रक्षाबंधन का पर्व और आज के रिश्ते ….

रक्षाबंधन का पर्व और आज के रिश्ते ….

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वर्तमान समाज में हम सब के सामने जो सामाजिक कुरीतियां सामने आ रही है। उन्हें दूर करने में रक्षाबंधन का पर्व (Raksha Bandhan festival) सहयोगी हो सकता है। आज जब हम बुजुर्ग माता-पिता को सहारा ढूंढते हुए वृद्ध आश्रम जाते हुए देखते हैं तो अपने विकास और उन्नति पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ पाते हैं। इस समस्या का समाधन राखी पर माता-पिता को राखी बांधना, पुत्र-पुत्री के द्वारा माता पिता की जीवन भर हर प्रकार के दायित्वों की जिम्मेदारी लेना हो सकता है। इस प्रकार समाज की इस मुख्य समस्या का समाधान किया जा सकता है।


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आज के सीमित परिवारों में कई बार, घर में केवल दो बहने या दो भाई ही होते हैं, इस स्थिति में वे रक्षाबंधन के त्योहार पर मासूस होता है कि वे रक्षाबंधन का पर्व किस प्रकार मनाएंगे। उन्हें कौन राखी बांधेगा या फिर वे किसे राखी बांधेगी। इस प्रकार कि स्थिति सामान्य रूप से हमारे आसपास देखी जा सकती है। ऎसा नहीं है कि केवल भाई-बहन के रिश्तों (relations ) को ही मजबूती या राखी की आवश्यकता होती है, जबकि बहन का बहन को और भाई का भाई को राखी बांधना एक दूसरे के करीब लाता है। उनके मध्य के मतभेद मिटाता है। आधुनिक युग में समय की कमी ने रिश्तों में एक अलग तरह की दूरी बना दी है जिसमें एक दूसरे के लिये समय नहीं होता, इसके कारण परिवार के सदस्य भी आपस में बातचीत नहीं कर पाते है. संप्रेषण की कमी, मतभेदों को जन्म देती है और गलतफहमियों को स्थान मिलता है।


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अगर इस दिन बहन-बहन, भाई-भाई को राखी बांधता है तो इस प्रकार की समस्याओं से निपटा जा सकता है। यह पर्व सांप्रदायिकता (Communalism) और वर्ग-जाति की दिवार को गिराने में भी मुख्य भूमिका निभा सकता है। जरूरत है तो केवल एक कोशिश की। इस प्रकार रक्षा बंधन को केवल भाई बहन का पर्व न मानते हुए हम सभी को अपने विचारों के दायरे को विस्तृत करते हुए, विभिन्न संदर्भों में इसका महत्व समझना होगा। संक्षेप में इसे अपनत्व और प्यार के बंधन से रिश्तों को मजबूत करने का पर्व है। बंधन का यह तरीका ही भारतीय संस्कृति को दुनिया की अन्य संस्कृतियों से अलग पहचान देता है।

पंडित दयानंद शास्त्री, उज्जैन (म.प्र.) (ज्योतिष-वास्तु सलाहगाड़ी) 09669290067, 09039390067

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