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दलित शोषण मुक्ति मंच का सवाल – #Kangana को इंसाफ दिलाना है तो दलित की बेटियों को भी दिलाएं

अपने हक के लिए Vidhansabha के बाहर गरजा दलित शोषण मुक्ति मंच

दलित शोषण मुक्ति मंच का सवाल – #Kangana को इंसाफ दिलाना है तो दलित की बेटियों को भी दिलाएं

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शिमला। दलित शोषण मुक्ति मंच ने अपनी मांगों को लेकर आज हिमाचल विधानसभा (Himachal Vidhansabha) का घेराव किया। मंच के कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में विधानसभा के बाहर पहुंच कर अपने हक की आवाज उठाई और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मंच के सयोजक जगत राम ने कहा कि सीएम जयराम ठाकुर कंगना रनौत को हिमाचल की बेटी मानते हैं, यह अच्छी-अच्छी बात है पर दलितों की बेटियां क्या हिमाचल की बेटियां नहीं है। अगर कंगना को इंसाफ दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं तो दलितों की बेटियों को भी इंसाफ मिलना चाहिए। करसोग में बिमला देवी की हत्या हुई है उसके परिवार को आज तक न्याय (Justice) नहीं मिला। इससे साबित होता है कि सरकार केवल पैसे वालों को ही हिमाचल की बेटियां मानती है गरीब को नहीं। सरकार के सामने दलित शोषण मुक्ति मंच की ओर से 14 मांगें रखी गई हैं, अगर सरकार इन मांगों को नहीं मानती है तो आने वाले समय में पूरे प्रदेश में धरने प्रदर्शन किए जाएंगे।


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मंच के संयोजक ने कहा कि शिलाई निवासी केदार सिंह जिंदान हत्या मामले में वर्तमान सरकार ने उनके परिवार को मिलने वाली पेंशन तक बंद कर दी है। ऐसे कई मामले हैं जहां पर दलितों को इंसाफ नहीं मिल पाता। मंच के संयोजक का कहना है कि सरकारी, अर्द्धसरकारी, स्थाई नौकरियों का स्वरूप बदला जा रहा है। सरकार द्वारा पार्ट टाइम, अनुबंध, ठेके पर, आउटसोर्स स्कीम व पंचायत स्तर पर अलग-अलग रूप में भर्तियां की जा रही है। इन भर्तियों में आरक्षण (Reservation) लागू नहीं किया जाता। प्रदेश में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति के लोगों की लगातार हत्या, उनपर हमले व छुआछूत, सामाजिक भेदभाव की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। लिहाजा अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून को सख्ती से लागू करने की जरूरत है पर ऐसा नहीं हो रहा है।

 

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