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स्वप्न एक स्वाभाविक घटना

स्वप्न एक स्वाभाविक घटना

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चंद अनजाने चेहरे, दु:ख और भय के नाद या कुछ धुंधले संकेत मन की परतों से निकल कर स्वप्न बनकर छा जाते हैं। कहते हैं कि बंद पलकों के पीछे एक मायावी दुनिया बसती है, जो किसी मृगमरीचिका से कम नहीं है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में आध्यात्मिक विश्लेषण मिलता है जो कहता है कि स्वप्न की क्रिया आत्मा से जुड़ी है। स्वप्न एक स्वाभाविक घटना है और लगभग हर व्यक्ति स्वप्न देखता है। हां, जागने के 5 मिनट के भीतर ही कुछ लोग आधे सपनों को भूल जाते हैं और 10 मिनट के भीतर लगभग 90% सपनों को।


कई लोगों का मानना है कि सपनों का कुछ न कुछ अर्थ होता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, हर सपना कुछ न कुछ कहता है। एक अध्ययन के अनुसार, 74 फीसदी भारतीय, 65 फीसदी कोरियाई और 56 फीसदी अमेरिकी मानते हैं कि सपने हमारे अचेतन मस्तिष्क के अंग हैं। ऐसा मानना है कि मानव शरीर के अंदर दो प्रकार की स्थितियां होती हैं, चेतन और अवचेतन मन। चेतन मन का संबंध बाहरी दृश्य एवं परिवेश से होता है, वहीं आंतरिक मन का पूर्व जन्म से संबंध होता है।

भारत के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन को स्वप्न ने राह दिखाई थी। एक बार वे पाई के फॉर्मूले में अटक गए, समझ नहीं आ रहा था कि इस समीकरण को कैसे हल करें। रात में जब वे गहरी नींद में थे, तभी सपने में उन्हे देवी नामक्कल के दर्शन हुए। बहते खून की लाल रंग की स्क्रीन दिखी। एक हाथ उभरा, जिसने स्क्रीन पर लिखना शुरू किया। ये तो वही समीकरण था, जिसमें वे उलझे हुए थे, देखते ही देखते हाथ ने जवाब भी निकाल दिया। रामानुज नींद में भी उसे समझते रहे फिर जाग कर उसे कागज पर उतार लिया। इस तरह उन्होंने गणित को नई प्रमेय दी। सपनों के रहस्य को जानने के लिए लगातार शोध हो रहा है, लेकिन गुत्थियां सुलझ नहीं पा रहीं। विज्ञान तक के लिए स्पन्न एक पहेली है। प्राचीन समय में तो सपनों के जरिए इलाज भी होता था, जिसे ड्रीम थैरेपी कहा जाता था। सपने द्वारा जब भविष्य के प्रति सचेत करने की बात की जाती है। सपनों के कई उदाहरण हैं जो लोगों को अनिष्ट की घटना से आगाह कर चुके हैं।

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