घर हो या दुकान, वास्तु के अनुसार यहां बनाएंगे मंदिर तो मिलेगा पूजा का लाभ

घर हो या दुकान, वास्तु के अनुसार यहां बनाएंगे मंदिर तो मिलेगा पूजा का लाभ

- Advertisement -

यह सच है कि ईश्‍वर सर्वव्यापी हैं और वे हमेशा सबका कल्याण ही करेंगे, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि दिशाओं के स्वामी भी देवता ही हैं। अत: आवश्यक है कि पूजा स्थल बनवाते समय भी वास्तु (Vastu) के कुछ नियमों का ध्यान रखा जाए। वास्तु विज्ञान के अनुसार देवी-देवताओं की कृपा घर पर बनी रहे इसके लिए पूजाघर वास्तुदोष से मुक्त होना चाहिए। वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार जिस घर या दुकान का पूजाघर वास्तुदोष के नियमों के विपरीत होता है, वहां ध्यान और पूजा (Worship) करते समय मन एकाग्र नहीं रह पाता है। इससे पूजा-पाठ का पूर्ण लाभ नहीं मिलता है।

यह भी पढ़ें : सूर्यदेव की पूजा करने से दूर होते हैं सारे कष्ट, जानिए क्या है विधि

हर मकान या दुकान में पूजाघर जरूर होता है। घरों में तो पूजन कक्ष का होना और भी जरूरी है क्योंकि यह मकान का वह हिस्सा है जो हमारी आध्यात्मिक उन्नति और शांति से जुड़ा होता है। यहां आते ही हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हैं और नकारात्मकता खत्म हो जाती है, इसलिए अगर यह जगह वास्तु के अनुरूप होती है तो उसका हमारे जीवन पर बेहतर असर होता है। कुछ वास्तु सिद्धांत हैं, जिन पर गौर करके हम अपने पूजाघर को अधिक प्रभावशाली बना सकते हैं –

पूजा स्थल के लिए भवन का उत्तर पूर्व कोना सबसे उत्तम होता है। पूजा स्थल की भूमि उत्तर पूर्व की ओर झुकी हुई और दक्षिण-पश्‍चिम से ऊंची हो, आकार में चौकोर या गोल हो तो सर्वोत्तम होती है। ईशान कोण में बना पूजाघर सबसे ज्यादा शुभ होता है क्योंकि इस दिशा के अधिपति बृहस्पति हैं। उनके तत्वगत स्वभाव के अनुरूप आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार सबसे ज्यादा होता है। नतीजतन इस दिशा में बैठकर पूजा करने से र्इश्वर के प्रति ध्यान और समर्पण पूरी तरह से होता है।

 

मंदिर की ऊंचाई उसकी चौड़ाई से दोगुनी होनी चाहिए। मंदिर के परिसर का फैलाव ऊंचाई से 1/3 होना चाहिए।

मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा उस देवता के प्रमुख दिन पर ही करें या जब चंद्र पूर्ण हो अर्थात 5,10,15 तिथि को ही मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा करें।

  • पूजाघर में कलश, गुंबद इत्यादि नहीं बनाना चाहिए।
  • पूजाघर में किसी प्राचीन मंदिर से लाई गई प्रतिमा या स्थिर प्रतिमा को स्थापित नहीं करना चाहिए।
  • पूजागृह के द्वार पर दहलीज़ ज़रूर बनवानी चाहिए। द्वार पर दरवाज़ा, लकड़ी से बने दो पल्लोंवाला हो तो अच्छा होगा। घर में बैठे हुए गणेशजी की प्रतिमा ही रखनी चाहिए।
  • पूजाघर में यदि हवन की व्यवस्था है तो वह हमेशा आग्नेय कोण में ही किया जाना चाहिए।
  • पूजाघर में भूल से भी भगवान की तस्वीर या मूर्ति आदि नैऋत्य कोण में न रखें। इससे बनते कार्यों में रुकावटें आती हैं।
  • पूजास्थल में कभी भी धन या बहुमूल्य वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए।
  • पूजाघर की दीवारों का रंग बहुत गहरा न होकर सफेद, हल्का पीला या हल्का नीला होना चाहिए।
  • पूजाघर की फर्श सफेद अथवा हल्का पीले रंग की होना चाहिए।
  • पूजाघर में ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इंद्र, सूर्य एवं कार्तिकेय का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
  • पूजाघर में गणेश, कुबेर, दुर्गा का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
  • पूजाघर में हनुमानजी का मुख नैऋत्य कोण में होना चाहिए।
  • पूजाघर में प्रतिमाएं कभी भी प्रवेशद्वार के सम्मुख नहीं होनी चाहिए।

