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क्रूरता मामलाः तथाकथित पुजारिन की अंधभक्ति बनी प्रताड़ना की मुख्य वजह

क्रूरता मामलाः तथाकथित पुजारिन की अंधभक्ति बनी प्रताड़ना की मुख्य वजह

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मंडी। स्वयंभू तथाकथित पुजारिन के प्रति गांव वालों की अंधभक्ति गांव के उन लोगों के लिए प्रताड़ना बनी है, जो बीना सोचे समझे पुजारिन के आदेशों पर कभी भी देवरथ कंधों पर उठाकर लोगों को डराने के लिए निकल जाते थे। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में यही बात सामने आई है। पुख्ता सूत्रों के अनुसार गांव के लोग पुजारिन के आदेशों को देवता का आदेश मानकर उसका आंख बंद करके पालन करते हैं। इन लोगों की यही अंधभक्ति आज इन्हें पुजारिन के साथ सलाखों के पीछे ले आई है। जरा पूरे मामले को विस्तार से समझिए और अंधभक्ति को जानने का प्रयास कीजिए।


तीन वर्ष पूर्व देवता माहूंनाग के मुख्य पुजारी की मृत्यु हो जाती है। उसके बाद विधि विधान से किसी पुजारी को देवता का दायित्व नहीं सौंपा जाता। दिवंगत पुजारी की बेटी खुद को देवता का अगला पुजारी बताती है। गांव के लोग भी इस बात पर यकीन कर लेते हैं और उसकी बातों को मानने लग जाते हैं। बीते करीब चार-पांच महीनों से गांव में एक के बाद एक ऐसे घटनाक्रम हुए जिनपर गांव के लोगों को ही विश्वास नहीं हुआ। यह पुजारिन कभी भी देवरथ के साथ कहीं भी पहुंच जाती थी। खासतौर पर उन लोगों को अधिक निशाना बनाया गया जो किसी दूसरे देवी-देवता की पूजा भी करते थे। शायद तथाकथित स्वयंभू पुजारिन को इस बात का डर था कि अगर लोग दूसरे देवी-देवताओं को पूजने लग गए तो उसके देवता की प्रभुसत्ता समाप्त हो जाएगी और उसका कारोबार भी घट जाएगा। यही कारण लोगों की प्रताड़ना की मुख्य वजह भी माना जा रहा है।

 

अब जरा बुजुर्ग महिला और एक रिटायर टीचर के साथ घटी घटनाओं पर गौर फरमाईए। जानकारी के अनुसार बुजुर्ग महिसा अपने घर में देवता माहूंनाग के साथ अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा करती थी और रिटायर टीचर भी ऐसा ही करते थे। जब इस बात का पता तथाकथित पुजारिन को लगा तो उसने वही किया जो आज हर व्यक्ति अपने मोबाइल फोन पर देख रहा है। रिटायर टीचर ने भी पुलिस को दी शिकायत में यही कहा है कि उसने घर पर माता सरस्वती और अन्य देवी-देवताओं की तस्वीरें लगा रखी थीं, जिसके कारण लोग देवरथ के साथ उसके घर आए और तोड़फोड़ की तथा यह चेतावनी दी कि सिर्फ देवता माहूंनाग की ही पूजा करनी है। जब इस बारे में हमने थोड़ी और जांच पड़ताल की तो पता चला कि ऐसी घटनाएं गांव के कई लोगों के साथ घट चुकी हैं, लेकिन उन्होंने देवता के डर से अपने मुंह पर ताला लगा दिया।

यह भी जानकारी प्राप्त हुई कि कम उम्र में प्रतिष्ठित देवता की पुजारिन बनने और अनुभव न होने के कारण कुछ लोगों ने इसका नाजायज फायदा भी उठाया। तथाकथित पुजारिन की नादानी को गांव के कुछ लोगों ने हथियार बनाया और अपनी व्यक्तिगत रंजिश को देव आस्था का नाम देकर पुजारिन को भड़काने का प्रयास किया गया। देवता की पूरे इलाके में बहुत अधिक मान्यता है और लोग यहां बड़ी श्रद्धा के साथ शीष नवाने आते हैं। लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके को शर्मसार करके रख दिया है। खुद की गिरफ्तारी को रोकने के लिए भी तथाकथित पुजारिन देवरथ के साथ थाने का घेराव करने लोगों के साथ निकली थी, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से यह योजना धरी की धरी रह गई और अब यह पुजारिन सलाखों के पीछे है।

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