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Corona warrior को सलामः डेढ़ साल की बेटी को छोड़ मरीजों के इलाज में जुटी मीना शर्मा

Corona warrior को सलामः डेढ़ साल की बेटी को छोड़ मरीजों के इलाज में जुटी मीना शर्मा

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मंडी। कोरोना (Corona) के खिलाफ लड़ाई में हमारे योद्धा (Warrior) सबसे आगे रहे हैं। हमारे देश व प्रदेश में कोरोना संक्रमितों के इलाज में जुटे ये योद्दा घर परिवार को भूल कर अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रहे हैं। आज बात करते हैं एक ऐसी मां की जो अपनी डेढ़ साल की बेटी को परिजनों के हवाले छोड़ कोविड -19 के मरीजों के इलाज में जुटी हैं। इस कोरोना योद्धा का नाम है मीना शर्मा और यह योद्धा मेडिकल कॉलेज नेरचौक 9 Medical College in Nerchowk) में अपनी सेवाएं दे रही है। 2017 से नर्सिंग की फील्ड में अपनी सेवाएं दे रहीं मीना शर्मा बल्ह विधानसभा क्षेत्र के रथोहा गांव से संबध रखती हैं और स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत हैं। मीना बताती हैं कि वे 29 जुलाई 2020 से मेडिकल कॉलेज नेरचौक में कोरोना वार्ड में सेवाएं दे रहीं है तथा एक सप्ताह तक वहीं पर सेवाएं देंगी। उसके पश्चात 14 दिन क्वारंटाइन ( Quarantine) रहेंगी। उन्होंने कहा कि वे आजतक एक दिन के लिए भी बेटी से अलग नहीं रही हैं पर अब 21 दिन तक अलग रहना पड़ रहा है यह मां और बेटी दोनों के लिए परीक्षा की घड़ी है। मीना बताती हैं कि उनके पति उनका पूरा सहयोग करते हैं तथा अपनी नौकरी की व्यस्तता के बावजूद अपनी पत्नी की सेवाओं को ज्यादा महत्व देते हैं। उनका कहना है कि अगर जन सेवा करने का जुनून हो तो बड़ी से बड़ी बीमारी से भी डर नहीं लगता क्योंकि हमारा काम ग्रसित हुए लोगों को ठीक करना है ना कि बीमारी से डरना। फिर भी पूरी सावधानियां बरती जा रही हैं।

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जरूरतमंदो की मदद के लिए सदैव तत्पर

फिलहाल तो मीना शर्मा मेडिकल कॉलेज नेरचौक में अपनी सेवाएं देर रही हैं लेकिन ड्यूटी के बाद भी लोगों की सेवा में तत्पर रहती हैं तथा आसपास के गांव में भी जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। मीना बताती हैं कि वे अपनी बेटी को वायु सेना में भेजना चाहती हैं। उन्हें परिवार के साथ घूमना, खाना पकाना व डायरी लिखने का बहुत शौक है।

मां और बेटी दोनों कोरोना योद्धा

मीना का कहना है कि उनके परिजन हमेशा से इनके सभी कार्यों में सहयोग करते हैं तथा लोगों की सेवा के लिए हमेशा प्रेरित करते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान विभिन्न राज्यों में कई ऐसे वाकिये पेश आए हैं जिनमें कोरोना योद्धाओं के साथ परिजनों द्वारा प्रताडि़त किया गया है लेकिन मीना के परिजन उन सभी से अलग हैं उन्होंने मीना का इस पुनीत कार्य के लिए हौंसला बढ़ाया है। मीना के ससुर शिक्षा विभाग से प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत हैं और बहू के इस पुनीत कार्य के लिए हमेशा गर्वान्वित महसूस करते हैं और बताते हैं कि इस समय देश सेवा के काम आ रही है, साथ ही अपनी डेढ़ साल की पोती की चिंता भी है कि वो इतना समय अपनी मां के बिना कैसे रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पोती भी उनकी बहू की तरह योद्धा है। छोटी बेटी का रख रखाव उनकी दादी ही कर रही हैं तथा उनका कहना है कि जो दायित्व उनकी बहू को मिला है वह किस्मत वालों को मिलता है।

जनसेवा को ही बनाया लक्ष्य

मीना शर्मा बताती हैं कि उनका लक्ष्य नर्सिंग क्षेत्र में ही जन सेवा करने का है क्योंकि इस क्षेत्र में जरूरतमंदों की सेवा करने की अपार संभावनाएं हैं। नर्सिग की प्रारम्भिक पढ़ाई पालमपुर से पूरी की है तथा नर्सिंग में स्नातक की डिग्री इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला से पूरी की है। 2017 में नौकरी ज्वाइन की तथा दो वर्ष तक सेवाएं दी तथा पिछले डेढ़ वर्ष से मेडिकल कॉलेज नेरचौक में सेवाएं दे रही हैं। मीना शर्मा के पति विजय शर्मा डाक विभाग में कार्यरत हैं। यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि डाक विभाग का भी कोरोना के समय सराहनीय योगदान रहा है। जहां पर अन्य सरकारी विभाग कई महीनों तक बंद रहे वहीं पर डाक विभाग का कार्य एक दिन भी नहीं रूका है।

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