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‘करुणा’ के आधार पर विश्व समस्याओं से कैसे निपटें, दलाई लामा और कैलाश सत्यार्थी के बीच चर्चा 

‘करुणा’ के आधार पर विश्व समस्याओं से कैसे निपटें, दलाई लामा और कैलाश सत्यार्थी के बीच चर्चा 

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मैक्लोडगंज। तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा (Tibetan religious leader Dalai Lama) और नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी (Nobel Peace Laureate Kailash Satyarthi) के बीच आज मैक्लोडगंज में 2 घंटे चर्चा हुई। सुबह 9 से 11 बजे तक हुई चर्चा का उद्देश्य विश्व शांति रहा। दोनों के बीच हुई इस चर्चा को एक पुस्तक का रूप दिया जाएगा। जिसे ‘करुणा’ नाम से प्रकाशित किया जाना है। इसके लिए उन्होंने एक औथर की मदद ली है। जो रोजाना लगातार तीन दिनों तक उन दोनों के बीच होने वाली चर्चा को सुनेगा और उसके आधार पर किताब लिखेगा।


बता दें कि दलाई लामा इस तरह का परयोग पहले भी ‘जॉय’ नामक एक किताब लिखकर कर चुके हैं। ‘करुणा’ नामक इस किताब के लिए तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा और कैलाश सत्यार्थी के बीच रोज 2 घंटे 9 से 11 बजे तक चर्चा होगी।

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बता दें कि दलाई लामा भी नोबेल पुरस्कार विजेता (Dalai Lama also won Nobel Peace Prize) हैं, वे कई किताबे लिख चुके हैं। अब ये दो नोबेल पुरस्कार विजेता मिलकर कुछ ऐसा करने की सोच रहे हैं जिससे मानवता का भला हो। इसी सिलसिले में वर्ष 2014 में नोबेल पुरस्कार पाने वाले कैलाश सत्यार्थी यहां आए हैं। कैलाश सत्यार्थी ने वर्ष 1980 में बचपन बचाओ आन्दोलन (Bachpan Bachao Andolan) की शुरुआत की थी। ये देश के भीतर एक क्रांतिकारी आन्दोलन है, जो बच्चो के हित और अधिकारों के लिए कार्य करता है।

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बाल मजदूरी कुप्रथा भारत में सैंकड़ो साल से चली आ रही है, कैलाश सत्यार्थी ने इन बच्चों को इस अभिशाप से मुक्ति दिलाना ही अपनी जिन्दगी का मकसद बना लिया है। मध्यप्रदेश के विदिशा में जन्में कैलाश सत्यार्थी बचपन से ही दूसरो के प्रति बेहद सहयोगी रहे है, जब वे केवल 11 साल के थे तब उन्होंने महसूस किया कि बहुत से बच्चे किताब न होने के कारण पढ़ाई से वंचित रह जाते है इसलिए उन्होंने एक ठेला लिया और निकल पड़े कबाड़ी की तरह पुरानी किताबे इकट्ठा करने, ताकि उन्हें गरीब बच्चों में बांटा जा सके। कैलाश सत्यार्थी बचपन से ही संतोष और आत्मिक शान्ति से पेट भरने में विश्वास करते रहे हैं।

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