हरियाली तीज : आस्था, उमंग और प्रेम का त्योहार

हरियाली तीज : आस्था, उमंग और प्रेम का त्योहार

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श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है। खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में सुहागिनें और महिलाएं इस त्योहार (festival) को बड़ी धूमधाम से मनाती हैं। इस बार ये हरियाली तीज (Hariyali teej) का त्योहार 3 अगस्त को है। आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव शिव-पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। राजस्थान में एक कहावत प्रचलित है। तीज तीवारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर… यानी सावनी तीज से आरंभ पर्वों की यह सुमधुर श्रृंखला गणगौर के विसर्जन तक चलने वाली है। सारे बड़े त्योहार तीज के बाद ही आते हैं। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, श्राद्ध-पर्व, नवरात्रि, दशहरा, दीपावली का पंच-दिवसीय महापर्व आदि।


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रंगीला राजस्थान हमेशा से ही तीज-त्योहार, रंग-बिरंगे परिधान, उत्सव और लोकगीत व रीति रिवाजों के लिए प्रसिद्ध है। तीज का पर्व राजस्थान (Rajasthan) के लिए एक अलग ही उमंग लेकर आता है जब महीनों से तपती हुई मरुभूमि में रिमझिम करता सावन आता है तो निश्चित ही किसी उत्सव से कम नहीं होता। दो महत्वपूर्ण तथ्य इस त्योहार को महत्ता प्रदान करते हैं। पहला शिव-पार्वती से जुड़ी कथा और दूसरा जब तपती गर्मी से रिमझिम फुहारें राहत देती हैं और चारों ओर हरियाली छा जाती है। यदि तीज के दिन बारिश हो रही है तब यह दिन और भी विशेष हो जाता है। जैसे मानसून आने पर मोर नृत्य कर खुशी प्रदर्शित करते हैं, उसी प्रकार महिलाएं भी बारिश में झूले झूलती हैं, नृत्य करती हैं और खुशियां मनाती हैं।

तीज के बारे में प्रचलित कथा है कि सावन (Monsoon) में कई सौ साल बाद शिव से पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। पार्वतीजी के 108वें जन्म में शिवजी उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न हुए और पार्वतीजी की अपार भक्ति को जानकर उन्हें अपनी पत्नी की तरह स्वीकार किया। पुराने समय से महत्वपूर्ण परंपरा है इस दिन वट वृक्ष के पूजन की। इसकी लटकती शाखों के कारण यह वृक्ष विशेष सौभाग्यशाली माना गया है। औरतें वट वृक्ष पर झूला बांधती हैं और बारिश की फुहारों में भीगते-नाचते गाते हुए तीज मनाती हैं।


इस दिन महिलाएं रंग-बिरंगे कपड़े, खूब सारे गहने पहनकर दुल्हन की तरह तैयार होती हैं। आज कल तो कुछ विशेष नजर
आने की चाह में ब्यूटी पार्लर जाना एक आम बात हो गई है। नवविवाहिताएं इस दिन अपने शादी का जोड़ा भी चाव से पहनती हैं।

मां पार्वतीजी का आशीष पाने के लिए महिलाएं कई रीति-रिवाजों का पालन करती हैं। विवाहित महिलाएं अपने मायके जाकर ये त्योहार मनाती हैं।

विवाहित महिलाओं को भी अपने पति, रिश्तेदारों एवं सास-ससुर के उपहार मिलते हैं। इस दिन महिलाएं उपवास रखती हैं।

आकर्षक तरीके से सभी मां पार्वती की प्रतिमा मध्य में रख आसपास महिलाएं इकट्ठा होकर देवी पार्वती की पूजा करती हैं। विभिन्न गीत गाए जाते हैं।

तीज पर हाथ-पैरों में मेहंदी भी जरूर लगाई जाती है। यह त्योहार महिलाओं के लिए गर्व का पर्व है। विशेष रूप से तीज के दिन प्रत्येक स्त्री रंग-बिरंगी लहरिया की साड़ियां पहने ही सब तरफ दिखाई पड़ती हैं।

जिन लड़कियों की सगाई हो जाती है, उन्हें अपने होने वाले सास-ससुर से सिंजारा मिलता है। इसमें मेहंदी, लाख की चूड़ियां, कपड़े (लहरिया), मिठाई विशेषकर घेवर शामिल होता है।


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