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शुभ दीपावलीः प्रकाश पर्व में अंधेरे का होगा नाश 

शुभ दीपावलीः प्रकाश पर्व में अंधेरे का होगा नाश 

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दीपावली प्रकाश पर्व है। जहां प्रकाश होता है वहां से अंधकार चला जाता है और वहां धन-संपदा वास करती है। सभी शुभ होता है, शत्रुओं का विनाश तो निश्चित ही है। कहा भी गया है …
शुभं करोतु कल्याणमारोग्य धनसंपदा। शत्रु बुद्धिविनाशाय दीपज्योर्तिनमोस्तुते।।
वैसे तो दीपावली का दिन मुख्य है, किन्तु सभी बातों के संयोग से पांच पर्वों का यह महापर्व कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी यानी धनतेरस से शुरू होकर नरक चौदश, दीपावली, गौवर्धन पूजा व भैया दूज इन पांच दिन तक देश के कोने-कोने में धूमधाम से मनाया जाता है। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) को यमराज को दीप दान करना चाहिए। इस दिन सोने चांदी के आभूषण व बर्तन खरीदने का भी प्रचलन है। व्यापारी वर्ग इस दिन बही-खाते की पूजा करते हैं। कार्तिक कृष्ण अमावस्या को दीपावली एवं लक्ष्मी मां की पूजा करने के विधान को महालक्ष्मी पूजा कहा जाता है। इस दिन श्री गणेश, सरस्वती और कुबेरादि की पूजा करनी चाहिए।
दीपावली से पूर्व घरों प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, रोशनी और सजावट आदि की जाती है। घर-आगंन में रंगोली बनाई जाती है। शुभ मुर्हूत, गोद्दूली बेला अथवा स्थिर लग्न, प्रदोश काल में लक्ष्मी पूजा का कार्य प्रारंभ करना चाहिए। दुकानों व घरों में फूल माला द्वार पर लगानी चाहिए। एक दीपक शुद्ध देसी घी का पूरी रात भर घर में पूजा स्थान पर जलाना चाहिए। लक्ष्मी जी को अष्टदल कमल बना कर विराजित करना चाहिए। षोडशोपचार से श्रद्धा-भक्ति पूर्वक सपरिवार लक्ष्मी जी की पूजा करनी चाहिए। ऊं चपालायै चंचलायै, कमलायै, कात्यादिन्यै, जगन्मात्रै, विष्वल्लभायै, कमलवासिन्यै, प.मकमलायै और श्रियै नमः का उच्चारण कर क्रमषः पाद, जानु, कमर, नाभि, वक्षःस्थल, भुजाओ, नेत्रों और सिर की पूजा करनी चाहिए।
दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी के सम्मुख श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त तथा लक्ष्मी स्तत्रादि का पाठ, जप भजन कर लक्ष्मी जी को प्रसन्न करना चाहिए। इसी रात्रि में जागरण कर लक्ष्मी जी के शयन का, घर में ही उत्तम पूजन पूर्वक, प्रबन्ध किया जाना चाहिए ताकि वह क्षीर सागर न जा कर घरों में ही विराजित रहे, जहां लक्ष्मी की पूजा हो वहां घंटा नहीं बजना चाहिए और लक्ष्मी जी को कांचन और पुष्प नहीं चढ़ाने चाहिए। श्री लक्ष्मी पूजा के लिए स्थिर लग्न, प्रदोश काल, निशीथ काल और महानिशीथ काल होना बहुत अच्छा होता है। इस काल में मां लक्ष्मी का पूजन करना स्वास्थ्य में सुधार, धन वृद्धि, आर्थिक उन्नति तथा बुद्धि विवेक में वृद्धि करता है।

कब-कब करें मां लक्ष्मी की पूजा

दुकान आदि के लिए पूजा का मुर्हूत सायं 05:48 से 07:25 तक ठीक है। इसमें बही खाते का नवीनीकरण किया जा सकता है। गृहस्थों के लिए सबसे उत्तम समय शाम 08:22 से 10:56 तक होगा। इस शुभ मुर्हूत में मां लक्ष्मी का पूजन करके आदी लक्ष्मी, धान्या लक्ष्मी, धैर्या लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, सन्तान लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, धन लक्ष्मी व विद्या लक्ष्मी की अनुकम्पा प्राप्त कर सकते हैं। इसमें स्थिर लग्न वृष, प्रदोष काल तथा शुभ चौघड़ियां का संयोग होना अतिश्रेष्ठ है। रात्रि 11:22 से आधी रात्रि 03:45 तक महानिशीथ काल होगा। इसमें जप अनुष्ठान करना श्री लक्ष्मी, महाषक्ति काली उपासना, यन्त्र तन्त्र तथा तान्त्रिक अनुष्ठान एवं साधनाएं की जाती हैं।
कैप्टन डॉ. लेखराज शर्मा, एमए, पीएचडी, ज्योतिषाचार्य (स्वर्ण पदक)
शारदा ज्योतिष निकेतन, जोगिन्द्रनगर 

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