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जातीय भेदभाव मामलाः बच्चों के बयान दर्ज करने स्कूल पहुंचे डीएसपी व एसएचओ

जातीय भेदभाव मामलाः बच्चों के बयान दर्ज करने स्कूल पहुंचे डीएसपी व एसएचओ

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जंजैहली/ मंडी। सिराज विधानसभा क्षेत्र की उपतहसील बालीचौकी के तहत प्राथमिक पाठशाला नौणा में अनुसूचित जाति के बच्चों के साथ मिड डे मील के दौरान हुए भेदभाव के मामले की जांच के लिए डीएसपी अनिल पटियाल व एसएचओ ललित महंत स्कूल पहुंचे। वहां पर वे बच्चों के बयान दर्ज करेंगे। जाहिर है इस मामले का वीडियो वायरल होने के बाद एसपी मंडी गुरदेव शर्मा ने एक अभिभावक की शिकायत पर एससी एसटी एक्ट के तहत औट पुलिस थाना में मामला दर्ज करने के देश दिए थे ,साथ ही डीएसपी अनिल पटियाल मामले की छानबीन करने के कहा था।


जाहिर है कि स्कूल में सामान्य वर्ग व अनुसूचित जाति के बच्चों को अलग- अलग लाइन में बिटाकर खाना परेसा जा रहा था, जिसके संबंध में एक अभिभावक ने शिकायत की थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि गगन कुमार के अनुसार उसका बेटा उक्त स्कूल में पढ़ रहा है। जिसने स्कूल में छुआछूत संबंधी पूरी घटना के बारे में उन्हें बताया है। गगन ने बताया कि वह सोमवार को अपने गांव के दूसरे व्यक्ति के साथ स्कूल का निरीक्षण करने को गए थे। जहां उन्होंने मिड डे मील के दौरान एक वीडियो बनाया। मिड डे मिल के दौरानं बच्चों को अलग-अलग बिठाया गया था। उन्होंने बताया कि जब वे और उनके सहयोगी स्कूल में पहुंचे तो सामान्य वर्ग के बच्चों को खाना परोसा जा रहा था और अनुसूचित जाति के बच्चे दूसरी लाइन में बिठाए गए थे। इसी दौरान उन्होंने वीडियो बनाते समय पाठशाला की मुख्य अध्यापिका और अन्य अध्यापिका से इस मामले संबंधी बात की। मगर अध्यापिका ने इस मामले पर गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि अध्यापिका उन्हें रोल नंबरवाइज बिठाने को कह रही थी। जबकि यह काम स्कूल के अध्यापकों का होना चाहिए। जब मुख्य अध्यापिका को मालूम हुआ कि वीडियो बन रहा है तो उसने जल्दी से बच्चों को रोल नंबर के आधार पर बिठाने के लिए खड़ा कर दिया। जिसके बाद अध्यापिका वीडियो में कह रही है कि जिसने खिचड़ी खानी है खाओ, जिसने नहीं खानी है ना खाओ। अभिभावक ने एसपी मंडी को एक शिकायत पत्र भेजा और कार्रवाई की मांग की है।

मानवाधिकार संगठन के सदस्य एवं कोली सभा जिला मंडी के अध्यक्ष एलआर चौहान ने इस सारे प्रकरण की कड़ी निंदा की है। उन्होंनेबताया कि पिछले कई साल से उन्होंने मंडी में इस तरह बच्चों के साथ भेदभाव के मामले देखे हैं, जिनके आधार पर कई मामले भी दर्ज हुए मगर पुलिस की तरफ से तथ्य पर आधारित तथा पीड़ित पक्ष को विश्वास में लेकर जांच बहुत कम होती है जिससे अनुसूचित जाति से संबंधित ऐसे मामले कमजोर पड़ जाते हैं और बाद में पीड़ित पक्ष को समझौता करने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने बताया कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने दिसंबर 2014 में ही हिमाचल प्रदेश में मिड डे मील की व्यवस्था को लेकर रोल नंबर वाइज बिठाने का प्रस्ताव पारित कर दिया था मगर आज तक बहुत सारे स्कूलों में सुचारू ढंग से लागू नहीं किया गया है, जिसके लिए शिक्षा भाग ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों में होने वाले इस तरह के भेदभाव को जड़ से खत्म करने के लिए एक अभियान चलाया जाए ।

 

 

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