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धूमल वारः अब Tea Gardens को बेचने की फिराक में वीरभद्र Govt

धूमल वारः अब Tea Gardens को बेचने की फिराक में वीरभद्र Govt

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Tea Garden : हमीरपुर। चुन-चुन कर प्रदेश सरकार पर हमला कर रहे नेता विपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने अबकी बार कांगड़ा चाय को लेकर वीरभद्र सिंह को खरी-खरी सुनाई है। नेता प्रतिपक्ष कहना है कि गत विधानसभा चुनावों से पूर्व कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि कांगड़ा चाय की प्रतिष्ठा को बहाल करने के लिए संपूर्ण चाय नवीनीकरण परियोजना शुरू की जाएगी। चार वर्षों के कार्यकाल में कांगड़ा चाय उद्योग का पुर्नउत्थान तो दूर की बात है, प्रदेश कांग्रेस सरकार हैरिटेज कांगड़ा चाय का अस्तित्व ही खत्म करने पर तुल गई है। नेता विपक्ष ने कहा कि पुख्ता सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार प्रदेश सिलिंग ऑन लैंड होल्डिंग एक्ट, 1972 में संशोधन का एक प्रस्ताव कैबिनेट में ला रही है, जिसके मुताबिक अब प्रदेश में चाय के बगीचों को बेचा जा सकेगा। कांगड़ा चाय के अस्तित्व व भोले भाले बागवानों को बाहरी लोगों से संरक्षण देने की दृष्टि से बनाए गए कानून में संशोधन सरकार की नीयत पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है। भू-माफियाओं और बिल्डिरों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा हैरिटेज कांगड़ा चाय के अस्तित्व को ही खत्म करने का षड़यंत्र रचा जा रहा है। 

राजस्व नियमों में किया बार-बार संशोधन

धूमल ने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक, ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दृष्टि से राजस्व नियम इस प्रकार बनाए गए थे कि कोई भी बाहरी व्यक्ति प्रदेश की भोली भाली जनता को गुमराह करके उनकी जमीने न हथिया सके, लेकिन कांग्रेस सरकार ने समय-समय पर राजस्व नियमों विशेषकर धारा 118 में (पांच बार से अधिक) संशोधन किए, जिससे चंद लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाया जा सके। नीहित स्वार्थ के लिए कांग्रेस सरकार लैंड सिलिंग एक्ट में संशोधन करने का जो प्रयास कर रही है उसके दूरगामी परिणाम होंगे। धूमल ने कहा कि प्रदेश के चाय बागानों को देखने के लिए दुनियाभर से पर्यटक कांगड़ा आते हैं। अपनी तरह की विशिष्ट चाय को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक टी बोर्ड की स्थापना भी प्रदेश में कर दी है, लेकिन प्रदेश सरकार चाय उद्योग को संरक्षण देने के लिए कंकरीट के जंगल खड़ा करने में विश्वास रखती है। सरकार के इस कदम से न केवल हैरिटेज चाय का अस्तित्व खत्म हो जाएगा, बल्कि कांगड़ा के पर्यटन उद्योग को भी गहरा धक्का पहुंचेगा। बीजेपी सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध करेगी और भविष्य में इस तरह के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

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