Covid-19 Update

1,35,782
मामले (हिमाचल)
99,400
मरीज ठीक हुए
1925
मौत
22,992,517
मामले (भारत)
159,607,702
मामले (दुनिया)
×

आचार्य की क्लास : जल बचाने के संकल्प के साथ जिम्मेदारी भी समझे

आचार्य की क्लास : जल बचाने के संकल्प के साथ जिम्मेदारी भी समझे

- Advertisement -

Discussion on water conservation shimla : शिमला। पानी को बचाने के लिए हमें इसका महत्व समझना होगा और इसे बचाने के लिए संकल्प के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारी को भी समझना होगा। राजभवन में जल संवर्धन पर चर्चा के दौरान राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से विश्व में बहुत बड़ा जल संकट पैदा होगा। उन्होंने नशा और ड्रग के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई और कहा कि नशे को खत्म करने के लिए हर नागरिक को तैयार रहना होगा। उन्होंने कृषि को बढ़ाने के लिए जल संरक्षण जरुरी है और साथ ही एक स्वस्थ जीवन के लिए रासायनिक खादों से छुटकारा पाना होगा।


Discussion on water conservation shimla : राजभवन में जल संवर्धन पर चर्चा के दौरान राज्यपाल का सुझाव

इसके लिए जैविक खेती को बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह खेती किसानों के लिए एक जीरो बजट खेती है। उन्होंने कहा कि आज वैज्ञानिक और अधिकारियों को इन विषयों पर सोचने और इच्छा शक्ति के साथ काम करने की जरुरत है और आने वाले भविष्य में स्वस्थ समाज बनाने की जरुरत है। उन्होंने ने कहा कि प्राकृतिक स्त्रोतों का संवर्धन और परापंरागत तरीकों को बचाना जरूरी है।

यह भी पढ़ें : राम मंदिर मामले को कोर्ट के बाहर सुलझाएं: SC, 31 मार्च तक का दिया समय

राज्यपाल की क्लास में सभी अधिकारी, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालयों के कुलपति और विशेषज्ञ शामिल हुए और सभी शांतिपूर्ण तरीके से सुनते रहे। मैग्सेसे अवार्ड विजेता जल संवर्धन विशेषज्ञ डॉ राजेंद्र सिंह ने यहां पर सभी उपस्थित लोगों को जल संवर्धन के तरीके बताए। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य में चैक डैम के माध्यम से जल संवर्धन किया जा सकता है। मिट्टी और जल हिमाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इंजीनिरिंग और टेक्नोलॉजी ने सिविल सोसायटी को लोकल कम्युनिटी द्वारा संचालित कार्यों को कांट्रेक्टर संचालित में बदल दिया है और जल संवर्धन की जगह जल स्त्रोत घटने एवं मात्रा कम करने के परिणाम निकले हैं। राजिंद्र सिंह ने अपील की है कि सभी को मिलकर जल संवर्धन के लिए कार्य करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि परंपरागत तरीके से ही आज के युग में प्राकृतिक स्त्रोतों का संवर्धन किया जा सकता है।

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है