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मंदिर में विराजमान होंगे हजार पहाड़ियों के राजा ‘शैटीनाग’

मंदिर में विराजमान होंगे हजार पहाड़ियों के राजा ‘शैटीनाग’

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सीएम वीरभद्र सिंह करेंगे प्रतिष्ठा समारोह में शिरकत

devta shetinag: मंडी। सराज क्षेत्र के आराध्य देवता शैटीनाग करीब दो सौ साल बाद अपने नए मंदिर में विराजमान होंगे। शैटाधार में भव्य मंदिर का निर्माण करीब चार साल के अथक परिश्रम के बाद अंतिम चरण में पहुंच गया है। हजार पहाड़ियों के राजा देवता शैटीनाग चार-पांच जून को आयोजित होने वाले भव्य प्रतिष्ठा समारोह में दो करोड़ से अधिक की लागत से पहाड़ी शैली में बने अपने नए मंदिर में विराजेंगे।


सराज क्षेत्र के हजारों लोगों व देवताओं की अगुवाई में होने वाले इस नए मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह में प्रदेश के सीएम वीरभद्र सिंह भी शिरकत करेंगे। सीएम ने प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। वीरभद्र सिंह के आगमन की सूचना मिलने पर देवता कमेटी व स्थानीय प्रशासन प्रतिष्ठा समारोह को और भव्य बनाने में जुट गए हैं।


2 करोड़ की लागत से तैयार हुआ मंदिर

देवता शैटीनाग जनपद के प्राचीनतम देवताओं में से एक हैं और मंडी शिवरात्रि मेले में माधवराय मंदिर परिसर में उनके साथ विराजते हैं। शैटाधार में देवता शैटीनाग का मंदिर लगभग दो करोड़ रुपए की लागत से पांच साल में बनकर तैयार हुआ है। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष लुदरमणी ने बताया कि मंदिर निर्माण के लिए देवता के कारकूनों ने अपनी ऐच्छिक निधि से पैसा दिया और श्रमदान भी किया है। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण में लगभग एक दर्जन मिस्त्री लगातार डटे रहे। वह निर्माण के दौरान एक समय में ही फलाहार लेते थे।

इसके अलावा मंदिर निर्माण में बडा देव मतलोड़ा, भुजा ऋषि, ब्रहम देव तुंगासी, कालाकामेश्वर और जुहलू नाग के हरियानों ने भी अपना योगदान दिया। ग्राम पंचायत बूंग जहलगाड, ग्राम पंचायत चिउणी, ग्राम पंचायत  घाट, ग्राम पंचायत थाटा, ग्राम पंचायत खलवाहण, ग्राम पंचायत थाचाधार ग्राम पंचायत बहलीधार, ग्राम पंचायत शिवा थाना समेत लगभग एक दर्जन पंचायतों के लोगों ने मंदिर निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। बूंग जहलगाड पंचायत के प्रधान महेंद्र राणा ने बताया कि सभी पंचायतों के लोगों ने निस्वार्थ मंदिर निर्माण के लिए अपना योगदान दिया है।

devta shetinag: देवताओं को बल देते हैं शैटीनाग

देवता की उत्पति के बारे में कोई लिखित प्रमाण नहीं है, लेकिन फिर भी देवता की उत्पति के बारे में अनेक किंवंदंतियां है। पौराणिक मान्यता के अनुसार शैटीनाग देवता मूल रूप से अश्वनी कुमार हैं तो देवताओं को बल प्रदान करते हैं। महादेव ने इसी गुण के कारण शैटी नाग को हजार पहाड़ियों का राजा घोषित कर रखा है। देव-राक्षसों के यु़द्ध में जब देवता क्षीण होते थे तो तब वह अश्वनी कुमार के पास बल प्राप्त करने के लिए आते थे। मूल मंदिर से लगभग ती सौ मीटर दूर एक प्राचीन शिला स्थित है जिसे जोगी पाथर कहा जाता है।

देवता के कारदार हिम्मत राम के अनुसार सराज क्षेत्र में जब भी कोई देवता नए रथ पर विराजमान होता है तो उसे जोगी पाथर में आकर बल प्राप्त करना होता है। जोगी पाथर में देवता को बल प्रदान करने की प्रक्रिया में शिला के ऊपर ठंडे पानी का लोटा रखा जाता है और जब तक ठंडे पानी में उबाल नहीं आ जाता तब तक रथ को देवता की उपाधि नहीं मिलती।

उन्होंने बताया कि एक अन्य बहुप्रचलित मान्यता के अनुसार बूढ़ी नागिन ने कुल नौ नागों को जन्म दिया था। नाग माता स्त्री के वेष में जब दिन के समय काम के सिलसिले में बाहर जाती थीं तो अपने नाग पुत्रों को एक घडे़ में डाल देती थी ताकि कोई देख न लें। बूढी नागिन ने अपने सेवकों को भी यह हिदायत दे रखी थी कि उस कमरे में कोई न जाए। एक दिन जब नाग माता वहां मौजूद नहीं थी तो कौतूहलवश एक सेविका ने कमरे में प्रवेश किया मगर उसे कुछ न मिला। अंत में उसकी नजर उस बडे़ टोकरे पर पड़ी जो कमरे में रखा हुआ था। दासी ने टोकरे का ढक्कन हटाया तो उसमें उसे नाग ही नाग दिखाई दिए।

दासी ने सोचा कि इन नागों ने नाग माता के पुत्र को खा लिया है और अब मुझे नाग माता के कोप का भाजन बनना पडे़गा। सेविका ने उसी क्षण नागों को भगाने के लिए टोकरे में गर्म राख उड़ेल दी। नाग अपनी जान बचाकर चारों दिशाओं में भाग खडे़ हुए जिसे जहां स्थान मिला वह वहां छुप गया। देवता शैटीनाग एक पहाड़ी की चोटी में लकड़ी के छिलकों जिन्हें पहाड़ी भाषा में शैटी कहते हैं उनके बीच छुप गए। कालांतर जब वह शैटीनाग के नाम से अवतरित हुए और उस पहाड़ी का नाम शैटाधार पड़ा। शेष अन्य नाग भी आजकल देवता की उपाधि लिए हैं और उनको विभिन्न स्थानों में पूजा जाता है।

सीएम के आगमन की सभी तैयारियां पूरी

मिल्कफेडरेशन के अध्यक्ष चेतराम ठाकुर ने बताया कि सीएम वीरभद्र सिंह ने देवता के कारिंदों का प्रतिष्ठा समारोह में आने का न्योता स्वीकार कर लिया है और वह पांच जून को प्रतिष्ठा समारोह में बतौर मुख्यातिथि शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि सीएम हेलीकॉप्टर से शैटाधार तक आएंगे। इसके लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। चेतराम ठाकुर ने बताया कि सीएम के दौरे से सराज क्षेत्र के पर्यटन को पंख लगेंगे।न्होंने बताया कि शैटाधार को थाटा-घन्यार व चिउणी की ओर सड़क मार्ग के द्वारा जोड़ दिया गया है। यह सड़क सराज को आपस में जोड़ती है। इसके बनने से जंजैहली से बालीचैकी की दूरी आधे से भी कम रह जाएगी। \

पीला वस्त्र चढ़ाने से दूर होगी बाधा

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