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विपक्ष के विरोध के बीच लोकतंत्र प्रहरी सम्मान विधेयक 2021 विधानसभा में पारित

विपक्ष ने विधेयक को लोकतंत्र प्रहरी नाम देने पर जताई आपत्ति

विपक्ष के विरोध के बीच लोकतंत्र प्रहरी सम्मान विधेयक 2021 विधानसभा में पारित

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शिमला। विपक्ष के विरोध के बावजूद हिमाचल प्रदेश लोकतंत्र प्रहरी सम्मान विधेयक 2021 (Himachal Democracy Sentinel Honor Bill 2021) को पारित कर दिया गया है। सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) ने सदन में आज ऐसे लोकतंत्र प्रहरियों, जिन्हें 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के आपातकालीन के दौरान राजनीतिक और सामाजिक कारणों से आंतरिक सुरक्षा अधिनियम 1971 (1971 का 26) निरसित, भारत रक्षा नियम 1971 (निरसित) और दंड प्रक्रिया संहित 1973 के उपबन्धों के अधीन जेल या पुलिस थानों में निरूद्ध किया गया था, को सम्मान राशि, प्रसुविधाएं और उससे संबंधित विषयों का उपबन्ध करने के लिए विधेयक विचार के लिए रखा और विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव भी रखा।

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विपक्ष की तरफ से सुखविंदर सुक्खू (Sukhwinder Sukhu) ने इस पर आपत्ति जाहिर की और कहा कि इसको लोकतंत्र प्रहरी नाम देना गलत है, जिन लोगों ने आपातकाल में तोड़फोड़ को बसें जलाईं, उनको लोकतंत्र प्रहरी कहना गलत है। इसकी परिभाषा ही गलत है। सीएम बताएं कि किस नियम के तहत यह कानून लाया है। एक पार्टी के कार्यकर्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए यह बिल लाया गया है, जिसमें कितनी राशि किसको देनी है, इसका भी जिक्र नहीं है। इसलिए कानून बनाने से पहले इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजा जाए। इसका नाम बदलने की जरूरत है। पत्रकारों व आरटीआई एक्टिविस्ट (RTI Activist) को भी इसमें शामिल किया जाए। यदि ऐसा नहीं किया जाएगा तो विपक्ष के पास न्यायालय में जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि आपातकाल (Emergency) के दौरान बोलने की आजादी तक छीन ली गई। कई लोगों को जेल में डाल दिया गया। अन्य तीन राज्यों में ये कानून पास किया गया है। उस वक़्त आरटीआई एक्टिविस्ट नहीं थे, हां जो पत्रकार उस वक़्त जेल में गए उनको भी उसमें शामिल किया जाएगा। लोकतंत्र के सम्मान में जो लोग 15 दिन जेल में रहे उनको 8 हजार व इससे ज़्यादा जेल में रहने वालों को 12 हजार प्रति माह देने का फैसला लिया गया है। सिर्फ 81 लोग इसमें शामिल हैं। विपक्ष के विरोध के बावजूद बिल को पारित कर दिया गया।

 

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