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Good News-चंबा रूमाल से सजेगी Delhi में Himachal की झांकी

Good News-चंबा रूमाल से सजेगी Delhi में Himachal की झांकी

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शिमला। गणंतत्र दिवस में राजपथ पर तीन साल बाद हिमाचल प्रदेश की झांकी फिर नजर आएगी। इस बार हिमाचल की झांकी का इस अहम मौके के लिए चयन हो गया है। पिछले तीन वर्षों से लगातार इस पहाड़ी प्रदेश की झांकी को राष्ट्रीय स्तरीय न होने के कारण रिजेक्ट किया जाता रहा है। इस बार चंबा रूमाल को झांकी के लिए चुना गया है। पिछली बार 2013 में राजपथ पर हिमाचल की झांकी देखने को मिली थी।


  • गणतंत्र दिवस परेड के लिए हुआ चयन
  • 3 साल बाद परेड में दिखेगी हिमाचली झलक

उसके बाद जो भी मॉडल पेश किए गए थे, उन्हें मंजूरी नहीं मिली थी। रक्षा मंत्रालय ने इस झांकी के लिए हिमाचल से भेजे गए चंबा रुमाल के मॉडल को मंजूरी दे दी है। यह गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर लोगों को अपनी ओर आर्कषित करेगी। इस साल परेड में देश के विभिन्न राज्यों के विकास व ऐतिहासिक धरोहरों की कहानी बयान करती झांकियों में हिमाचल की संस्कृति की भी झलक दिखेगी। जहां तक चंबा रूमाल के इतिहास की बात है, यह सैकड़ों वर्ष पूरे कर चुका है। बताते हैं कि 18वीं सदी में चंबा रूमाल का काम पूरे जोर पर था। राजा उमेद सिंह ने चंबा रूमाल बनाने वाले कारीगरों को संरक्षण दिया था। सैकड़ों साल से चल रहे रूमाल बनाने का कार्य चंबा में हो रहा है। जर्मनी व इग्लैंड के संग्रहालयों में भी चंबा रुमाल अपनी शोभा बढ़ रहा है।  ब्रिटिश राज में और उसके बाद से लेकर आजकल भी चबा रूमाल को उपहार में दिया जा रहा है।

पू्र्व में रियासतकाल में भी एक राजा अपने सहयोगी राजाओं को चंबा रूमाल उपहार में देते थे। वर्ष 1911 में दिल्ली दरबार में चंबा के राजा भूरी सिंह ने ब्रिटेन के राजा को चंबा रुमाल की कलाकृतियां तोहफे में दी थीं। चंबा रूमाल को देश-विदेश में पहचान दिलाने वाली चंबा जिला की कमला चड्ढा, ललिता, सराज बेगम व महेश्वरी देवी को कई पुरस्कार मिल चुके हैं। अब तो चंबा रूमाल को इतना प्रोत्साहन मिल रहा है कि आनलाइन भी इसकी बिक्री हो रही है। अब इस बार राजपथ पर चंबा रूमाल अपनी छाप छोड़ेगा और वहां के लिए झांकी को तैयार किया जा रहा है।

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