Expand

गुलाम बनकर जीना है या राज करना है…खुद करो फैसला

गुलाम बनकर जीना है या राज करना है…खुद करो फैसला

- Advertisement -

गफूर खान/ धर्मशाला। भारतीय क्षत्रिय घृत बाहती चांहग महासभा के प्रदेशाध्यक्ष श्रीकंठ चौधरी का कहना है कि महासभा ओबीसी वर्ग के लिए 18 विधानसभा क्षेत्रों से टिकट की मांग रखी है। इसके अलावा अन्य प्रमुख मांगें भी सरकार के सुपुर्द की हैं और 31 दिसंबर तक इन मांगों को पूरा करने की डेडलाइन भी दी है। यदि 31 दिसंबर तक सरकार हमारा 18 सीटों पर प्रतिनिधित्व निर्धारित नहीं करती है तो उसके बाद हम इसे 25 कर लेंगे और इसे अपने स्तर पर पूरा करने के लिए प्रयास भी करेंगे। श्रीकंठ चौधरी का कहना है कि 31 दिसंबर के बाद महासभा सरकार के रुख के अनुसार अपना अगला फैसला लेगी। यदि सरकार मांगें मान लेती है तो हम सरकार के साथ चलेंगे नहीं तो अगली रणनीति पर विचार किया जाएगा। अगली रणनीति में महासभा अपनी नई पार्टी भी बना सकती है और निर्दलीय रूप से चुनाव भी लड़ सकती है, यदि दोनों बातों पर आम सहमति नहीं बनती है तो हम बिरादरी के उम्मीदवारों को जिताने पर पूरा जोर लगाएंगे ताकि विधानसभा में हमारी आवाज उठाने वालों की संख्या बढ़ सके।

gafoor2चौधरी ने कहा कि हमें कांग्रेस अथवा बीजेपी किसी से कोई लेना-देना नहीं है, बिरादरी अपने दम पर सरकार बनाने और गिराने का मादा रखती है तो फिर हम किसी के आगे क्यों झुकें। जो भी पार्टी हमारे हक के लिए आवाज उठाएगी हम उसको ही पूरा समर्थन देंगे और अगर दोनों ही पार्टियों का रवैया नकारात्मक रहता है तो हम अपने दम पर ही अपने हक लेकर रहेंगे। उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग अगर एकजुट हो जाए तो कोई ताकत नहीं है जो कि उनकी मांगों को पूरा होने से रोक पाए। अब यह फैसला बिरादरी को करना है कि उन्हें गुलाम बनकर जीना है या राज करना है। उन्होंने कहा कि अब बहुत हो गया गुलामी सहन करते हुएए अब तो वक्त वह आ गया है कि हमें अपने हक हासिल करने ही होंगे और वह चाहे किसी भी तरीके से क्यों न हासिल करने पड़ें। श्रीकंठ चौधरी की इस बात पर प्रदेश सरकार में सीपीएस नीरज भारती का कहना है कि अभी इसके लिए समय है और इस बारे में वह सीएम वीरभद्र सिंह से जरूर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि एससी वर्ग के लिए विधानसभा में सीटें आरक्षित हैं जबकि ओबीसी के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं है। यह प्रयास किया जाएगा कि ओबीसी बाहुल क्षेत्रों में इसी बिरादरी से संबंधित प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा जाए।

नीरज बरसेः बिरादरी को बांटने वाले हुए बेनकाब

गफूर खान। धर्मशाला। विधायक पवन काजल को थप्पड़ मारने के नाम पर बिरादरी को बांटने की कोशिश करने वाले जनता के सामने बेनकाब हो चुके हैं। अब जरूरत ऐसे लोगों की सच्चाई सबके सामने लाकर बिरादरी को एकजुट करने की है। यह शब्द वीरभद्र सरकार में सीपीएस नीरज भारती ने भारतीय क्षत्रिय घृत बाहती चाहंग महासभा के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान कहे। भारती ने कहा कि जो लोग ओबीसी के नाम पर राजनीति करते आ रहे हैं वह यह भी बताएं कि आखिर उन्होंने बिरादरी के लिए क्या किया। किसी को कॉन्ट्रैक्ट या चतुर्थ श्रेणी में नोकरी दिलाना बिरादरी का भला नहीं हो सकता। हमारे लोगों के दम पर जो राजनीति कर रहे हैं वह चुनाव नजदीक आते देख अपना रंग बदलते हैं। युवाओं को नोट के दम पर खरीदा जाता है लेकिन अब युवा भी यही सोच ले की हजार या दो हजार रुपये से उनका भला नही होना है भविष्य बनाना है तो खुद की ताकत को पहचानें।

