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हिमाचल में यहां पुलिस नहीं, देवता करते हैं ट्रैफिक कंट्रोल-जानिए कारण

हिमाचल में यहां पुलिस नहीं, देवता करते हैं ट्रैफिक कंट्रोल-जानिए कारण

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कुल्लू। आज तक हमने पुलिस को भीड़ नियंत्रण करते हुए देखा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव (International Dussehra Festival) देवमहाकुंभ में सैकड़ों की संख्या में देवी देवताओं व हजारों की भीड़ को नियंत्रण करने के लिए देवता नाग धूम्बल हलाणा 2 अहम भूमिका निभाते हैं। दशहरा उत्सव में रथयात्रा में ट्रैफिक का सारा कंट्रोल (Traffic Control) देवता नाग धूम्बल संभालते हैं। उन्हें ट्रैफिक इंचार्ज की संज्ञा भी दी गई है। दशहरे का आरंभ हो या फिर समापन, जब भी भगवान रघुनाथ के रथ के सामने लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है तो यह देवता स्वयं भगवान रघुनाथ के लिए रास्ता बनाते हैं और लोगों की भीड़ को दूर करते हैं। यह परंपरा आज भी देखने को मिलती है। देवता के कारदार और पुजारी ने बताया कि जब दशहरे के दौरान काफी भीड़ होती है और जब पुलिस के जवान भी लोगों की भीड़ को हटाने में असमर्थ रहते हैं तो यह देवता अपनी पूरी शक्ति के साथ भीड़ को हटाकर भगवान रघुनाथ व स्वयं के लिए रास्ता बनाता है।


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देवता के कारकून गुप्त राम ने बताया कि देवता नाग धूम्बल दशहरा उत्सव में भीड़ को कंट्रोल करने में अहम भूमिका अदा करते हैं। यह देवता सात दिनों तक ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ के सहयोग के लिए रहते हैं और दशहरा के समापन में लंका दहन के दिन भी देवता पूरी तरह से ट्रैफिक कंट्रोल करते हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति मंदिर के आसपास गंदगी फैलाता है तो यह देव रथ अपने आप ही अपने स्थान से चलने लगता है, इस कारण इस देव रथ को बांध कर भी रखा जाता था।

अब जब से देवता के लिए नए आसन की व्यवस्था की गई है, तबसे उन्होंने देवता के रथ को बांधना छोड़ दिया है। हालांकि अभी भी कई बार देवता का रथ अपने स्थान से स्वयं चलने लगता है। देवता के गुर गुप्त राम ने बताया कि काफी समय से वह भी यह देखते आए हैं कि जहां पर काफी भीड़ होती है वहां पर जाकर यह देवता उस भीड़ को हटाते हैं। उन्होंने बताया कि देवता के रथ में इतनी शक्ति है कि अगर देवता की इच्छा के बगैर कोई धार्मिक कार्य किया जाता है तो देवता का रथ स्वयं जमीन पर चलने लगता है।

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