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10 वर्षों के बाद Mandi आए सुकेत रियासत के देव माहूंनाग

10 वर्षों के बाद Mandi आए सुकेत रियासत के देव माहूंनाग

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dev-mahunang: मंडी। सुंदरनगर उपमंडल की ओड़की के देव माहूंनाग 10 वर्षों के बाद मंडी पहुंचे। देवता के आगमन से सैंकड़ों लोगों को उनके दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बता दें कि श्री देव माहूंनाग सुकेत रियासत के देवता हैं, जो बिना निमंत्रण के कभी मंडी रियासत नहीं आए। इस बार भी देवता निमंत्रण पर ही यहां आए हुए हैं।

dev-mahunang: राजाओं के जमाने की बंदिशों का आज भी दिखता है असर

हालांकि राजाओं का दौर समाप्त हुए कई सदियां बीत चुकी हैं लेकिन राजाओं की रियासतों की झलक आज भी देखने को मिल ही जाती है। कभी मंडी और सुंदरनगर (सुकेत) दो अलग-अगल रियासतें हुआ करती थीं और यहां के राजाओं की आपस में कभी नहीं बनी। यहां तक कि इन दोनों रियासतों के लोगों के बीच भी कभी आपसी रिश्ते नहीं बन पाए। दोनों रियासतों के देवी-देवता कभी अपनी रियासत की सीमाएं नहीं लांघते थे।


लेकिन जब देश आजाद हुआ तो इन दोनों रियासतों को मिलाकर मंडी जिला बना। उसके बाद ही इन रियासतों के लोगों का आपस में तालमेल होने लगा। लेकिन आज भी इन रियासतों के देवी-देवताओं में पुरानी कसक देखने को मिल ही जाती है। चाहे मंडी का अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव हो या फिर सुंदरनगर का राज्यस्तरीय देवता मेला। कभी एक रियासत का देवता दूसरी रियासत में नहीं जाता।

बिना निमंत्रण के सुकेत रियासत के देवता नहीं आते मंडी

अब इतना जरूर हो गया है कि अगर किसी दूसरी रियासत का भक्त देवता को अपने घर निमंत्रण पर बुलाए तो देवता चले जाते हैं, लेकिन यह आगमन तभी होता है जब निमंत्रण मिला है, अन्यथा जाना संभव ही नहीं। देवता कमेटी के सह सचिव सोहन लाल ने बताया कि बिना निमंत्रण के देवता नहीं जाते, केवल निमंत्रण पर ही आते हैं।

सुंदरनगर से पैदल ही पहुंचे मंडी

आज सुकेत रियासत को सुंदरनगर उपमंडल के रूप में जाना जाता है। यहां के ओड़की गांव के श्री देव माहूंनाग दस वर्षों के बाद मंडी आए हुए हैं। सुंदरनगर से देवता की यात्रा पैदल ही चली और मंडी पहुंची। देवता के रथ को उठाने के लिए एक समय में चार लोगों की जरूरत होती है और यह रथ तभी उठाया जा सकता है जब उठाने वाला नंगे पांव हो। यही कारण है कि देवता के साथ रथ उठाने के लिए चलने वाले लोग नंगे पांव ही अपनी यात्रा तय करते हैं। फिर चाहे वह यात्रा 10 किलोमीटर की हो या फिर 100 किलोमीटर की।

देवता कमेटी के सह सचिव सोहन लाल के अनुसार देवता के रथ को कभी गाड़ी पर नहीं ले जाया जाता। श्री देव माहूंनाग के प्रति लोगों की सच्ची और अटूट आस्था है। यही कारण है कि देवता के भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर उन्हें अपने घर बुलाना नहीं भूलते। देवता दो दिनों के मंडी प्रवास पर हैं जिसके बाद वह फिर से अपने गंतव्य की ओर लौट जाएंगे।

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