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61 NH, कसंलटेंट नियुक्त नहीं, DPR लटकी

61 NH, कसंलटेंट नियुक्त नहीं, DPR लटकी

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लोकिन्दर बेक्टा, शिमला। हिमाचल प्रदेश को मिले 61 नए नेशनल हाइवे (एनएच) की डीपीआर तैयार करने का मामला अब अगले वर्ष के लिए चला गया है। अभी तक डीपीआर तैयार करने के लिए कसंलटेंट नियुक्त नहीं हुए हैं।nh1 समझा जाता है कि इस माह के अंत तक कंसलटेंट की तैनाती कर दी जाएगी। यानी अगले वर्ष में नए एनएच की डीपीआर तैयार कर ली जाएगी। गौर हो कि केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी ने दो चरणों में राज्य को 61 नए नेशनल हाइवे की सौगात दी थी। राज्य में करीब 13 हजार करोड़ रुपए की लागत से 3759 किलोमीटर नेशनल हाइवे तैयार किए जाने हैं। इस समय राज्य में करीब 2400 किमी लंबे 18 एनएच हैं। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ने पिछले माह कसलंटेंट की नियुक्ति के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे।

  • अगले साल में गया मामला
  • पिछले माह कसलंटेंट की नियुक्ति को मांगे थे टेंडर
  • 20 से अधिक सड़कों की डीपीआर तैयार करने के लिए कंसलटेंट के टेंडर खोले
  • नए साल में डीपीआर तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी

इसमें पीडब्ल्यूडी विभाग ने 20 से अधिक सड़कों की डीपीआर तैयार करने के लिए कंसलटेंट के टेंडर खोल दिए हैं, जबकि बाकी के टेंडर अभी खोले जाने बाकी हैं। जो टेंडर खुल गए हैं, उनकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक पहुंच गई है। ऐसे में नए साल में डीपीआर तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। जिन जिलों को राष्ट्रीय उच्च मार्गों की सौगात मिली है, वहां पर सर्किल स्तर पर टेंडर आमंत्रित किए गए थे। स्टेट हाइवे को नेशनल हाइवे में अपग्रेड करने के बाद राज्य के कई जिलों के लाखों लोगों को इसकी सुविधा मिलेगी। वहीं राज्य सरकार को भी एनएच की मरम्मत पर अपना पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। nhनेशनल हाइवे बनने के बाद केंद्र सरकार ही इनके रखरखाव पर पूरा पैसा खर्च करेगी। स्टेट हाइवे के एनएच बनने के बाद इन सड़कों की चौढ़ाई भी बढ़ जाएगी। नियमों के मुताबिक राज्य उच्च मार्गों की चौड़ाई 5 वाई 7 मीटर होती है। यानी सीधे में सड़क की चौड़ाई 5 मीटर और मोड़ पर यही चौड़ाई 7 मीटर निर्धारित है। अब एनएच बनने के बाद सड़क की चौड़ाई 10 से 12 मीटर की होगी। उधर, एचएच बनने से लोगों को जहां आरामदायक सफर की सुविधा मिलेगी, वहीं इससे राज्य में सैलानियों को भी भारी मदद मिलेगी। इन सड़कों के चौड़ा और पक्का होने से पर्यटन को पंख लगेंगे और दूरदराज के अनछुए इलाकों तक सैलानियों की पहुंच होगी और इससे राज्य की आर्थिकी भी मजबूत होगी। इसके साथ-साथ प्रदेश के किसानों द्वारा तैयार की गई फसल को मंडियों को पहुंचाने में भी आसानी होगी। प्रदेश से सेब की फसल को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। ऐसे में खुली और चकाचक सड़कें बनने से लोगों का समय भी बचेगा और वाहनों में डीजल व पेट्रोल की खपत भी कम होगी। यही नहीं, खस्ताहाल सड़कों के कारण वाहनों की मरम्ममत पर होने वाला खर्च भी घटेगा।

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