रक्षाबंधन मनाने को लेकर प्रचलित हैं ये कहानियां, जरा आप भी डालिए नजर

रक्षाबंधन मनाने को लेकर प्रचलित हैं ये कहानियां, जरा आप भी डालिए नजर

- Advertisement -

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के लिए बेहद खास होता है। इस पवित्र दिन सभी बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, उन्हें मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा करती हैं और अपनी रक्षा का वचन लेती हैं। कहा जा सकता है कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व (festival) है। एक ओर जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन बहन को देता है तो दूसरी ओर बहन भी भाई की लंबी उम्र के लिये उपवास रखती है। इस दिन भाई की कलाई पर जो राखी बहन बांधती है वह सिर्फ रेशम की डोर या धागा मात्र नहीं होती बल्कि वह बहन-भाई के अटूट और पवित्र प्रेम का बंधन और रक्षा पोटली जैसी शक्ति भी उस साधारण से नजर आने वाले धागे में निहित होती है। रक्षाबंधन का त्योहार (Rakshabandhan festival) मनाने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं जिनके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं …


यह भी पढ़ें :- इस बार रक्षाबंधन पर रहेगा 12 घंटों का शुभ मुहूर्त

बहुत समय पहले की बाद है देवताओं और असुरों में युद्ध छिड़ा हुआ था लगातार 12 साल तक युद्ध चलता रहा और अंतत: असुरों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर देवराज इंद्र के सिंहासन सहित तीनों लोकों को जीत लिया। इसके बाद इंद्र देवताओं के गुरु, ग्रह बृहस्पति के पास के गए और सलाह मांगी। बृहस्पति ने इन्हें मंत्रोच्चारण के साथ रक्षा विधान करने को कहा। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन गुरु बृहस्पति ने रक्षा विधान संस्कार आरंभ किया। इस रक्षा विधान के दौरान मंत्रोच्चारण से रक्षा पोटली को मजबूत किया गया। पूजा के बाद इस पोटली को देवराज इंद्र की पत्नी शचि जिन्हें इंद्राणी भी कहा जाता है ने इस रक्षा पोटली को देवराज इंद्र के दाहिने हाथ पर बांधा। इसकी ताकत से ही देवराज इंद्र असुरों को हराने और अपना खोया राज्य वापस पाने में कामयाब हुए।

राखी से जुड़ी एक सुंदर घटना का उल्लेख महाभारत में मिलता है। सुंदर इसलिए क्योंकि यह घटना दर्शाती है कि भाई-बहन के स्नेह के लिए उनका सगा होना जरूरी नहीं है। कथा है कि जब युधिष्ठिर इंद्रप्रस्थ में राजसूय यज्ञ कर रहे थे उस समय सभा में शिशुपाल भी मौजूद था। शिशुपाल ने भगवान श्रीकृष्ण का अपमान किया तो श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया। लौटते हुए सुदर्शन चक्र से भगवान की छोटी उंगली थोड़ी कट गई और रक्त बहने लगा। यह देख द्रौपदी आगे आईं और उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर लपेट दिया। इसी समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया कि वह एक-एक धागे का ऋण चुकाएंगे। इसके बाद जब कौरवों ने द्रौपदी का चीरहरण करने का प्रयास किया तो श्रीकृष्ण ने चीर बढ़ाकर द्रौपदी के चीर की लाज रखी। कहते हैं जिस दिन द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की कलाई में साड़ी का पल्लू बांधा था वह श्रावण पूर्णिमा की दिन था।

यह भी पढ़ें :-यहां नहीं मनाया जाता रक्षाबंधन का त्योहार, 700 साल से चल रही परंपरा


राखी की एक अन्य कथा है कि पांडवों को महाभारत का युद्ध जिताने में रक्षासूत्र का बड़ा योगदान था। महाभारत युद्ध के दौरान युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि हे कान्हा, मैं कैसे सभी संकटों से पार पा सकता हूं? मुझे कोई उपाय बतलाएं। तब श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि वह अपने सभी सैनिकों को रक्षासूत्र बांधें। इससे उनकी विजय सुनिश्चित होगी। युधिष्ठिर ने ऐसा ही किया और विजयी बने। यह घटना भी सावन महीने की पूर्णिमा तिथि पर ही घटित हुई मानी जाती है। तब से इस दिन पवित्र रक्षासूत्र बांधा जाता है। इसलिए सैनिकों को इसदिन राखी बांधी जाती है।


भविष्य पुराण में एक कथा है कि वृत्रासुर से युद्ध में देवराज इंद्र की रक्षा के लिए इंद्राणी शची ने अपने तपोबल से एक रक्षासूत्र तैयार किया और श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई में बांध दी। इस रक्षासूत्र ने देवराज की रक्षा की और वह युद्ध में विजयी हुए। यह घटना भी सतयुग में हुई थी।

एक अन्य कहानी के अनुसार सिकंदर पूरे विश्व को फतह करने निकला और भारत आ पहुंचा। यहां उसका सामना भारतीय राजा पुरु से हुआ। राजा पुरु बहुत वीर और बलशाली राजा थे, उन्होंने युद्ध में सिकंदर को धूल चटा दी। इसी दौरान सिकंदर की पत्नी को भारतीय त्योहार रक्षाबंधन के बारे में पता चला। तब उन्होंने अपने पति सिकंदर की जान बख्शने के लिए राजा पुरु को राखी भेजी। पुरु आश्चर्य में पड़ गए, लेकिन राखी के धागों का सम्मान करते हुए उन्होंने युद्ध के दौरान जब सिकंदर पर वार करने के लिए अपना हाथ उठाया तो राखी देखकर ठिठक गए और बाद में बंदी बना लिए गए। दूसरी ओर बंदी बने पुरु की कलाई में राखी को देखकर सिकंदर ने भी अपना बड़ा दिल दिखाया और पुरु को उनका राज्य वापस कर दिया।


