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[email protected] Election: प्रदेश सरकार को सत्ता में रहने का कोई हक नहीं

Dhumal@MC Election: प्रदेश सरकार को सत्ता में रहने का कोई हक नहीं

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Dhumal Attack : शिमला। पूर्व सीएम व नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने नगर निगम शिमला के चुनावों को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए प्रदेश कांग्रेस सरकार के मुंह पर करारा तमाचा करार दिया है और कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश सरकार के निर्णय को असंवैधानिक व गलत ठहराए जाने के पश्चात प्रदेश कांग्रेस सरकार सत्ता में बने रहने का अधिकार खो चुकी है। इसी के साथ कांग्रेस और कॉम्युनिस्टों के हाथों कठपुतली बनकर गलत निर्णय देने वाले चुनाव आयुक्त को भी उनके पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए।

चुनाव आयुक्त को भी पद से बर्खास्त करने की मांग

उच्च न्यायालय के इस फैसले ने न केवल कांग्रेस और माक्र्सवादियों के षड्यंत्र को बेनकाब किया है, बल्कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की भी रक्षा की है। न्यायालय का यह फैसला निश्चितरूप से ऐतिहासिक व सराहनीय है। धूमल ने कहा कि वर्तमान सरकार में न तो शासकीय पारदर्शिता है और न ही आर्थिक पारदर्शिता, प्रदेश में केवल जंगल राज है।


कांग्रेस संवैधानिक प्रावधानों की उड़ा रही धज्जियां  

जब से कांग्रेस सत्ता में आई है, संवैधानिक प्रावधानों की लगातार धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसका नवीनतम  उदाहरण प्रदेश सरकार का नगर निगम चुनाव टालने का फैसला था। प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए न केवल सरकार के फैसले को ही अवैध ठहरा दिया है बल्कि 18 जून से पहले नगर निगम शिमला के चुनाव करवाने के आदेश पारित करके कांग्रेस सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। न्यायालय के इस निर्णय के पश्चात सरकार सत्ता में रहने का हक खो चुकी है। ऐसे में सरकार को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिए। धूमल ने कहा कि वर्तमान नगर निगम का कार्यकाल 5 जून को खत्म हो रहा है। ऐसे में इस तिथि के पश्चात नगर निगम शिमला के शासकीय प्रबंधन को कौन देखेगा ? सरकार के पास न तो पहले इसका जवाब था और न अब है।

बीजेपी के सत्ता में आने पर करेगी दोषियों की जवाबदेही तय

धूमल ने चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार की कठपुतली बनकर गलत निर्णय लेने वाले चुनाव आयुक्त को भी न्यायालय के इस फैसले के पश्चात से अब अपने पद पर बने रहने का कोई हक नहीं रह गया है। उन्हें तुरंत अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए अथवा तत्काल प्रभाव से उन्हें पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए। इसी के साथ चुनाव प्रक्रिया से जुड़े उन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए जिनकी लापरवाही से यह संवैधानिक संकट खड़ा हुआ है। बीजेपी के सत्ता में आने पर न केवल दोषी व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जाएगी, बल्कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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