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लकड़ी की कमीः लटक सकता है शानन परियोजना की ट्रॉली का काम

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जोगिंद्रनगर। लकड़ी का सही साइज न मिलने के कारण शानन परियोजना की टॉली की बहाली का काम लटक सकता है। दरअसल वन विकास निगम की ओर से शानन प्रोजेक्ट के प्रबंधन को अपेक्षित साइज की इमारती लकड़ी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिस कारण शानन से विंच कैंप तक करीब 4 किलोमीटर लंबे ट्रॉली-ट्रैक का ही काम पूरा होता नहीं दिख रहा है, जबकि बरोट तक पहुंचना तो इन हालातों में काफी दूर लगता है।

शानन से 18 नंबर तक ही डेढ़ हजार से अधिक स्लिपरों की आवश्यकता है, जबकि वहां से विंच कैंप तक अढ़ाई किलोमीटर के ट्रॉली-ट्रैक के लिए भी 3 हजार से ज्यादा स्लिपर लग सकते हैं। विंच कैंप तक ही अगर इस ट्रॉली को सुरक्षित तौर पर चलाना हो तो परियोजना प्रबंधन को साढ़े चार-पांच हजार स्लीपरों की आवश्यकता रहेगी, जबकि आज की तारीख में तो मरम्मत के लिए भी स्लिपर नहीं मिल पा रहे हैं।

गल- सड़ चुके हैं स्लीपर, चल रहे जुगाड़ से

अधिकांश स्लीपर बुरी तरह गल-सड़ चुके हैं और उनके नीचे लकड़ी के टुकड़े या पत्थर आदि डालकर जुगाड़ किया जा रहा है। इस ट्रॉली के माध्यम से परियोजना में काम करने वाले अधिकारी-कर्मचारी सफर करते हैं या फिर कोई पर्यटक भी दुनिया की दूसरी ट्रॉली का आनंद लेने यहां आते हैं। हजारों खस्ताहाल स्लीपरों को बदलने के उपरांत ही इस ट्रॉली को सुरक्षित माना जा सकता है, जिसके लिए करोड़ों रुपए व्यय होंगे। वन विकास निगम मंडी के मंडलीय प्रबंधक अश्वनी शर्मा ने बताया कि निगम के पास परियोजना द्वारा अपेक्षित साइज नहीं होता। उनके पास 10 फीट का साइज उपलब्ध होता है। वन निगम के धनोटू स्थित बिक्री केंद्र से परियोजना के अधिकारी संपर्क साध सकते हैं।

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