neeraj-pawan2हमें बदनाम करने चले थे, खुद हो गए
इस अवसर पर विधायक पवन काजल ने कहा कि जो हमें बदनाम करने पर तुले थे अब खुद बदनाम होकर रह गए हैं। हम लोगों को गैरों की राजनीति में इस्तेमाल होने की बजाए अपनी ही नीति होनी चाहिए। जिस तरह कांगड़ा विस के लोगों ने बसपा और निर्दलीय विधायक को चुनकर दम दिखाया है बिरादरी को भी उसी तरह दम दिखाना होगा। महासभा के प्रदेशाध्यक्ष श्रीकंठ चौधरी ने कहा कि हमने सरकार से अपनी मांगे पूरी करने को कहा है। 31 दिसम्बर तक यदि हमारी मांगे पूरी नहीं होती तो हम अपनी मांगें मनवा लेंगे। उन्होंने कहा कि बिरादरी के दम पर कैबिनेट में बैठे नेता हमारा पक्ष कभी नहीं रख पाए है इसलिए सरकार से मांग है कि नीरज भारती को कैबिनेट मंत्री बनाया जाए। जब हम एकजुट हो गए तो कोई हमारा फायदा नहीं उठा पाएगा।

gafoorआखिर क्यों सजा यह मंच…

कही-अनकही/अनल पत्रवाल। विचार करने वाली बात है कि कांगड़ा-धर्मशाला के बीच बसे मंदल में भारतीय क्षत्रिय घृत बाहती चाहंग महासभा का मंच क्यों सजा। इस मंच के सजने के मायने एक नहीं अनेक हैं। बिरादरी का नारा दे दिया गया, मतलब एक थप्पड़ प्रकरण ने इतना असर कर दिया कि समुदाय विशेष को एकजुटता की तरफ बढ़ा दिया। बात यह नहीं है कि इस सम्मेलन में क्या-क्या हुआ क्या-क्या कहा गया, बात यह है कि इसके परिणाम क्या होंगे। क्या वास्तव में यह मंच बिरादरी को ठीक उस तरफ ले जा रहा है, यहां कभी इससे जुडे़ नेता अपनी बात मनवाया करते थे…।

neeraj-pawan3मंदल सम्मेलन से एक बात तो साफ निकलकर बाहर आ रही है कि बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले दो विधायकों को इकट्ठा कर दिया गया। ऐसा आखिर क्यों हुआ, बहुत पुरानी बात भी नहीं है। जन्माष्टमी वाले दिन शिमला से एक हल्की सी बात बाहर निकलकर आई कि ओबीसी से ताल्लुक रखने वाले कांगड़ा के विधायक पवन काजल को थप्पड़ रसीद किया गया है। अफवाह में थप्पड़ रसीद करने वाले का नाम सीपीएस नीरज भारती बताया गया। यानी वह भी ओबीसी से ताल्लुक रखने वाला। इसके बाद कांगड़ा के एक वरिष्ठ कांग्रेसी का नाम इस पूरे प्रकरण में सामने आने लगाए धीरे-धीरे दोनों तरफ से बयानबाजी शुरू हुई, आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए। उसके ठीक कुछ दिनों के भीतर ही भारतीय क्षत्रिय घृत बाहती चाहंग महासभा के स्थापना दिवस की बात बाहर आई। स्थापना दिवस तो इससे पहले भी मनाया जाता होगा, पर इस मर्तबा यह चर्चा में आया। प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या यह सब बातें उसी परिपेक्ष्य में हो रही हैं…। अगर ऐसा है तो यह मसला निश्चित तौर पर गंभीर दिखता है। गंभीरता इसलिए हैए क्योंकि चुनावी वर्ष आने को है, भारतीय क्षत्रिय घृत बाहती चाहंग महासभा के इस सम्मेलन में बिरादरी की बात होने लगी है। माहौल बनाने की आज पूरी-पूरी कोशिश हुई, बिरादरी से जुडे़ वक्ताओं ने एक-एक कर अपने दिल की भड़ास को बाहर निकाला। मसलन बात कांगड़ा-धर्मशाला की नहीं हो रही, यहां तो अगल-बगल के दूसरे विधानसभा क्षेत्र भी हैं, यहां बिरादरी का दमखम है। अगर इस मंच से कहे शब्दों की गंभीरता पर जाएं तो, निश्चित तौर पर जो बात शुरू हुई है वह दूर तक जाएगी…।

 

https://youtu.be/78lEoIddDzE

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Google+ Join us on Google+ Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

RELATED NEWS

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

राशिफल

Himachal Abhi Abhi E-Paper



सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है