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दीपावली पर करें लक्ष्मी-गणेश की उपासना

दीपावली पर करें लक्ष्मी-गणेश की उपासना

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दीपावली श्री अर्थात लक्ष्मी का प्रतीक है। कहते हैं लक्ष्मी के सहस्र चरण हैं पर वह अंधेरे में नहीं आ पाती। वह केवल प्रकाश में अपना रास्ता तय करती है। इसलिए इस महानिशा में असंख्य दीप जला कर लक्ष्मी का आह्वान किया जाता है। ऐसे में लक्ष्मी अंधकार के प्रतीक उल्लू को अपनी सवारी बनाकर आलोक रश्मियों के रथ पर सवार हो कर आती है। वास्तव में लक्ष्मी महादेवी का एक रूप है और वह अनेक रूपों में धरती पर आती है। 

diwali_deepak_thaliभारत के बहुत से भागों में यह पर्व नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। नए वर्ष के रूप में मनाए जाने का कारण यह है कि इसी दिन महाराजा विक्रमादित्य का राज्याभिषेक हुआ था और इसी की स्मृति में विक्रमी संवत चला था। महाराष्ट्र, मालवा और गुजरात आदि प्रांतों में इसी रूप की विशेष मान्यता है। रंगोली इस दिन का विशेष आकर्षण है। यह पंचदिवसीय पर्व अपने साथ ढेरों खुशियां लेकर आता है। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से आरंभ हो कर कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक चलने वाला दीपावली का पर्व इहलोक के साथ पारलौकिक सुखों को भी प्रदान करता है। इसके प्रत्येक दिन का अलग-अलग महत्व है और इसलिए इन्हें अलग नामों से पुकारा जाता है।

Lamp of Diwali

लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा

धर्म शास्त्रों की मान्यताओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी के पास किसी चीज की कोई कमी नहीं है, लेकिन व्यक्ति देवी की आराधना से मिली धन-दौलत का सही इस्तेमाल करे, इसके लिए उसे बुद्धि चाहिए। श्रीगणेश बुद्धि के देवता हैं यही वजह है कि देवी लक्ष्मी के साथ उनकी भी पूजा की जाती है।श्रीगणेश को सभी देवी-देवताओं में सबसे ज्यादा बुद्धिमान माना गया है। उनकी सबसे पहले पूजा भी होती है। यह जरूरी नहीं कि पूजा के लिए चांदी या सोने की ही मूर्ति का इस्तेमाल किया जाए। मिट्टी की मूर्ति को सबसे शुद्ध माना जाता है इसलिए लोग ज्यादातर मिट्टी की मूर्तियां ही लेना पसंद करते हैं। इसके अलावा पत्थर की मूर्तियां भी इस्तेमाल की जा सकती हैं। पूजा के बाद मिट्टी की मूर्ति को विसर्जित कर देना चाहिए। चांदी की गणेश-लक्ष्मी मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा करा ली जाती है, तो उसे बदला नहीं जाता। यदि कोई बड़ी मूर्ति लेना भी चाहते हैं तो उसे घर के दूसरे स्थान पर रख सकता है।

diwali_candle_png_clip_art_imageकैसे करें लक्ष्मी पूजा

दीपावली लक्ष्मी उपासना का पर्व है तथा इसे धन-धान्य, सुख-संपदा के लिए सर्वोत्तम माना गया है। जरूरी यह भी है कि लक्ष्मी गणेश जी की प्रतिमाओं के साथ कुबेर प्रतिमा या चित्र की भी स्थापना करें। कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं ,वे आपके भी धन की रक्षा करेंगे और इस तरह अनायास होने वाला धन का खर्च बचा रहेगा। भगवती लक्ष्मी साक्षात नारायणी हैं और सभी चल व अचल में सामान्य रूप से निवास करती हैं। भगवान गणेश शुभ और लाभ के नियामक तथा सभी अमंगलों और विघ्नों के नाशक हैं। अत: इनके एक साथ पूजन से मनुष्य मात्र का कल्याण होता है। इनका विधि विधान से पूजन करें और सामग्री पहले ही एकत्र कर लें।

सामग्री-लक्ष्मी व गणेश जी तथा कुबेर की मूर्तियां,सोने अथवा चांदी का सिक्का, कलश, स्वच्छ कपड़ा, चौकी, धूप-अगरबत्ती, मिट्टी के छोटे- बड़े दीपक,सरसों का तेल, शुद्ध घी,दूध -दही ,शुद्धजल और गंगा जल। हल्दी, रोली, चंदन, कलावा, लाल कपड़ा, कपूर, नारियल, पान के पत्ते, चीनी के खिलौने, खील, सूखे मेवे, मिठाई, छोटी इलायची, कुमकुम, वंदनवार और फूल।

diwali-clipart-diwali-celebration-kids-clipart-3विधि- दीपावली के दिन सुंदर सा वंदनवार अपने मुख्य द्वार पर लगाएं। चौकी धो कर साफ करें , उस पर लाल कपड़ा बिछा कर लक्ष्मी व गणेश तथा कुबेर की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में हो। लक्ष्मी जी की मूर्ति गणेश जी की दाहिनी ओर रखें। कलश को जल से भरें, उसमें सिक्का डाल कर मौली बांधें और लक्ष्मी जी के सामने चावलों की ढेरी पर स्थापित करें। नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर कलश पर स्थापित करें। कलश वरुण का प्रतीक है इस लिए मन ही मन वरुण का आवाहन करें। अब दो बड़े दीपक रखें ,एक में तेल और एक में घी भरें। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें और दूसरा घी वाला दीपक मूर्तियों के चरणों में रखें। एक और दीपक गणेश जी के सामने रखें। प्रतिमाओं तथा चांदी के सिक्कों की विधिवत पूजा कर सिंदूर ,कुंकुम एवं अक्षत से चर्चित करें। पुष्पों और पुष्प मालाओं से अलंकृत करें। हो सके तो इस पूजा में कमल पुष्पों का प्रयोग करें। नैवेद्य में लाल मिठाई तथा मेवे चढ़ाएं। इसके बाद दीपमालिका का पूजन करें। किसी पात्र में 11,21 या इससे अधिक दीपक जला कर लक्ष्मी के सामने रखें और उनका पूजन करें। इसके बाद सभी दीपकों को जला कर घर के हर स्थान पर रखें। ध्यान रखें लक्ष्मी पूजन करते समय हाथ नहीं जोडऩा चाहिए यह विदा देने की रस्म है इसलिए मन में ही नमन करें और कहें कि आपका तथा कुबेर जी का हमेशा हमारे घर में स्थिर निवास बना रहे। लक्ष्मी पूजा के समय घर के हर सदस्य को पूजा स्थल पर मौजूद होना चाहिए और हर व्यक्ति लक्ष्मी जी की आरती करे व गाए यह भी जरूरी है। यदि इस प्रकार पूजा संपन्न करेंगे तो निश्चय ही लक्ष्मी का आपके घर में स्थायी निवास होगा।

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