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अब Eco Task Force भगाएगी बंदर

अब Eco Task Force भगाएगी बंदर

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Eco Task Force : शिमला। सीएम वीरभद्र सिंह ने वन्य प्राणी तथा बंदरों की समस्या से निपटने के लिये गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश में वर्मिन (नाशक जीव) घोषित किए गए बंदरों को वैज्ञानिक तरीके से मारने के लिए ईको टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। लोगों की धार्मिक भावनाओं के चलते बंदरों को मारने से बचने के कारण अब यह कार्य राज्य वन विभाग द्वारा गठित ईको टास्क फोर्स को सौंपा जाएगा। सीएम ने कहा कि बंदरों का खतरा प्रदेश के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। हमें बंदर बाहुल्य क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा।

  • शिमला में खुलेगा ‘रेस्क्यू सेंटर फॉर लाइफ केयर ’

उन्होंने कहा कि बंदर फसलों व फलों को बड़ा नुकसान पहुंचाने के अलावा बच्चों और महिलाओं पर हमला कर रहे हैं, इसलिए सरकार ने शिमला के नजदीक‘रेस्क्यू सेंटर फॉर लाइफ केयर’ खोलने का निर्णय लिया है। सीएम ने कहा कि राष्ट्रीय उच्च मार्गों, गांवों तथा अन्य शहरों में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्य दलों का गठन किया जाएगा। इसके अलावा, मादा बंदरों में गर्भ निरोधक गोलियां से प्रजनन पर नियंत्रण लगाने के प्रयास भी किए जाएंगे। एआईसीसी की सचिव आशा कुमारी ने राष्ट्रीय उच्च मार्गों पर बंदरों को खाद्य पदार्थ खिलाने पर कानूनी कदम उठाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कानून बनने के बावजूद राष्ट्रीय उच्च मार्गों से लगते स्थायी स्थलों पर कानून एजेंसियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण कोई बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि बंदरों तथा अन्य जंगली जंतुओं के उत्पात से निपटने के लिए एक स्थाई समाधान की आवश्यकता है। दलों को विशेष क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा और इसके पश्चात बंदरों की जनसंख्या में आई गिरावट का पता लगाना होगा।


बंदरों के माथे पर बनाएं जाएंगे टैटू

अतिरिक्त मुख्य सचिव तरूण कपूर ने कहा कि नसबंदी किए गए बंदरों की पहचान के लिए उनके माथे के बीच स्थाई टैटू उकेरे जाएंगे। क्रियाशील होने पर मोबाइल बंदर नसबंदी इकाई (वैन) भी काफी सहायक सिद्ध होगी।‘रेस्क्यू सेंटर फॉर लाइफ केयरमें एक हजार आवारा तथा नसबंदी किए गए बंदरों को रखने की क्षमता होंगी। कपूर ने कहा कि भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को 53 तहसीलों तथा उप-तहसीलों की सूची भेजी गई है,जहां किसानों तथा बागवानों को राहत देने के लिए बंदरों को नाशक जीव घोषित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि शीघ्र ही भारतीय वन्य प्राणी संस्थान (डब्ल्यूआईआई)देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में जंगली सूअर,सांभर तथा नील गाय को वर्मिन घोषित करने के लिए एक सर्वेक्षण किया जाएगा। अभी तक 38 तहसीलों व उप तहसीलों में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा वर्मिन घोषित किए गए बंदरों को मारने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों पर बंदरों का आक्रमण रोकने के लिए शिमला के स्कूलों के समीप बंदरों की निगरानी के लिए पहरेदारों की तैनाती की गई है।

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