होलाष्टक आज से, भूल कर भी न करें ये काम 

होलाष्टक आज से,  भूल कर भी न करें ये काम 

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होली का त्‍योहार फाल्‍गुन मास में पूर्ण‍िमा के दिन मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 21 मार्च को मनाया जाएगा। होली पर्व से आठ दिन पूर्व होलाष्टक प्रारंभ हो जाते हैं। इस बार होलाष्टक 13 मार्च से शुरू होगा। हिंदू शास्‍त्रों के अनुसार इस समय आठ दिन तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाते। इस बार होलाष्टक रात्रि 12.02 बजे से लग रहे हैं जो  20 मार्च होलिका दहन तक चलेगा।  होलिका दहन को लोग छोटी होली भी कहते हैं।

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  • इस अवधि में शुभ कार्य- गर्भाधान, विवाह, नामकरण, विद्यारम्भ, गृह प्रवेश और नव निर्माण आदि नहीं करना चाहिए। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से ही होलिका दहन करने वाले स्थान का चयन भी किया जाता है। पूर्णिमा के दिन सायंकाल शुभ मुहूर्त में अग्निदेव से स्वयं की रक्षा के लिए उनकी पूजा करके होलिका दहन किया जाता है।
  •  इन आठ दिनों किसी भी व्‍यक्‍ति को ना तो भूमि-भवन खरीदना चाहिये और न ही विवाद आदि करना चाहिये। ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में शुरू किया गया कार्य कभी भी सफल नहीं होता। ज्‍योतिष के अनुसार इन 8 दिनों में ग्रह अपना स्थान बदलते हैं।
इस अवधि में भोग से दूर रह कर तप करना ही अच्छा माना जाता है। इसे भक्त प्रह्लाद का प्रतीक माना जाता है। 
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलाष्टक के प्रथम दिन अर्थात फाल्गुन शुक्लपक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु का उग्र रूप रहता है। इस वजह से इन आठों दिन मानव मस्तिष्क तमाम विकारों, शंकाओं और दुविधाओं आदि से घिरा रहता है, जिसकी वजह से शुरु किए गए कार्य के बनने के बजाय बिगड़ने की संभावना ज्यादा रहती है। चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को इन आठों ग्रहों की नकारात्मक शक्तियों के कमजोर होने की खुशी में लोग अबीर-गुलाल आदि छिड़ककर खुशियां मनाते हैं। जिसे होली कहते हैं।
जानिए होलाष्टक के इन 8 दिनों में कौन से कार्य करने अशुभ हैं
  • गर्भवती स्त्री को इन दिनों नदी-नाले पार करके यात्रा नहीं करनी चाहिये। ऐसा करने से पेट में पल रहे शिशु को कष्ट होता है।
  • होलाष्टक के दौरान विवाह नहीं करना चाहिये क्‍योंकि तब विवाह का मुहूर्त नहीं होता। इसके अलावा सगाई भी नहीं करनी चाहिये।
  • इन दिनों नये घर में प्रवेश भी नहीं करना चाहिये।
  • होलाष्टक के दौरान ना ही नया घर खरीदना चाहिये और ना ही भूमि पूजन करवाना चाहिये।
  • नवविवाहिताओं को इन दिनों में मायके में रहने की सलाह दी जाती है।
  • होलाष्टक में भले ही शुभ कार्यों के करने की मनाही है लेकिन इन दिनों में अपने देवी-देवता की पूजा करना अनिवार्य हो जाता है।
  • यही नहीं उपवास करने और दान करने से भी लाभ मिलता है।
पंडित दयानन्द शास्त्री, उज्जैन (म.प्र.)
(ज्योतिष-वास्तु सलाहकार) 09669290067, 09039390067

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