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महाशिवरात्रि विशेष : भगवान शिव को भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें वरना सफल नहीं होगी पूजा

महाशिवरात्रि विशेष : भगवान शिव को भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें वरना सफल नहीं होगी पूजा

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सोमवार भगवान शिव का दिन माना जाता है और इस बार महाशिवरात्रि भी सोमवार के दिन ही है, जिससे इसका महत्व काफी बढ़ गया है। जिन युवक-युवतियों के विवाह में अड़चनें आ रही है वे इस महाशिवरात्रि शिवलिंग पर गंगाजल से अभिषेक करेंगे तो उनकी बाधाएं दूर जाएंगी। इस बार महाशिवरात्रि सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। इसके अलावा इस बार महाशिवरात्रि का पर्व शिव योग में हो रहा है।

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भगवान
शिव की साधना के लिए महाशिवरात्रि का दिन बहुत उत्तम माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की साधना-आराधना करने से जीवन और ग्रहों से संबंधी तमाम दोषों का निवारण होता है। महाशिवरात्रि के दिन भक्त शिवजी को खुश करने के लिए शिवलिंग पर कई चीजें अर्पित करते हैं, लेकिन कई बार भूलवश ऐसी चीजें भी चढ़ाने लगते हैं, जिसे शास्त्रों में वर्जित माना जाता है। हम आपको ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल आप शिव पूजा में भूलकर भी न करें …


शिव उपासना में शंख का इस्तेमाल वर्जित माना जाता है। दरअसल भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था, जो भगवान विष्णु का भक्त था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है इसलिए शिवजी की पूजा में कभी भी शंख नहीं बजाना चाहिए।

तुलसी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है और सभी शुभ कार्यों में इसका प्रयोग होता है, लेकिन तुलसी को भगवान शिव पर चढ़ाना मना है। भूलवश लोग भोलेनाथ की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल करते हैं जिस वजह से उनकी पूजा पूर्ण नहीं होती।

तिल को शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं अर्पित किया जाना चाहिए।

भगवान शिव को अक्षत यानी साबूत चावल अर्पित किए जाने के बारे में शास्त्रों में लिखा है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिव जी को नही चढ़ता।

कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक होता है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं इसलिए शिव जी को कुमकुम नहीं चढ़ना चाहिए, साथ ही शिवलिंग पर हल्दी भी न चढ़ाएं।

कभी भी शिवलिंग पर नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए। नारियल देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है जिनका संबंध भगवान विष्णु से है इसलिए शिव जी को नहीं चढ़ता।

 

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