श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन करवाना क्यों हैं आवश्यक

सभी पकवान पितरों की पसंद के होने चाहिए

श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन करवाना क्यों हैं आवश्यक

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धर्म ग्रंथों के अनुसार ब्राह्मणों के साथ वायु रूप में पितृ भी भोजन करते हैं।मान्यता है कि ब्राह्मणों द्वारा किया गया भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है। श्राद्ध में ब्राह्मणों को भोजन करवाना एक जरूरी परंपरा है।


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  • पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के बाद ब्राह्मण भोज कराने का विधान बताया गया है। हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक, श्राद्ध वाले दिन पितृ लोग खुद ब्राह्मण वेष धारण कर भोजन ग्रहण करते हैं। इसलिए श्राद्धकर्म कराने वाले हर व्यक्ति को ब्राह्मण भोज अवश्य कराना चाहिए।
  • श्राद्ध कर्म करने वाले संबंधित व्यक्ति को ब्राह्मण भोज के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
  • श्राद्ध के निमित्त भोजन में खीर पूरी अनिवार्य है। जौ, मटर और सरसों का उपयोग श्रेष्ठ माना गया है। पकवान पितरों की पसंद के होने चाहिए।
    गंगाजल, दूध, शहद, कुश और तिल सबसे ज्यादा ज़रूरी है।
    तिल ज़्यादा होने से उसका फल अक्षय होता है। तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं।


श्राद्ध के भोजन में क्या न बनाएं या परोसेः चना, मसूर, उड़द, कुलथी, सत्तू, मूली, काला जीरा-कचनार, खीरा, काला उड़द, काला नमक, लौकी, प्याज और लहसन -बड़ी सरसों, काले सरसों की पत्ती और बासी, खराब अन्न, फल और मेवे

  • ब्राह्मणों को रेशमी, ऊनी, लकड़ी, कुश जैसे आसन पर भी बैठाएं।
    लोहे के आसन पर ब्राह्मणों को कभी न बैठाएं। मान्यता है कि ब्राह्मणों को भोजन करवाए बिना श्राद्ध कर्म अधूरा माना जाता है। इसलिए विद्वान ब्राह्मणों को पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ भोजन कराने पर पितृ भी तृप्त होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
  • भोजन करवाने के बाद ब्राह्मणों को घर के द्वार तक पूरे सम्मान के साथ विदा करना चाहिए क्योंकि कहते हैं ब्राह्मणों के साथ-साथ पितृ भी चलते हैं।
  • श्राद्ध तिथि पर सबसे पहले ब्राह्मणों को आमंत्रित करें।
  • उन्हें दक्षिण दिशा में ही बैंठाएं, क्योंकि दक्षिण दिशा में ही पितर लोग वास करते हैं। हाथ में अक्षत, फूल, जल और तिल लेकर संकल्प कराएं। गाय, कुत्ते, चींटी तथा देवगण को भोजन अर्पित करने के बाद ही ब्राह्मणों को भोजन कराएं।

  • ब्राह्मण देवता को दोनों हाथों से ही भोजन परोसें, एक हाथ से परोसा भोजन पितर को नहीं मिलता है। बिना ब्राह्मण भोज के पितर श्राप देकर अपने लोक को लौट जाते हैं। भोजन कराने के बाद ब्राह्मणों को कपड़े, अनाज और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें।इतना ही नहीं ब्राह्मण भोज के पश्चात उन्हें उनके द्वार तक छोड़ें।
    ब्राह्मण भोज के बाद खुद तथा अपने रिश्तेदारों को भी भोजन जरूर कराएं।
  • पितृ पक्ष में अगर कोई भिक्षा मांगे तो उसे आदर के साथ भोजन कराएं। कुत्ते और कौए का भोजन, कुत्ते और कौए को ही खिलाएं। दामाद, भांजे और बहन को भोजन कराए बिना पितर भी भोजन नहीं करते हैं।
  • श्राद्ध के दिन यदि कोई तपस्वी ब्राह्मण, अतिथि या साधु-सन्यासी घर पर पधारें तो उन्हें भी भोजन कराना चाहिए। श्राद्धकर्त्ता को घर पर आये हुए ब्राह्मणों के चरण धोने चाहिए। फिर अपने हाथ धोकर उन्हें आचमन करना चाहिए। तत्पश्चात उन्हें आसनों पर बैठाकर भोजन कराना चाहिए।
  • पितरों के निमित्त अयुग्म अर्थात एक, तीन, पांच, सात इत्यादि की संख्या में तथा देवताओं के निमित्त युग्म अर्थात दो, चार, छः, आठ आदि की संख्या में ब्राह्मणों को भोजन कराने की व्यवस्था करनी चाहिए। देवताओं एवं पितरों दोनों के निमित्त एक-एक ब्राह्मण को भोजन कराने का भी विधान है।

पंडित दयानंद शास्त्री, उज्जैन (म.प्र.) (ज्योतिष-वास्तु सलाहगाड़ी) 09669290067, 09039390067

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