कुछ कहते हैं होली के रंग, जानिए क्या है इनका महत्व  

हर रंग का है आध्यात्मिक महत्व

कुछ कहते हैं होली के रंग, जानिए क्या है इनका महत्व  

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 रंग हमारे जीवन के अभिन्न अंग है। इनसे जीवन में रूचि, विविधता और ताजगी बनी रहती है। हर साल के फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाले रंगों के त्योहार होली ( Holi) आनंदोल्लास का पर्व है।  इस पर्व पर हर रंग का अपना महत्व है। वास्तु के अनुसार  होली खेलते समय यदि सही रंगों का उपयोग किया जाए तो इससे सफलता मिलती है साथ ही सुख-समृद्धि आती है। होली के लाल, पीले, गुलाबी, हरे व नीले रंगों का जीवन से गहरा नाता है। रंगों का अपना आध्‍यात्‍म‍िक महत्‍व ( Spiritual significance) भी होता है। जानते है होली के किस रंग का क्या महत्व है….

 

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  • लाल रंगः यह रंग उगते सूर्य और ढलते सूर्य का का प्रतीक है।  लाल रंग ( Red colour) को स्फूर्ति देनेवाला रंग माना जाता है। साथ ही प्रकृति में लाल रंग के फूलों की महिमा अद्भुत है जो देवी को चढ़ाए जाते है। लाल रंग को सभी रंगों में से सबसे अधिक चटक रंग माना जाता है। कसरत के समय इस रंग के कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह स्फूर्ति प्रदान करने वाला रंग माना जाता है। यह बात ध्यान रखने योग्य है कि इस रंग के ज्यादा प्रयोग के कई खराब परिणाम हो सकते हैं । इससे तनाव हो सकता है या फिर गुस्सा आ सकता है।
  • पीला रंगः सूर्य की किरणें जिस प्रकार अंधकार का विनाश करती हैं, उसी तरह ये मनुष्य के हृदय में बसी बुरी भावनाओं को नष्ट करती हैं।  गाढ़ा पीला रंग  मनुष्य को मनोबल प्रदान करके हर कार्य में सफलता की ओर बढ़ाता है। पीला रंग ( yellow colour) हमारी एकाग्रता को बढ़ाता है लेकिन इसका अधिक इस्तेमाल हमारी एकाग्रता को भंग कर सकता है। पीला रंग हमारे दिमाग में सेरोटोनिन नामक केमिकल बनने के लिए जिम्मेदार है, जिससे हम खुश रहते हैं। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है। अमूमन गुरुवार को पीले रंग का फल खाने का सलाह दिया जाता है । साथ ही इस दिन गुरु (बृहष्पति) को प्रबल करने के लिए पीला रंग का कपड़ा धारण करते हैं। पीले रंग का संबंध भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु ब्रह्मा के साथ भी है और ये विद्या का भी प्रतीक है। यह रंग उत्तेजित भी करता है और स्वस्थ विचारों को भी जन्म भी देता है। भगवान श्री कृष्ण भी पीताम्बर ही पहनते हैं। पीला रंग स्थापत्य कला की दृष्टि से भी अत्यंत महत्व रखता है। पीला रंग पसंद करने वाले कलाकार होते हैं।
  • नीला रंगः  यह रंग अपनी विशेष खूबियों के कारण काफी महत्व रखता है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। दरअसल नीला रंग( Blue colour)  गहराई का प्रतीक है। नीले रंग का प्रयोग रचनात्मकता को बढ़ाता है। आसमान का रंग भी नीला है और समुद्र का रंग भी नीला होता है और दोनों गहराई का प्रतीक है। नीला रंग जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए जल तत्व के सारे गुण इसमें समाहित हैं। नीला रंग पानी की ही तरह चंचल, गतिमान और जीवनदायिनी शक्ति प्रदान करता है। अगर आपका पसंदीदा रंग नीला है तो इसका मतलब हुआ कि आपका व्यक्तित्व बहुत गहरा है और आपके जीवन में बहुत से लोग आप पर भरोसा करते हैं। आप बहुत ईमानदार है और आपका यह गुण आपको भरोसेमंद बनाता है।
  • हरा रंगः  प्रकृति की वादियों को आप देखें , पहाड़ियों को देखें जहां चारों तरफ हरियाली ही नजर आती है। हरियाली देखने से बेहद सुकून मिलता है। इसलिए हरे रंग( Green colour)को प्रकृति का रंग माना जाता है। यह तनाव कम करने वाला और राहत देने वाला रंग है। यह हाइजीन और जल्द रिकवरी करने वाला माना जाता है इसलिए अधिकतर अस्पतालों में हरे रंग का प्रयोग दिखता है। आंखों को भी यह रंग सुकून देता है। हरे रंग का इस्तेमाल आपके तन मन को सेहतमंद रखता है और आपमें नवीनता का संचार करता है। हरे रंग का उचित प्रयोग आपको बीमारियों से दूर रखता है।

 

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