम्मीद

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सरकाघाट। पवन ठाकुर को टिकट मिलने की घोषणा के बाद से ही जहां कर्नल इंद्र सिंह खेमे में गर्माहट कम हुई, वहीं कांग्रेसी कार्यकर्ता जो दस वर्षों से सूखे की मार से त्रस्त थे उनके हलक में भी मानो शीतल जलधारा प्रवेश हुई। अब उन्हें पूरी उम्मीद जगी है की वर्षों का सूखा समाप्त होगा, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रंगीलाराम राव के साथ गत 25 वर्षों से पवन ठाकुर ने राजनीति में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई, लेकिन गत चुनावों से ही पवन के साथ राव के संबंधों में कुछ स्वार्थी लोगों के द्वारा खट्टास पैदा कर दी गई थी। उसके बावजूद पवन ने संगठन में जिलाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू की नजदीकियों और कार्य क्षमता व कर्मठता के चलते इस बार पवन को टिकट झटकने में कामयाबी हासिल हुई।

भाजपा खेमे में नजर आई बेचैनी

अब भाजपा खेमे में भी इसी को लेकर खासी बेचैनी दिखाई दे रही है। चूंकि पवन ठाकुर ने विधानसभा क्षेत्र में अपना संपर्क कभी तोड़ा ही नहीं और लोगों के बीच में लगातार आते जाते रहा। इस युवा की एक खासियत लोगों से पता चलती है कि राव जब काबिना मंत्री थे उस समय हलके में पार्टी की पूरी जिम्मेदारी संभाली लेकिन किसी कार्यकर्ता के साथ कभी बदस्लूकी भी नहीं की। इसी मिलनसार स्वभाव के कारण आज पार्टी ने अपना आधिकृत प्रत्याशी भी बना दिया और कार्यकर्ताओं की पहली पसंद भी पवन ठाकुर बने हुए हैं, लेकिन राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी रंगीलाराम से अभी इस पवन ठाकुर को पार पाना है। इतनी भी आसान यह राह नहीं है पवन के लिए लेकिन पूर्व में दोनों ही इकट्ठे रहे हैं तो एक दूसरे के भेद तो जानते ही हैं। रंगीलाराम ने अपने पुराने कार्यकर्ताओं की एक बैठक भी बुला ली है, जिसमें आगामी रणनीति तय की जाएगी। लेकिन इस समय न तो राव का अपना बेटा ही राजनीति में रुचि रखता है और न ही कोई अन्य चुनाव के लिए तैयार किया था। ऐसे में उम्र के इस पड़ाव में कार्यकर्ता राव की सुनेंगे जरूर लेकिन करेंगे अपने मन की।


वीरभद्र सिंह ने ही राव को टिकट दिलवाने के लिए केंद्रीय पार्टी हाई कमान के पास बचाव किया लेकिन टिकट दिलवा नहीं पाए। हालांकि वीरभद्र सिंह पहले भी सरकाघाट हलके के कई कार्यक्रम रद करके संकेत दे चुके थे कि आपके दिन अब लद चुके हैं। अब निर्दलीय चुनाव में किसी भी पोजीशन में राव फिट नहीं बैठ रहे हैं कि वह बतौर निर्दलीय सीट जीत लेंगे क्योंकि दो बार पहले ही कर्नल से करारी शिक्सत खा चुके हैं अब गलती की तो रही सही कसर भी जनता पूरी कर देगी। परिस्थितियां चाहे कोई भी रही हों, लेकिन बतौर कांग्रेस प्रत्याशी ही पिट चुके हैं तो बतौर निर्दलीय तो जमानत जब्त होना भी तय माना जा रहा है।

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