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कांगड़ा की एक पंचायत, जहां जिंदगी नहीं सेफ, कई गवां चुके हैं जान

कांगड़ा की एक पंचायत, जहां जिंदगी नहीं सेफ, कई गवां चुके हैं जान

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धर्मशाला। आज हम बात करेंगे कांगड़ा जिला की एक पंचायत की। जहां पर जिंदगी सेफ नहीं दिखती है। इसका कारण दूषित पानी है। दूषित पानी पीने से किडनी फेल या फिर डायरिया जैसे संक्रमित रोगों से कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं। यह हम नहीं कह रहे बल्कि पंचायत के बाशिंदों का ही कहना है। नगर निगम का डंपिंग यार्ड सुधेड़ गांव के ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। सुधेड़ की समस्या को लेकर शाहपुर की सियासत भी गर्म हो गई है।
अब इस मामले में कांग्रेस के नेता केवल सिंह पठानिया भी कूद चुके हैं। सुधेड़ की समस्या को लेकर केवल सिंह पठानिया ने शाहपुर से विधायक एवं शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी को निशाने पर लेते हुए कहा कि स्थानीय विधायक के पास जिस मंत्रालय का जिम्मा है, वह उसे लेकर अपने खुद के विधानसभा क्षेत्र में पूरी तरह से लागू नहीं करा पा रही हैं। केवल सिंह पठानिया का आरोप है कि सुधेड़ गांव आज एक जंक यार्ड बन चुका है। लेकिन, स्थानीय विधायक का बीते एक साल बाद भी इस ओर ध्यान नहीं गया है। जबकि इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय शिमला ने भी शु मोटो लगा दिया है। केवल सिंह पठानिया व सुधेड़ निवासियों ने डीसी कांगड़ा संदीप कुमार को उनका वादा याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने एक माह पूर्व सौंपे ज्ञापन पर कहा था कि जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी पर एक माह बीत जाने के बाद भी कोई काम नहीं हुआ। गांव की प्रधान ने बताया कि हिमाचल पथ परिवहन निगम वर्कशॉप के समीप जो कूड़ा कर्कट फेंका जाता है, उसमें धर्मशाला स्मार्ट सिटी के अंतर्गत जो वार्ड आते हैं, वहां से कूड़ा कर्कट सहित मरे हुए पशुओं को भी इस डंपिंग यार्ड में लाकर फेंक दिया जाता है, जिसका दुष्परिणाम सुधेड़ वासियों को भुगतना पड़ रहा है।
इस डंपिंग साइट में फैली गंदगी के कारण पूरे गांव में बदबू फैली रहती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है, जिस कारण टीबी जैसी गंभीर बीमारी के फैलने का अंदेशा बना रहता है। प्रधान ने बताया कि काफी साल पहले सुधेड़ पंचायत के किसी भी प्रतिनिधि की सहमति के बिना सुधेड़ पंचायत में एचआरटीसी वर्कशाप के समीप बायो बेस्ट प्लांट लगाया गया था। इस बायो डंपिंग यार्ड को चलाने के लिए कोई सुचारू नीति भी निगम द्वारा नहीं बनाई गई है। भारी बारिश होने से गंदा पानी गांव के घरों में जा रहा है। साथ ही प्राकृतिक जल स्त्रोतों में भी मिल जाता है, जिससे गांव के स्थानीय लोग इस दूषित पानी को सेवन कर रहे हैं, जिस कारण कई लोग जवान अवस्था में ही किडनी फेल या फिर डायरिया जैसे संक्रमित रोगों से अपनी जान गवां चुके हैं।

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