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लक्ष्य से भटकी नगर निगम की महत्वाकांक्षी लक्ष्य योजना

लक्ष्य से भटकी नगर निगम की महत्वाकांक्षी लक्ष्य योजना

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Dharamshala Nagar Nigam : धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला में कुछ समय पूर्व शुरू की गई लक्ष्य योजना अपने निर्धारित लक्ष्य से भटकती नजर आ रही है। इस योजना के तहत न तो लोगों को निर्धारित पूरा वर्ष काम मिल रहा है और न ही लोगों को तय दिहाड़ी दी जा रही है। जनवादी महिला समिति ब्लॉक धर्मशाला व किसान सभा धर्मशाला ने इस योजना में खामियों को लेकर नगर निगम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इन दोनों संगठनों की मांग है कि जिन पंचायतों को नगर निगम में विलय हुआ है, उनमें कई लोग मनरेगा जॉब कार्ड धारक हैं।

  • लोगों का आरोप नहीं मिल रहा काम और न ही मिल रही तय दिहाड़ी
  • नगर निगम में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों के मनरेगा मजदूरों के लिए थी योजना

इन लोगों ने बताया कि नगर निगम में विलय के दौरान इन लोगों को आश्वासन दिया गया था कि सभी जॉब कार्ड धारकों को पूरे वर्ष काम और 300 रुपए दिहाड़ी दी जाएगी। इन लोगों ने बताया कि लक्ष्य योजना के तहत इनका पंजीकरण किया गया, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद इस योजना के तहत कुछ ही जॉब कार्ड धारकों को काम मिल रहा है और दिहाड़ी भी 170 रुपए मिल रही है।


वहीं, कई जॉब कार्ड धारक ऐसे हैं, जिन्हें काम ही नहीं मिला है। जनवादी महिला समिति और हिमाचल किसान सभा ने मांग की है कि सभी वार्डों के जॉब कार्ड धारकों को वादे के मुताबिक पूरा वर्ष काम दिया जाए और 300 रुपए दिहाड़ी दी जाए। इस दौरान जनवादी महिला समिति की अध्यक्ष विमला देवी, किसान सभा अध्यक्ष जगदीश जग्गी, सचिव धनवीर सिंह, चीनो देवी, तृपत देवी, सलोचना, विमला, चंचला, अनिता, कंचन, सरोज, उर्मिला, पुष्पा देवी सहित अन्य महिलाएं शामिल थी।

गौरतलब है कि नगर निगम धर्मशाला में शामिल हुई पंचायतों के लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से लाल बहादुर शास्त्री कामगार एवं शहरी आजीविका योजना (लक्ष्य) के लिए पंजीकरण शुरू किया गया था। पंजीकरण की यह प्रक्रिया सितंबर 2016 में शुरू की गई थी।  इस योजना से उन लोगों को लाभ मिलना था जो पंचायतों में मनरेगा के तहत काम कर रहे थे, लेकिन नगर निगम में पंचायतों के शामिल होने के बाद उनसे मनरेगा के तहत रोजगार छिन गया था। मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जहां 120 दिन का रोजगार दिया जाता था, वहीं उन्हें अब इस लक्ष्य योजना के 265 दिन का रोजगार प्राप्त होना था। यही नहीं, लक्ष्य योजना के तहत स्वीकृत बजट खर्च का अनुपात भी मनरेगा की अपेक्षा अधिक रहने के दावे किए गए थे यानी 70 फीसदी बजट लेबर पर व 30 फीसदी बजट निर्माण सामग्री पर व्यय करने का प्रावधान होगा, जबकि मनरेगा में बजट खर्च करने का अनुपात 60:40 का है।

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