एक अन्य प्रचलित कथा यह है कि राजा बली बहुत दानी राजा थे और भगवान विष्णु के अनन्य भक्त भी थे। एक बार उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया। इसी दौरान उनकी परीक्षा लेने के लिए भगवान विष्णु वामनावतार लेकर आए और दान में राजा बलि से तीन पग भूमि देने के लिए कहा। लेकिन उन्होंने दो पग में ही पूरी पृथ्वी और आकाश नाप लिया। इस पर राजा बलि समझ गए कि भगवान उनकी परीक्षा ले रहे हैं। तीसरे पग के लिए उन्होंने भगवान का पग अपने सिर पर रखवा लिया। फिर उन्होंने भगवान से याचना की कि अब तो मेरा सबकुछ चला ही गया है, प्रभु आप मेरी विनती स्वीकारें और मेरे साथ पाताल में चलकर रहें। भगवान ने भक्त की बात मान ली और बैकुंठ छोड़कर पाताल चले गए। उधर देवी लक्ष्मी परेशान हो गईं। फिर उन्होंने लीला रची और गरीब महिला बनकर राजा बलि के सामने पहुंचीं और राजा बलि को राखी बांधी। बलि ने कहा कि मेरे पास तो आपको देने के लिए कुछ भी नहीं हैं, इस पर देवी लक्ष्मी अपने रूप में आ गईं और बोलीं कि आपके पास तो साक्षात भगवान हैं, मुझे वही चाहिए मैं उन्हें ही लेने आई हूं। इस पर बलि ने भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी के साथ जाने दिया। जाते समय भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान दिया कि वह हर साल चार महीने पाताल में ही निवास करेंगे। यह चार महीना चर्तुमास के रूप में जाना जाता है जो देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठानी एकादशी तक होता है।

पंडित दयानंद शास्त्री, उज्जैन (म.प्र.) (ज्योतिष-वास्तु सलाहगाड़ी) 09669290067, 09039390067


हिमाचल अभी अभी Mobile App का नया वर्जन अपडेट करने के लिए इस link पर Click करें ….

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook. Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

RELATED NEWS

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Top : News

लापता शुभम मामले में आरोपी Narco Test से मुकरा, स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला

चंबाः मुंह काला कर, गले में जूतों की माला पहनाकर गांव में घुमाया व्यक्ति, 7 धरे

हिमाचल में शुरू हुआ बर्फबारी दौर, अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम- पढ़ें

कांगड़ा जिले के एक ही गांव से दो नाबालिग लापता, Police में मामला दर्ज

बेक्रिंगः HPSSC ने घोषित किया यह फाइनल रिजल्ट, यह हुए सफल

Breaking: ग्रीष्मकालीन स्कूलों की 9वीं और 11वीं वार्षिक परीक्षा की Date Sheet जारी

जनसमस्याओं पर भारी पड़े दिल्ली विस चुनाव, जनमंच टला-2 फरवरी को नहीं होगा

Himachal Cabinet से मंजूर 3636 शिक्षकों की भर्ती पर लगी ब्रेक-जाने कारण

First Hand: सीएम Jai Ram अगले छह दिन तक नहीं मिलेंगे, कारण जानने के लिए करें क्लिक

Air India को बेचने की तैयारी, सुब्रह्मण्यम स्वामी बोले - देश विरोधी सौदे के खिलाफ जाएंगे कोर्ट

जयराम का आह्वान, विदेशों में कार्यरत पेशेवर युवा दें Himachal के विकास में योगदान

Andhra Pradesh में खत्म होगी विधान परिषद, Jagan Cabinet ने प्रस्ताव पर लगाई मुहर

Drugs Free Punjab Winter Half Marathon में दौड़े सोलन के मां- बेटी व बेटा

Himachal की ममता भारद्वाज ने बनाई ज़ी सारेगामापा पंजाबी के शो में खास जगह

बेटे की शादी की धाम देने Himachal आएंगे BJP president Nadda ,तारीखें हो गई हैं तय

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

HP : Board

विज्ञान विषयः अध्याय-4… कार्बन और इसके घटक

Breaking: ग्रीष्मकालीन स्कूलों की 9वीं और 11वीं वार्षिक परीक्षा की Date Sheet जारी

विज्ञान विषयः अध्याय-3 ……धातु एवं अधातु

10वीं, जमा दो की परीक्षाओं को लेकर क्या बोले बोर्ड अध्यक्ष Suresh Kumar Soni, पढ़ें पूरी खबर

ब्रेकिंगः स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 8 वीं की Datesheet में किया संशोधन, पढ़े ये है नई डेटशीट

हिमाचल शिक्षा बोर्ड का बड़ा फैसला, मार्च से लागू होगी यह नई व्यवस्था

बिग ब्रेकिंगः TET का रिजल्ट आउट, TGT Arts का 12.57 फीसदी रहा

SOS के 504 छात्रों के बिना परीक्षा शुल्क पहुंचे प्रवेश पत्र, बोर्ड ने लिया यह फैसला

विज्ञान विषयः रासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरण

बड़ी खबरः ग्रीष्मकालीन अवकाश वाले स्कूलों में अब 22 से होंगी छुट्टियां-जानिए क्यों

SOS के छात्रों के लिए पीसीपी 22 दिसंबर से, यह छात्र ले सकेंगे भाग

शिक्षा बोर्ड ने 10वीं और 12वीं की डेटशीट की जारी, मांगे सुझाव और आपत्तियां


सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है