मूर्ति के आमने-सामने पूजा के दौरान कभी नहीं बैठना चाहिए, बल्कि सदैव दाएं कोण में बैठना उत्तम होगा।

कभी भी आपके घर या दुकान में पूजाघर बीम के नीचे न हो और आप खुद भी बीम के नीचे बैठकर पूजा न करें। बीम के नीचे बैठकर पूजा करने से एकाग्रता भंग हो जाती है तथा पूजा का शुभफल मिलने की बजाय रोग आदि की आशंका बढ़ जाती है।

पूजाघर के निकट एवं भवन के ईशान कोण में झाड़ू या कूड़ादान आदि नहीं रखना चाहिए।

शयनकक्ष में पूजा स्थल नहीं होना चाहिए। अगर जगह की कमी के कारण मंदिर शयनकक्ष में बना हो तो मंदिर के चारों ओर पर्दे लगा दें। इसके अलावा शयनकक्ष के उत्तर पूर्व दिशा में पूजास्थल होना चाहिए। यदि परिस्थितिवश ऐसा करना ही पड़े तो वह शयनकक्ष विवाहितों के लिए नहीं होना चाहिए। यदि फिर भी जगह की कमी के कारण शयन कक्ष में ही पूजाघर बनाना पड़े तो ध्यान रखें कि बिछावन इस प्रकार हो ताकि सोते समय भगवान की ओर पैर नहीं हो।

  • पूजाघर के आसपास, ऊपर या नीचे शौचालय वर्जित है। पूजाघर में और इसके आसपास पूर्णत: स्वच्छता तथा शुद्वता होना अनिवार्य है। रसोई घर भूलकर भी शौचालय अथवा पूजाघर के पास न बनाएं। घर में सीढ़ियों के नीचे पूजाघर नहीं होना चाहिए।
  • पूजन कक्ष में मृतात्माओं का चित्र वर्जित है। किसी भी श्रीदेवता की टूटी-फूटी मूर्ति या तस्वीर व सौंदर्य प्रसाधन का सामान, झाड़ू और अनावश्यक सामान नहीं होना चाहिए।

यदि एक ही घर में कई लोग रहते हैं तो अलग-अलग पूजाघर बनवाने की बजाए मिल-जुलकर एक पूजाघर बनवाएं। एक ही मकान में कई पूजाघर होने पर घर के सदस्यों को मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भगवान को एक-दूसरे से कम से कम 1 इंच की दूरी पर रखें। अगर घर में एक ही भगवान की दो तस्वीरें हों तो दोनों को आमने-सामने बिलकुल न रखें। एक ही भगवान के आमने-सामने होने पर घर में आपसी तनाव बढ़ता है।

यदि संभव हो तो पूजा घर की फर्श बनवाने से पहले जमीन पर गाय के गोबर की एक परत पहले लगवाने का प्रयास करना चाहिए। विदित हो कि गाय का गोबर तमाम तरह के वास्तुदोष को दूर कर सुख-समृद्धि लाता है।

हिमाचल अभी अभी की मोबाइल एप अपडेट करने के लिए यहां क्लिक करें

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Google+ Join us on Google+ Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

RELATED NEWS

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

राशिफल

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper



सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है