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नमाज अदा करने के दौरान भिड़े, चार को गहरी चोटें

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नाहन। पांवटा साहिब में मिश्रवाला के समीप आपसी विवाद के चलते मुस्लिम समुदाय के दो गुटों में आज नमाज अदा करने के दौरान खूनी झड़प हो गई। दरसल यहां मदरसे में दो गुटों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है और उसी के चलते आज दोनों गुट इस बात पर भिड़ पड़े की नमाज किस गुट का व्यक्ति पढे़गा। देखते ही देखते कुछ लोगों ने नमाज अदा करने बैठे लोगों पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें आधा दर्जन लोगों को गम्भीर चोटें आई हैं, जिसमें एक बच्चा भी शामिल है। जानकारी के अनुसार पुलिस भी मौके पर पहुंच गई है और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचा दिया गया है। यह विवाद कुछ समय पहले उस समय खड़ा हुआ था जब यहां मौलाना कबरूद्दीन का एक महिला के साथ अश्लील हरकत करने के वीडियो सामने आया था जिसमे मौलाना को जेल भी जाना पड़ा था।

nahan1 गौरतलब है कि पिछले लंबे अरसे से मदरसा कादिया के संचालन को लेकर दो गुटों के बीच तनाव चल रहा है। गत 4 सितंबर को भी मुस्लिम समुदाय के दो गुटों में उस समय तनाव पैदा हो गया था जब यहां पर एक पक्ष देवबन से आए मौलवी का जलसा करना चाहता था जबकि दूसरा इससे सहमत नहीं था। इस दौरान उत्तरप्रदेश के सहारनपुर से भारी संख्या में लोग पहुंचे थे। तनाव को देखते हुए 40-50 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। ईद के अवसर पर यहां पर कड़ी सुरक्षा में नमाज अदा की थी और बाहरी राज्य के लोगों को मदरसे में प्रवेश करने नहीं दिया गया था। 

बकरीद पर अमन शांति की कामना

डेस्क। प्रदेश भर में बकरीद यानी ईद-उल-जुहा का त्योहार मनाया जा रहा है। इस मुकदस मौके पर मस्जिदों में नमाज अदा की गई। यह त्योहार पवित्र रमजान माह के बाद मनाई जाने वाली ईद उल फ़ितर के तीन माह बाद मनाया जाता है। यह त्योहार मुस्लिम धर्म में विशेष महत्व रखता है। ईद-उल-जुहा को बकरीद के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन समुदाय के लोग अपनी गलतियों की माफ़ी मांगते हुए अपनी हैसियत और संपत्ति के हिसाब से खुदा के नाम पर कुर्बानी देते हैं। इस अवसर पर जामा मस्जिद धर्मशाला, सिद्धबाड़ी, योल और जिलाभर की अन्य मस्जिदों में नमाज अदा की गई। लोगों ने एक दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। यह त्योहार नमाज अदा करने के बाद एक हफ्ते तक चलता है।

solan-namazसोलन स्थित जामा मस्जिद में सुबह नमाज अदा की और एक दूसरे के गले लग कर बधाई दी। नाहन में मुस्लिम समुदाय ने रामकुडी स्थित ईदगाह में नमाज अदा की। सैंकड़ों ने ईदगाह में पहुंच कर एक दूसरे को गले मिल कर बधाई दी और अमन और शांति की कामना की। जाहिर है कि इस्लामी साल में दो ईद मनाई जाती हैं जिनमें से एक ईद-उल-जुहा और दूसरी ईद-उल-फितर। ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है। इसे रमजान को खत्म करते हुए मनाया जाता है। लेकिन बकरीद का महत्व अलग है। हज की समाप्ति पर इसे मनाया जाता है। इस्लाम के पांच फर्ज माने गए हैं, हज उनमें से आखिरी फर्ज माना जाता है। मुसलमानों के लिए जिंदगी में एक बार हज करना जरूरी है। हज होने की खुशी में ईद-उल-जुहा का त्योहार मनाया जाता है।

nahan-namazयहूदी, ईसाई और इस्लाम तीनों ही धर्म के पैगंबर हजरत इब्राहिम ने कुर्बानी का जो उदाहरण दुनिया के सामने रखा था, उसे आज भी परंपरागत रूप से याद किया जाता है। आकाशवाणी हुई कि अल्लाह की रजा के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करो, तो हजरत इब्राहिम ने सोचा कि मुझे तो अपनी औलाद ही सबसे प्रिय है। उन्होंने अपने बेटे को ही कुर्बान कर दिया। उनके इस जज्बे को सलाम करने का त्योहार है ईद-उल-जुहा। ईद-उल-फितर की तरह ईद-उल-जुहा में भी गरीबों और मजलूमों का खास ख्याल रखा जाता है। इसी मकसद से ईद-दल-जुहा के सामान यानी कि कुर्बानी के सामान के तीन हिस्से किए जाते हैं। एक हिस्सा खुद के लिए रखा जाता है, बाकी दो हिस्से समाज में जरूरतमंदों में बांटने के लिए होते हैं, जिसे तुरंत बांट दिया जाता है।

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