साल में केवल एक दिन खुलते हैं नागचंद्रेश्वर मन्दिर के कपाट

दर्शन मात्र से कालसर्प दोष और दुर्भाग्य दूर हो जाता है

साल में केवल एक दिन खुलते हैं नागचंद्रेश्वर मन्दिर के कपाट

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उज्जैन स्थित नागचन्द्रेश्वर मंदिर देश का एक ऐसा मंदिर है जिसके कपाट साल में केवल एक दिन के लिए खोले जाते हैं और वह है सावन ममाह की नागपंचमी।
नागचन्द्रेश्वर मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के परिसर में सबसे ऊपर यानी तीसरे खंड में स्थित है। ग्यारहवीं शताब्दी के इस मंदिर में नाग पर आसीन शिव-पार्वती की अतिसुंदर प्रतिमा है, जिसके ऊपर छत्र के रूप में नागदेवता अपना फन फैलाए हुए हैं।
मान्यता है कि नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में रहते हैं।


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भगवान शिव
के इस रुप को नागचन्द्रेश्वर महादेव कहा जाता है।

श्री महाकालेश्वर मंदिर तीन खंडों में बंटा है और इस मंदिर के विशाल प्रांगण पहली मंजिल पर भगवान महाकालेश्वर, दूसरी मंजिल पर ओंकारेश्वर और तीसरी मंजिल पर भगवान नागचन्द्रेश्वर स्थापित हैं।


ऐतिहासिक साक्ष्य बताते हैं कि नागचन्द्रेश्वर भगवान की प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। नागपंचमी पर्व के अवसर पर महाकालेश्वर और नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश की व्यवस्था की जाती है।

इस मंदिर में विराजित नाग चंद्रेश्वर के दर्शन मात्र से कालसर्प दोष और दुर्भाग्य दूर हो जाता है। महाकालेश्वर मंदिर के महंत प्रकाशपुरी ने बताया कि नागचन्द्रेश्वर भगवान की प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई और चमत्कारिक एवं आकर्षक प्रतिमा के साथ लक्ष्मी माता और शंकर पार्वती नंदी पर विराजित हैं। नागचन्द्रेश्वर भगवान के साथ इनका भी पूजन नागपंचमी के दिन किया जाता है।

सर्पराज तक्षक ने शिवशंकर को मनाने के लिए घोर तपस्या की थी। तपस्या से भोलेनाथ प्रसन्न हुए और उन्होंने सर्पों के राजा तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया। मान्यता है कि उसके बाद से तक्षक राजा ने प्रभु के सा‍‍‍न्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया।

लेकिन महाकाल वन में वास करने से पूर्व उनकी यही मंशा थी कि उनके एकांत में विघ्न ना हो अत: वर्षों से यही प्रथा है कि मात्र नागपंचमी के दिन ही वे दर्शन को उपलब्ध होते हैं। शेष समय उनके सम्मान में परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है। इस मंदिर में दर्शन करने के बाद व्यक्ति किसी भी तरह के सर्पदोष से मुक्त हो जाता है, इसलिए नागपंचमी के दिन खुलने वाले इस मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है।

नागचंद्रेश्वर मंदिर की पूजा और व्यवस्था महानिर्वाणी अखाड़े के संन्यासियों द्वारा की जाती है।

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