चमत्कारी हैं भगवान शिव से जुड़े ये पांच शिवलिंग, जानिए इनके पीछे की कहानी

चमत्कारी हैं भगवान शिव से जुड़े ये पांच शिवलिंग, जानिए इनके पीछे की कहानी

- Advertisement -

भगवान शिव की महिमा अनोखी एवं निराली है। जहां अन्य सभी देवताओं के स्वरूप की पूजा की जाती है वहीं भगवान शिव शंकर जो निर्विकार, निराकार, ओमकार स्वरूप है उनकी लिंग के रूप में पूजा होती है। भारत में अनेक ऐसे शिवलिंग है जो अपने चमत्कारी शक्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं। भगवान शिव (Lord Shiva) के कुछ शिवलिंगों में से अपने आप जल की धारा बहती है तो कुछ शिवलिंग (Shivling) का आकार दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। भगवान शिव के कुछ शिवलिंग तो ऐसे हैं जिनका संबंध प्रलय से जुड़ा हुआ है। इन चमत्कारों के रहस्यों (Mystery) को जानने के लिए कई जगह तो विज्ञान भी फेल होता पाया गया है। जानिए भगवान शिव से जुड़े पांच अनोखे शिवलिंग के बारे में जिनके चमत्कारों (Miracles) ने लोगों को आश्चर्य में डाल रखा है …


यह भी पढ़ें  : इस मंदिर में आकर ठीक हो जाता है लकवे का मरीज, वैज्ञानिक भी हैं हैरान

 

बाबा तिल भांडेश्वर महादेव : बाबा तिल भांडेश्वर महादेव का मंदिर काशी के केदार खंड में स्थित है। कहते हैं कि यह शिवलिंग सतयुग में प्रकट हुआ था तथा यह स्वयंभू शिवलिंग है। इस शिवलिंग का वर्णन शिव पुराण धर्मग्रंथ में भी मिलता है। वर्तमान में इस शिवलिंग का आधार कहां पर है यह आज तक एक रहस्य बना हुआ है। इस शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि यह शिवलिंग सतयुग से द्वापर युग तक हर रोज एक तिल के आकार तक बढ़ते रहता है, लेकिन कलयुग के आरंभ लोगों को यह चिंता सताने लगी कि यदि भगवान शिव का शिवलिंग हर रोज इसी तरह बढ़ता रहा तो एक दिन पूरी दुनिया इस शिवलिंग में समाहित हो जाएगी। तब यहां लोगों ने शिव की आराधना की और भगवान शिव ने प्रसन्न होकर भक्तों को दर्शन दिए।

भगवान शिव ने यह वरदान भी दिया कि अबसे में हर मकर संक्रांति को ही एक तिल बढ़कर भक्तों का कल्याण करूंगा। अत्यधिक प्राचीन इस मंदिर के विषय में अनेकों मान्यताएं जुड़ी हैं। कहा जाता है कि इसी स्थान पर विभांड ऋषि ने तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। भगवान शिव ने उन्हें दर्शन देकर यहां स्वयंभू शिवलिंग के रूप में स्थापित हुए थे तथा उन्हें वरदान दिया कि में कलयुग में बढूंगा। भगवान शिव के इस अद्भुत शिवलिंग के दर्शन मात्र से मुक्ति का मार्ग परास्त होता है।

  • मृदेश्वर महादेव मंदिर : गुजरात गोधरा में स्थित यह मंदिर भी प्रलय का संकेत देता है। बताया जाता है के यहां शिवलिंग का बढ़ता आकार कलयुग के धरती पर हावी होने की निशानी है। जिस दिन ये शिवलिंग आकार में साढ़े आठ फुट हो जाएगा तथा मंदिर की छत को छू लेगा वह दिन कलयुग का अंतिम चरण होगा अर्थात उसके बाद पृथ्वी में प्रलय आ जाएगी और एक नए युग का आरंभ होगा। फिलहाल शिवलिंग को मंदिर के छत तक पहुंचने में लाखों वर्ष लग जाएंगे क्योंकि शिवलिंग का आकार हर वर्ष एक चावल के आकार का बढ़ता है। मृदेश्वर मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि इसमें स्वतः ही जल की धारा लगातार बहती रहती है तथा शिवलिंग का जलाभिषेक करती रहती है। सूखे एवं गर्मी में भी इस जलधारा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, यह जल धारा अविरल बहती रहती है।
  • पोडिवाल महादेव मंदिर : हिमाचल प्रदेश में नाहन से करीब 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित पोडिवाल महादेव मंदिर है। इसका संबंध रावण से माना जाता है, कहा जाता है कि रावण ने इसकी स्थापना की थी। इसे स्वर्ग की दूसरी पौड़ी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि हर शिवरात्रि को यह शिवलिंग एक जौ के दाने के बराबर बढ़ता है। ऐसी मान्यता है की इस शिवलिंग में साक्षात शिवजी का वास है तथा भगवान शिव सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
  • भूतेश्वर महादेव मंदिर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है गरियाबंद जिला यहां एक प्राकृतिक शिवलिंग स्थित है जिसे भूतेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह विश्व का सबसे बड़ा प्राकर्तिक शिवलिंग है। सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है कि यह शिवलिंग अपने आप बड़ा और मोटा होता जा रहा है। यह जमीन से लगभग 18 फीट ऊंचा एवं 20 फीट गोलाकार है। राजस्व विभाग द्वारा प्रतिवर्ष इसकी ऊंचाई नापी जाती है जो लगातार 6 से 8 इंच बढ रही है।
  • जग्गेश्वर महादेव मंदिर : मैदागिन मार्ग से आगे बढ़ने पर महादेव का दिव्य मंदिर है। शिव की नगरी काशी में तो कंकड़-कंकड़ में शिव का वास है। शिव ही यहां के आराध्य हैं और शिव ही लोगों की रक्षा और भरण-पोषण करते हैं। शिव के इस आनंद वन में शिव के चमत्कारों की कोई कमी नहीं है। इस मंदिर में भगवान शिव का लिंग हर शिवरात्रि को जौ के एक दाने के बराबर बढ़ जाता है। मंदिर के आसपास ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जिन्होंने इस शिवलिंग को अपने बचपन से बढ़ते हुए देखा है।

ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से इस जन्म का ही नहीं बल्कि सात जन्मों का पाप कट जाता है। जागिश ऋषि की कठोर तपस्या से खुश होकर महादेव यहां प्रकट हुए थे। हर शिवरात्रि को बढ़ते-बढ़ते वर्तमान में इस शिवलिंग ने आदम कद प्राप्त कर लिया है। महंत आनंद मिश्र बताते हैं कि ऋषि के हठ ने न सिर्फ महादेव को यहां बुलाया बल्कि हमेशा के लिए उन्हें यही विराजमान भी होना पड़ा। ऋषि जब बिमारी की वजह से मौत के मुंह में असमय ही चले जा रहे थे, तब महादेव ने अपने प्रिय मदार के पुष्प से उनका इलाज़ भी किया था। बीमारी से ठीक होने को लोग मदार की माला चढ़ाते हैं।

शिव के परिवार में अद्भुत बात है। विभिन्नताओं में एकता और विषमताओं में संतुलन यह शिव परिवार से ही सीखा जा सकता है। शिव परिवार के हर व्यक्ति के वाहन या उनसे जुड़े प्राणियों को देखें तो शेर-बकरी एक घाट पानी पीने का दृश्य साफ दिखाई देगा। शिवपुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर है, मगर शिवजी के तो आभूषण ही सर्प हैं। वैसे स्वभाव से मयूर और सर्प दुश्मन हैं। इधर गणपति का वाहन चूहा है, जबकि सांप मूषकभक्षी जीव है। पार्वती स्वयं शक्ति हैं, जगदम्बा हैं जिनका वाहन शेर है मगर शिवजी का वाहन तो नंदी बैल है। बेचारे बैल की सिंह के आगे औकात क्या? परंतु नहीं, इन दुश्मनियों और ऊंचे-नीचे स्तरों के बावजूद शिव का परिवार शांति के साथ कैलाश पर्वत पर प्रसन्नतापूर्वक समय बिताता है। जिस घर में शिव परिवार का चित्र लगा होता है वहां आपस में पारिवारिक एकता, प्रेम और सामंजस्यता बनी रहती है।

हिमाचल अभी अभी की मोबाइल एप अपडेट करने के लिए यहां क्लिक करें

 

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

RELATED NEWS

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Top : News

बीजेपी पहली बार 300 पार, कांग्रेस के 50 सीटों पर सिमटने के आसार!

हिमाचल में कांग्रेस क्लीन बोल्ड, चारों सीटों पर बीजेपी की बंपर जीत के साथ कब्जा बरकरार

जयराम ने सभी सांसद शिमला बुलाए, होगी अहम बैठक

सोलनः चलती कार में लगी आग, समय रहते गाड़ी से निकला चालक

दादा ने बनाया था जीत का रिकार्ड, पोते ने बना डाला हार का रिकार्ड

बीजेपी की जीत पर भी शांता चिंतित, उन्हें कहां लगा लोकतंत्र हार गया-जाने

उम्मीद से ज्यादा लीड मिलने के बाद बोले अनुराग-अन्याय करने वाले कैसे न्याय करेंगे

हरोली में मुकेश नहीं दिखा पाए जलवा, बूथ वाइज देखें रिजल्ट

धर्मशाला-पच्छाद में होंगे विस उप चुनाव, किसे मिल सकती है बीजेपी की टिकट, जानें

अब तक किस विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी को कितनी लीड, जानिए

जयराम मतगणना के रूझानों से गदगद,बोले- इतिहास बनने वाली है ये जीत

कांग्रेस हिमाचल में चारों खाने चित्त, सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में पिटने चली

कांगड़ा में कोई ओबीसी कार्ड नहीं, कपूर प्रदेश भर में सर्वाधिक मतों से आगे

भद्रवानी में सिलेंडर फटने से पिता व दिव्यांग बेटी की मौत

Himachal Result Live : हिमाचल की चारों सीटें बीजेपी को, कांगड़ा से किशन कपूर को 4,66,395 की लीड

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

राशिफल

Himachal Abhi Abhi E-Paper




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है