कुंडली में हैं ये योग तो देरी से होगा विवाह, तलाक भी होगा

जानिए विवाह होने में रुकावट पहुंचाने वाले योग को

कुंडली में हैं ये योग तो देरी से होगा विवाह, तलाक भी होगा

- Advertisement -

हिंदू संस्कारों में विवाह को जीवन का आवश्यक संस्कार बताया गया है। विवाह (marriage)के योग व्यक्ति के जीवन में होते हैं लेकिन कुछ ऐसे कारक भी हैं जो उसमें विलंब कराते हैं। ज्योतिषशास्त्र (Astrology) में मंगल, शनि, सूर्य, राहु और केतु को विलंब का कारक बताया गया है। जन्मकुंडली के सप्तम भाव में अशुभ या क्रूर ग्रह के स्थित होने अथवा सप्तमेश व उसके कारक ग्रह बृहस्पति व शुक्र के कमजोर होने से विवाह में बाधा आती है।


 

यह भी पढ़ें  :  शनिवार के दिन कभी न करें लोहा दान, नहीं तो भुगतना होगा परिणाम

 

  • आम बोलचाल के शब्दों में कहें तो अगर आपके जीवन में विवाह का योग पैदा करने वाले ग्रहों के मुकाबले वे ग्रह ज्यादा हावी होते हैं विवाह में बाधा (Obstacle) आती पहुंचाते हैं।
  • सबसे पहले हमें देखना होगा कि वे कौन से योग है जो विवाह होने में रुकावट पहुंचाते हैं और वैवाहिक जीवन (married life ) को नारकीय बना देते है।कुंडली में सप्तम भाव केंद्र भावों में से एक है। इसे जाया, कलत्र, काम, भार्या आदि नामों से भी पुकारा जाता है| फारसी में इस भाव को हफ्तमखाने, जनखाने, हमलखाने कहते हैं। लग्न भाव जीवन (life) व जीवनारंभ दर्शाता है तो सप्तम भाव लग्न के विपरीत होने से जीवन का अंत दर्शाता है| इसलिए इसका एक नाम अस्त भी है क्योंकि लग्न उदय स्थान है| जीवन के चार प्रमुख कार्यों यथा- धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष में से काम का विचार सप्तम भाव से किया जाता है|

प्रत्येक मनुष्य को जीवन में सहयोगी की आवश्यकता होती है। सर्वश्रेष्ठ सहयोगी पति या पत्नी होती है, इसलिए पत्नी या पति का विचार भी इसी भाव से किया जाता है। जीवन साथी ( life partner ) के अतिरिक्त विवाह, कामकला, दांपत्य सुख, विवाह का समय, साझेदारी, व्यापार, जीवनसाथी की विशेषताएं, मैथुन आदि का विचार इसी भाव से किया जाता है। दशम भाव(कर्म स्थान) से दशम होने के कारण सप्तम भाव से कार्यक्षेत्र व व्यवसाय का विचार भी किया जाता है। पंचम भाव से तृतीय होने के कारण यह भाव पुत्र के पराक्रम तथा व्यक्ति की द्वितीय संतान का प्रतीक भी है। चतुर्थ से चतुर्थ होने के कारण यह भाव नानी तथा ननिहाल को भी दर्शाता है।

 

  • यदि कुंडली में सातवें घर का स्वामी सप्तमांश कुंडली में किसी भी नीच ग्रह के साथ अशुभ भाव में बैठा हो तो शादी तय नहीं हो पाती है।
  • यदि दूसरे भाव का स्वामी अकेला सातवें घर में हो तथा शनि पांचवें अथवा दशम भाव में वक्री अथवा नीच राशि का हो तो शादी तय होकर भी टूट जाती है।
  • यदि जन्म समय में श्रवण नक्षत्र हो तथा कुंडली में कही भी मंगल एवं शनि का योग हो तो शादी तय होकर भी टूट जाती है।
  • यदि मूल नक्षत्र में जन्म हो तथा गुरु सिंह राशि में हो तो भी शादी तय होकर टूट जाती है. किन्तु गुरु को वर्गोत्तम नहीं होना चाहिए।
  • यदि जन्म नक्षत्र से सातवें, बारहवें, सत्रहवें, बाईसवें या सत्ताईसवें नक्षत्र में सूर्य हो तो भी विवाह तय होकर टूट जाता है।
  • जानिए तलाक क्यों होता हें
  • यदि कुंडली मांगलीक होगी तो विवाह होकर भी तलाक हो जाता है, किन्तु ध्यान रहे किसी भी हालत में सप्तमेश को वर्गोत्तम नहीं होना चाहिए।
  • दूसरे भाव का स्वामी यदि नीचस्थ लग्नेश के साथ मंगल अथवा शनि से देखा जाता होगा तो तलाक हो जाएगा। किन्तु मंगल अथवा शनि को लग्नेश अथवा द्वितीयेश नहीं होना चाहिए।
  • यदि जन्म कुंडली का सप्तमेश सप्तमांश कुंडली का अष्टमेश हो अथवा जन्म कुंडली का अष्टमेश सप्तमांश कुंडली का लग्नेश हो एवं दोनों कुंडली में लग्नेश एवं सप्तमेश अपने से आठवें घर के स्वामी से देखे जाते हो तो तलाक निश्चित होगा।
  • यदि पत्नी का जन्म नक्षत्र ध्रुव संज्ञक हो एवं पति का चर संज्ञक तो तलाक हो जाता है, किन्तु किसी का भी मृदु संज्ञक नक्षत्र नहीं होना चाहिए।
  • यदि अकेला राहू सातवें भाव में तथा अकेला शनि पांचवें भाव में बैठा हो तो तलाक हो जाता है. किन्तु ऐसी अवस्था में शनि को लग्नेश नहीं होना चाहिए. या लग्न में उच्च का गुरु नहीं होना चाहिए।

 

हिमाचल अभी अभी की मोबाइल एप अपडेट करने के लिए यहां क्लिक करें

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

RELATED NEWS

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

राशिफल

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है