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86 के हुए दलाई लामा, चीन मानता है अलगाववादी , लेकिन भारत में वो 62 साल से रह रहे

जन्मदिन पर किसी भी प्रकार के भव्य समारोहों का आयोजन नहीं

86 के हुए दलाई लामा, चीन मानता है अलगाववादी , लेकिन भारत में वो 62 साल से रह रहे

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मैक्लोडगंज। वह तिब्बतियों के धर्मप्रमुख ही नहीं, विश्व शांति के दूत भी हैं। आधी सदी से ज्यादा समय से वह निर्वासन में हैं। बेशक वह चीनक वह चीन की आंखों में खटकते हैं लेकिन उनका व्यक्तित्व ऐसा है कि सामने पड़ जाएं तो मन में असीम श्रद्धा व सम्मान की भावना उमड़ने लगती है। जी हां, बात हो रही है दलाई लामा की जिनका छह जुलाई को 86 वां जन्मदिन (86th Birthday) है। खास बात यह है कि 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो (Tenjin Gyatso), महामहिम होने का मतलब लंबे समय बाद समझ पाए थे। तेनजिन ग्यात्सो को जिस समय दलाई लामा (Dalai Lama) के तौर पर मान्यता मिली थी,उस वक्त वे मात्र दो वर्ष के थे। कुंबुम मठ (Kumbum Math) में अभिषेक के बाद उन्हें माता-पिता का ज्यादा साथ नहीं मिल पाया। कारण सीधा था ल्हासा से दस किमी दूर उतर-पूर्वी दिशा में पैदा हुआ दो वर्षीय बालक लहामो चेढप दलाई लामा बन चुका था। उसकी शिक्षा-दीक्षा उसी अनुरूप होनी थी। महामहिम ने स्वयं एक किताब में लिखा है कि एक छोटे बच्चे के लिए मां-बाप से इस तरह अलग रहना सचमुच बहुत कठिन होता है। उस वक्त तो उन्हें यह भी पता नहीं था कि दलाई लामा होने का मतलब क्या है। उन्हें सिर्फ यही पता था कि मैं दूसरे कई छोटे बच्चों की तरह एक छोटा बच्चा था। बचपन में उन्हें एक खास शौक था कि वह एक झोले में कुछ चीजें डालकर उन्हें कंधे पर लटका लेते थे व ऐसा नाटक करते थे कि कि एक लंबी यात्रा पर जा रहे हैं। अकसर कहा करते थे कि वे ल्हासा जा रहे हैं। दलाई लामा खाने की मेज पर हमेशा जिद करते थे कि मुझे सबसे प्रमुख स्थान पर बिठाया जाए।

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15 वें साल में राजनीतिक जिम्मेदारियों का निर्वाह

दलाई लामा केवल 15 वर्ष के थे तो उन्होंने अपनी सरकार के वरिष्ठ होने के नाते राजनीतिक जिम्मेदारियों का निर्वाह शुरू कर दिया था। वर्ष 1954 में महामहिम चीनी नेताओं से बातचीत करने चीन की राजधानी बीजिंग गए,जब चीन (China)
तिब्बत के बारे में असहयोगपूर्ण रवैया अपनाए हुए था। वर्ष 1956 में वे महात्मा बुद्ध की 2500वीं वर्षगांठ पर भारत आए व तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से तिब्बत (Tibet) की दुर्दशा पर लंबी बातचीत की। अंततः तिब्बत में चीन सरकार के बढ़ते आतंक से उत्पन्न खतरे को भांपकर उन्हें 1959 में तिब्बत छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। याद रहे कि चीन दलाई लामा को अलगाववादी मानता है, लेकिन भारत में वो 62 साल से रह रहे हैं।


अलग अनुभव होगा इस मर्तबा भी

धर्मगुरू दलाई लामा के 86 वें जन्मदिन (86th birthday) पर किसी भी प्रकार के भव्य समारोहों का आयोजन नहीं किया जाएगा। बड़ी संख्या में लोगों का एक जगह इकट्ठा होना कोरोना वायरस (Coronavirus) के इस दौर में किसी खतरे से कम नहीं है। धर्मगुरू का जन्मदिन कैलेंडर वर्ष में तिब्बतियों और उनके दूसरे अनुयायियों के लिए सबसे खास दिनों में से एक है। यह तिब्बतियों के लिए एक आधिकारिक अवकाश का दिन होता है और वे दुनिया भर में ग्रेंड सेलिब्रेशन का आयोजन करते हैं। लेकिन इस बार भी बीते वर्ष की तरह दलाई लामा का जन्मदिन उनके अनुयायियों के लिए एक अलग अनुभव होगा।

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