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 …..जब नियमों पर हुई सदन में तकरार

 …..जब नियमों पर हुई सदन में तकरार

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दोनों दलों के सदस्यों ने खुद को सही साबित करने का किया प्रयास

Controversy : लोकिन्दर बेक्टा, शिमला। विधानसभा में आज नियमों की दुहाई देकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच तकरार हुई। दोनों दलों के सदस्यों ने खुद को सही साबित करने का प्रयास किया। कटौती प्रस्तावों पर चर्चा को लेकर दोनों पक्षों में हुई तकरार के बाद दोनों ओर से खुद को सही साबित करने के प्रयास हुए।  दरअसल, प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष बृजबिहारी लाल बुटेल ने कटौती प्रस्तावों पर सत्तापक्ष के सदस्यों के भाग लेने को लेकर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष का यह कहना कि केवल विपक्षी सदस्य ही विभिन्न विभागों से संबंधित मांगों पर चर्चा कर सकते हैं, यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के ही सदस्य किसी विभाग से संबंधित मांग पर चर्चा में भाग ले सकते हैं, जबकि कटौती प्रस्तावों पर केवल विपक्ष बोल सकता है।


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विस अध्यक्ष की इस व्यवस्था पर विपक्ष के नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने कहा कि संसद से लेकर विधानसभा तक में यही परंपरा है कि जो सदस्य कटौती प्रस्ताव देता है। वहीं चर्चा में भाग लेता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल विधानसभा की भी यही परंपरा रही है और यहां भी उन्हीं सदस्यों को कटौती प्रस्तावों पर बोलने की अनुमति होनी चाहिए, जिनके प्रस्ताव आए हों। इस पर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल सीएम थे तो निर्दलीय सदस्य राकेश पठानिया जो बीजेपी के सहयोगी सदस्य थे, उन्होंने भी एक कटौती प्रस्ताव में हिस्सा लिया था।

धूमल ने कहा कि राकेश पठानिया निर्दलीय सदस्य थे और इस नाते वह कटौती प्रस्ताव देने को स्वतंत्र थे। उन्होंने सत्तापक्ष को यह भी चुनौती दी कि वह साबित करें कि राकेश पठानिया बीजेपी के सहयोगी सदस्य थे। उनका समर्थन नीतियों पर आधारित था और सरकार के खिलाफ भी बोलते थे। इस मुद्दे पर बीजेपी सदस्य सुरेश भारद्वाज ने कहा कि यदि परंपराओं से हटकर सत्तापक्ष के सदस्य कटौती प्रस्ताव देना चाहते हैं तो वह इसके लिए स्वतंत्र हैं। इसी मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि विभिन्न विभागों से संबंधित मांगों पर बोलने का सत्तापक्ष के सदस्यों को भी अधिकार होना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्ष के वॉकआउट को भी गलत करार दिया। इसी संबंध में गोबिंद सिंह ठाकुर और आशा कुमारी ने भी अपना-अपना पक्ष रखा। अंततः विधानसभा अध्यक्ष बुटेल ने कहा कि अब इस मुद्दे को ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं है और इसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।

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