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धनतेरस पर ऐसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न

धनतेरस पर ऐसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न

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प्रकाश पर्व दीपावली के दो दिन पूर्व कार्तिक मास के कृष्णह पक्ष की त्रयोदशी को पूरे देश में ‘धनतेरस’ मनाने की पुरानी परंपरा है, लोगों का मानना है कि समुद्र मंथन के अंतिम दिन भगवान विष्णु कलश में अमृत लेकर ‘धनवंतरि’ के अवतार में प्रकट हुए थे। भगवान धनवंतरि की पूजा से लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर ‘धन वर्षा’ करती हैं। किंवदंती है कि देवताओं और राक्षसों के बीच हुए युद्ध विराम के समझौते के बाद जब समुद्र मंथन किया गया था, तब समुद्र से चौदह रत्न निकले थे। जिनमें एक रत्न अमृत भी था।

dhan6भगवान विष्णु देवताओं को अमर करने के लिए ‘धनवंतरि’ के अवतार में प्रकट होकर कलश में अमृत लेकर समुद्र से निकले थे। इस दिन धनवंतरि की पूजा करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर धन वर्षा करती हैं। इस दिन जहां भगवान धनवंतरि के प्रकटोत्सव को कार्तिक मास के कृष्णव पक्ष की त्रयोदशी को ‘धनतेरस’ के रूप में मनाने की सदियों पुरानी परंपरा है, वहीं धनतेरस को अमीर और गरीब वर्ग के लोगों के बीच धातु की कोई वस्तु खरीदने का भी रिवाज है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तु अत्यधिक फलदायक होती है। मान्यता है कि ‘भगवान विष्णु ही भगवान ‘धनवंतरि’ के रूप में प्रकट हुए थे, इस दिन ‘धनवन्तरि’ की पूजा करने से व्यापारी वर्ग के अलावा गृहस्थ जीवन बिता रहे लोगों को भी लाभ होता है।’ दीक्षित पूजा-अर्चना के बारे कहते हैं कि ‘त्रयोदश की सुबह स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख कर भगवान धनवंतरि की मूर्ति या चित्र की स्थापना करनी चाहिए, तत्पश्चात मंत्रोच्चारण करना चाहिए और आचमन के लिए जल छोड़ना चाहिए।’

dhan2पूजन विधि :

प्रातः स्नान आदि दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तत्पश्चात पूजन स्थल पर भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यह स्थान ऐसा हो कि आपका मुख पूर्व दिशा की ओर रहे। यह सूर्य देव की दिशा है जो जीवन के लिए शक्ति देते हैं। इसके पश्चात इस मंत्र के साथ भगवान धन्वंतरि का आह्वान करना चाहिए-
सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं, अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य। गूढं निगूढं औषध्यरूपम्, धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।
भगवान धन्वंतरि को चावल, रोली, पुष्प, गंध, जल चढ़ाएं और भोग अर्पित करें। संभव हो तो खीर का भोग लगाएं। इस पौराणिक मंत्र से भी भगवान धन्वंतरि शीघ्र प्रसन्न होते हैं
-ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:। अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय। त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप। श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥

रोगनाश के लिए यह मंत्र बोलकर भगवान से प्रार्थना करें :

ऊं रं रूद्र रोग नाशाय धनवंतर्ये फट्।
पूजन में फल, दक्षिणा आदि चढ़ाने के बाद धूप, दीप और कपूर प्रज्वलित कर भगवान की आरती करें।

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