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Good Start: Govt. School ही बनने चले हैं आइना

Good Start: Govt. School ही बनने चले हैं आइना

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शिमला। शिक्षकों में यदि कुछ करने का जज्बा हो तो क्या नहीं हो सकता। स्कूल को अच्छा बनाने में शिक्षकों का अहम योगदान होता है और कई शिक्षकों ने इसका बीढ़ा उठाया है और जिस स्कूल में उनके कदम पढ़ते हैं, उस स्कूल का कायाकल्प हो जाता है। शिक्षकों के जोश को सरकार भी बढ़ा रही है और एलीमेंटरी शिक्षा विभाग ने एसएसए के साथ मिलकर इसे आगे बढ़ाया है। इससे निजी स्कूलों की ओर आकर्षित होने वाले लोग भी अब वापस सरकारी स्कूलों की तरफ मुड़ रहे हैं। एलीमेंटरी शिक्षा विभाग और एसएसए ने अपने खास शिक्षा कार्यक्रम के तहत ऐसे स्कूलों को प्रोत्साहित कर दूसरों को भी आइना दिखाया है। खास शिक्षा कार्यक्रम के तहत विभाग ने उन स्कूलों के अच्छे कार्यो को सबके सामने रखा है और उन्होंने क्या खास किया है, उसकी गतिविधियों को अपनी वेबसाइट पर स्थान दिया है। इसका मकसद और स्कूलों को इसके लिए प्रेरित करना है। किस स्कूल में शिक्षक क्या बेहतर कार्य कर रहे हैं, उसका आकलन किया जाता है और इसमें भी प्रतियोगिता होती है। स्कूलों में सफाई व्यवस्था से लेकर पढ़ाने के तौर तरीकों आदि सब का आकलन किया जाता है।


  • अच्छा काम करने वाले स्कूलों को किया जा रहा प्रोत्साहित
  • इन स्कूलों की गतिविधियों को सबके सामने रखा जा रहा


कई शिक्षकों ने अपने स्कूल में सुधार लाने में स्थानीय लोगों को भी साथ जोड़ा है। क्योंकि जिनके बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, यदि वे भी उसमें कुछ योगदान करते हैं तो उससे आने वाली पीढ़ी को अच्छी शिक्षा देने में और मदद मिलती है। शिक्षकों की पहल का कई जगह असर भी हुआ है और उन्होंने इसमें मदद की है। इससे कई स्कूलों का कायाकल्प भी हुआ है। उधर, खास शिक्षा कार्यक्रम की बात करें तो इसमें कई जिलों के स्कूलों में अच्छा काम किया है। इनमें हमीरपुर जिले के जीपीएस बड़सर, भोटा, दांदड़ू, कांजियां, महराल, समीरपुर, लोहारली, मंडी जिले के पपलोटु, भटेड़, गोपालपुर, फागला, जरोल, भोउण, पद्दर, मतियारा, कोट तुंगल, टलयाहर, चंबा जिले के ग्रागर, लु़ड्डू, कांगड़ा जिले के बारम, पढ़ेर, मस्सल, घोराब, कढेरटी, परौर, कुल्लू जिले के शिल, टिल, शिमला जिले का कलसार आदि ऐसे स्कूल हैं, जहां अलग से कार्य हुआ है। इनमें से कुछ स्कूलों में तो कंप्यूटर हैं और वहां स्मार्ट क्लास भी लगती है। जिन स्कूलों में शानदार कार्य किया है, उसका उल्लेख भी साइट पर है, इनमें जिन शिक्षकों का योगदान है, उनके नाम का भी जिक्र है। यह उन दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा स्रोत हैं और बाकी शिक्षक भी इनकी राह पर चल रह कुछ नया कर सकते हैं। इसके लिए जरूरत इच्छा शक्ति की है और यदि ऐसा और भी करें तो इससे सरकारी क्षेत्र में रेंग रही शिक्षा निसंदेह ऊपर उठेगी।

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