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एक रात में और एक हाथ से बना है यह मंदिर …

Ek Hathiya Deval Temple Uttarakhand

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उत्तराखंड में पिथौरागढ़ से धारचूला जाने वाले मार्ग पर लगभग सत्तर किलोमीटर दूर स्थित है कस्बा थल, जिससे लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित है ग्राम सभा बल्तिर। यहां एक सुंदर देवालय है नाम है एक हथिया देवाल। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं, भगवान भोलेनाथ का दर्शन करते हैं, मंदिर की अनूठी स्थापत्य कला को निहारते हैं और पुनः अपने घरों को लौट जाते हैं।

रोचक यह है कि मात्र एक हाथ से और एक रात में बने इस प्राचीन शिव मंदिर के शिवलिंग की पूजा नहीं होती। किंवदंती है कि इस ग्राम में एक मूर्तिकार रहता था जो पत्थरों को काटकर मूर्तियां बनाया करता था। एक बार किसी दु्र्घटना में उसका एक हाथ जाता रहा। गांव के कुछ लोगों ने उसे यह उलाहना देना शुरू किया कि अब एक हाथ के सहारे वह क्या कर सकेगा? यह सुनकर मूर्तिकार खिन्न हो गया। उसने प्रण कर लिया कि वह अब उस गांव में नहीं रहेगा। यह प्रण करने के बाद वह एक रात अपनी छेनी, हथौड़ी सहित अन्य औजार लेकर वह गांव के दक्षिणी छोर की ओर गया।

यह जगह प्रायः ग्रामवासियों के लिए शौच आदि के उपयोग में आती थी। वहां पर एक विशाल चट्टान थी। अगले दिन प्रातःकाल जब गांव वासी वहां गए, तो पाया कि किसी ने रात भर में चट्टान को काटकर एक देवालय का रूप दे दिया है। कौतूहल से सबकी आंखें फटी रह गईं। सारे गांव के लोग एकत्रित हुए। सभी ने उसे ढूंढा और आपस में एक दूसरे से उसके बारे में पूछा, परन्त्तु उसका कुछ भी पता न चल सका, वह एक हाथ का कारीगर गांव छोड़कर जा चुका था।

कहा जाता है कि भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर अभिशप्त है। उसने एक रात में भव्य मंदिर तो तैयार कर दिया था, लेकिन शिवलिंग का अर्घा उत्तर दिशा में बनाने के बजाय दक्षिण दिशा में बना दिया था। यहां के लोगों का यह मानना है कि विपरीत अर्घा वाला यह शिवलिंग पूजन के योग्य नहीं है और इसकी पूजा पूजने से कोई अनहोनी हो सकती है इसलिए आज तक किसी ने भी इस शिवलिंग की पूजा नहीं की।

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